*यूज एंड थ्रो नहीं, यूज एंड ग्रो अपनाएँ-परमार्थ निकेतन से वैश्विक संदेश*

*अनेकों देशों से आये युवाओं को पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने दिया प्रकृति संरक्षण का संदेश*

*अंतरराष्ट्रीय वन दिवस पर चेतावनी-वन बचेंगे तभी जीवन बचेगा*

*इंटरनेट के साथ “इनरनेट” से जुड़ने का संदेश*

*इंस्पायर, स्वयं जागें, और दूसरों के जीवन में प्रकाश बनें, इनवॉल्व, केवल देखें नहीं, बदलाव का हिस्सा बनें, इनोवेट, नए विचारों से नई दिशा और समाधान खोजें, इंटीग्रेट, जीवन, प्रकृति और मूल्यों में संतुलन स्थापित करें*

*स्वामी चिदानन्द सरस्वती*

ऋषिकेश, 21 मार्च। परमार्थ निकेतन में विश्व के अनेकों देशों से आये विद्यार्थियों ने परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी एवं डॉ. साध्वी भगवती सरस्वती जी से भेंट कर जीवन, पर्यावरण और आध्यात्मिकता से जुड़े अनेक विषयों पर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया।

अंतरराष्ट्रीय वन दिवस के अवसर पर पूज्य स्वामी जी ने युवाओं को सशक्त संदेश देते हुए कहा कि “खाया और फेंका” संस्कृति मानवता और प्रकृति दोनों के लिए घातक है। उन्होंने आह्वान किया कि युवा “यूज एंड थ्रो” की प्रवृत्ति को त्यागकर “यूज एंड ग्रो” की संस्कृति अपनाएँ, जो सतत विकास और संतुलित जीवन का मार्ग प्रशस्त करती है।

पूज्य स्वामी जी ने कहा कि वर्तमान उपभोक्तावादी सोच ने पृथ्वी के संसाधनों पर अत्यधिक दबाव डाल है। प्लास्टिक प्रदूषण, खाद्य अपव्यय और प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध उपयोग हमें एक गहरे संकट की ओर ले जा रहा है। उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि छोटे-छोटे सकारात्मक परिवर्तन जैसे पुनः उपयोग, संरक्षण और सजगता एक बड़े बदलाव की शुरुआत बन सकता हैं।

इस अवसर पर पूज्य स्वामी जी ने अर्थ ओवरशूट डे का उल्लेख करते हुए कहा कि यह वह दिन होता है जब हम वर्ष भर के प्राकृतिक संसाधनों को समय से पहले ही समाप्त कर देते हैं। हाल के वर्षों में यह दिन जुलाई के अंत या अगस्त की शुरुआत में आ जाता है, जो बढ़ती चिंता का संकेत है। इसके बाद हम प्रकृति से “उधार” पर जीते हैं अर्थात जितना लेते हैं, उतना लौटाते नहीं।

पूज्य स्वामी जी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय वन दिवस हमें स्मरण कराता है कि वन केवल हरियाली नहीं, बल्कि जीवन, संतुलन और साधना के आधार हैं। सनातन परंपरा में वनों को चेतना का केंद्र माना गया है, जहाँ ऋषि-मुनियों ने तप कर मानवता को दिशा दी।

उन्होंने कहा कि आज का तथाकथित विकास वन-संस्कृति के विनाश पर आधारित होता जा रहा है। वृक्षों की कटाई केवल पर्यावरण की हानि नहीं, बल्कि अस्तित्व का संकट है। जब एक वृक्ष गिरता है, तो केवल लकड़ी नहीं, बल्कि जीवन का संतुलन भी टूटता है।

पूज्य स्वामी जी ने सनातन दृष्टिकोण को स्पष्ट करते हुए कहा, “पृथ्वी हमारी माता है और हम उसकी संतान हैं।” ऐसे में वनों का दोहन अपनी ही जड़ों को काटने जैसा है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, अनियमित वर्षा, बाढ़ और बढ़ता तापमान प्रकृति की चेतावनी हैं कि हमने संतुलन खो दिया है।

भविष्य की चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि क्या हम आने वाली पीढ़ियों को एक ऐसी पृथ्वी देना चाहते हैं, जहाँ शुद्ध वायु और जल दुर्लभ हो जाएँ? यह समय केवल सोचने का नहीं, बल्कि ठोस कदम उठाने का है।

उन्होंने सभी से आह्वान किया कि वे अपने जीवन में परिवर्तन लाएँ, “यूज एंड थ्रो” से “यूज एंड ग्रो” की ओर बढ़ें, और वन व पर्यावरण संरक्षण को अपना व्यक्तिगत धर्म मानें।

पूज्य स्वामी जी ने सभी को संकल्प कराया कि हम अपने जन्मदिवस, पर्व और उत्सवों पर पौधारोपण करें और प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाएँ। क्योंकि यदि वन बचेंगे, तभी जीवन बचेगा।

विश्व के अनेकों देशों से आये विद्यार्थियों ने परमार्थ निकेतन की दिव्य आध्यात्मिक परंपराओं, माँ गंगा की दिव्य आरती, प्रातःकालीन यज्ञ, सत्संग और प्रार्थना में सहभाग कर गहन शांति और धन्यता का अनुभव किया। उन्होंने भाव-विभोर होकर कहा कि यह केवल एक स्थान नहीं, बल्कि एक जीवंत चेतना है, जहाँ माँ गंगा की निर्मल धारा के साथ-साथ ज्ञान, संस्कार और आत्मबोध की गंगा भी निरंतर प्रवाहित हो रही है।

विद्यार्थियों ने अनुभव साझा करते हुए कहा कि यहाँ की प्रत्येक गतिविधि केवल अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मिक जागरण का माध्यम है। यह स्थान तनाव मुक्ति, आंतरिक संतुलन और अपने मूल व मूल्यों से पुनः जुड़ने का एक अद्भुत और प्रेरणादायक केंद्र है, जो जीवन को नई दिशा और गहराई प्रदान करता है।

By Shashi Sharma

Shashi Sharma Working in journalism since 1985 as the first woman journalist of Uttarakhand. From 1989 for 36 years, she provided her strong services for India's top news agency PTI. Working for a long period of thirty-six years for PTI, he got her pen ironed on many important occasions, in which, by staying in Tehri for two months, positive reporting on Tehri Dam, which was in crisis of controversies, paved the way for construction with the power of her pen. Delivered.

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