पद्मश्री कैलाश खेर जी पधारे परमार्थ निकेतन
पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी के पावन सान्निध्य में विश्व विख्यात गंगा आरती में किया सहभाग
जोगी” एल्बम के माध्यम से सनातन संस्कृति व आदि शंकराचार्य जी की दिव्य चेतना को समर्पित भावांजलि
जोगी” संत कबीर जी के सात सौ वर्ष प्राचीन दिव्य भजन से प्रेरित संगीतमय प्रस्तुति
जीवन के हर मोड पर संगीत साथ हो तो जीवन बन जाता है सुरीला
स्वामी चिदानन्द सरस्वती
सनातन संस्कृति अडिग है, अमर है और मेरुदण्ड है
कैलाश खेर
ऋषिकेश, 27 अप्रैल। देवभूमि ऋषिकेश स्थित परमार्थ निकेतन आज एक अलौकिक और आध्यात्मिक ऊर्जा से आलोकित हो उठा, जब परमार्थ निकेतन के पावन गंगा तट पर “जोगी” एल्बम का विमोचन हुआ।
सुप्रसिद्ध गायक, पद्मश्री कैलाश खेर जी परमार्थ निकेतन पधारे और पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी के पावन सान्निध्य में विश्व विख्यात दिव्य गंगा आरती में सहभाग किया।
माँ गंगा के पावन तट पर वेद मंत्रों की गूँज, दीपों की स्वर्णिम आभा, भक्ति की तरंगों और हर-हर गंगे के दिव्य घोष के मध्य पद्मश्री कैलाश खेर जी ने लगभग सात सौ वर्ष प्राचीन संत कबीर जी के अमर भजन को अपनी ओजस्वी और आत्मा को स्पर्श करने वाली स्वर साधना से सजीव कर दिया। उनके स्वर जैसे ही गूँजे, वातावरण भक्ति, भाव और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो संत कबीर जी की वाणी स्वयं गंगा तट पर पुनः अवतरित होकर मानवता को प्रेम, सत्य और ईश्वर स्मरण का संदेश दे रही हो।
“जोगी” यह गीत सनातन धर्म की अमर चेतना, भारत के ऋषियों की तपश्चर्या और जगद्गुरु आदि शंकराचार्य जी के दिव्य जीवन का संगीतमय वंदन है।
“जोगी” में आदि शंकराचार्य जी के बाल्यकाल से संन्यास, भारत भ्रमण, शास्त्रार्थ, धर्म पुनर्जागरण और राष्ट्र की आध्यात्मिक एकता के दिव्य अभियान को अत्यंत भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया गया है। यह गीत भारत की उस सनातन आत्मा का स्मरण है, जिसने युगों-युगों तक धर्म, ज्ञान और संस्कृति की ज्योति प्रज्वलित रखी।
पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि, “संगीत जब साधना बनता है, तब वह केवल स्वर नहीं रहता, वह ईश्वर का संदेश बन जाता है। कैलाश जी का ‘जोगी’ भारत की आध्यात्मिक धरोहर और गुरु परंपरा को समर्पित एक दिव्य स्तुति है।”
उन्होंने कहा कि आदि शंकराचार्य जी ने भारत को केवल दार्शनिक दृष्टि ही नहीं दी, बल्कि सम्पूर्ण राष्ट्र को सांस्कृतिक एकता के सूत्र में बाँधा। आज आवश्यकता है कि युवा पीढ़ी उनके जीवन, त्याग, ज्ञान और राष्ट्रधर्म से प्रेरणा ले तथा अपनी जड़ों से जुड़ी रहे।
कैलाश खेर जी ने कहा कि उनकी “जोगी” एल्बम के माध्यम से वे यह संदेश देना चाहते हैं कि सनातन संस्कृति अडिग है, अमर है और मेरुदण्ड की तरह दृढ़ता से खड़ी है। अनेक आक्रमण, चुनौतियाँ और विपरीत परिस्थितियाँ आईं, किन्तु भारत की आध्यात्मिक चेतना कभी पराजित नहीं हुई।
उन्होंने कहा कि भारत जैसा देश विश्व में दूसरा नहीं, जहाँ संस्कृति, करुणा, ज्ञान और अध्यात्म साथ-साथ प्रवाहित होते हैं। जिन्होंने मंदिरों, परंपराओं और आस्थाओं को मिटाने का प्रयास किया, वे स्वयं इतिहास से मिट गए, पर सनातन की ज्योति आज भी उतनी ही तेजस्वी होकर जगमगा रही है।
पूज्य स्वामी जी ने पद्मश्री कैलाश खेर जी को रुद्राक्ष का दिव्य पौधा भेंट कर उनका अभिनन्दन किया।

By Shashi Sharma

Shashi Sharma Working in journalism since 1985 as the first woman journalist of Uttarakhand. From 1989 for 36 years, she provided her strong services for India's top news agency PTI. Working for a long period of thirty-six years for PTI, he got her pen ironed on many important occasions, in which, by staying in Tehri for two months, positive reporting on Tehri Dam, which was in crisis of controversies, paved the way for construction with the power of her pen. Delivered.

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