83rd death anniversary of martyr Kushal Kunwar, असम के शहीद स्वतंत्रता सेनानी कुशल कुंवर की 83 वीं पुण्यतिथि पर असम में वृहद कार्यक्रम आयोजित।

83rd death anniversary of martyr Kushal Kunwar, A grand programme was organised in Assam on the 83rd death anniversary of martyr freedom fighter Kushal Kunwar of Assam.

मुख्यमंत्री हिमन्त बिश्व शर्मा ने दी शहीद को भावभरी श्रद्धांजलि, मुख्यमंत्री ने पूरा दिन समारोह में की भागीदारी, जनता गदगद।

असम के मुख्यमंत्री हिमन्त बिश्व शर्मा ने कुशल कुंवर की पुण्यतिथि पर दिल्ली में देश के सभी दिवंगत स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों तथा शहीदों को श्रद्धांजलि समर्पित करने के लिए विराट स्तर का आयोजन करने की घोषणा की, उन्होंने असम के सभी स्वतंत्रता सेनानी परिवारों को किसी भी स्वतंत्रता सेनानी तथा शहीद परिवारों को किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होने देंगे।

83rd death anniversary of martyr Kushal Kunwar, गुवाहाटी, में 15 जून को असम के अमर शहीद कुशल कुंवर की 83 वीं पुण्यतिथि पर असम सरकार ने वृहद कार्यक्रम आयोजित कर अमर शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित की।

कुशल कुंवर असम के एक महान स्वतंत्रता सेनानी थे,वह पूरे भारत में एकमात्र ऐसे शहीद थे जिन्हें 1942 के ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ के दौरान अंग्रेजों द्वारा फांसी की सजा दी गई थी।

दो सत्रों में सम्पन्न हुए श्रद्धांजलि समारोह के दौरान असम के मुख्यमंत्री हिमन्त बिश्व शर्मा की निरंतर उपस्थित ने सबको गदगद किया, कार्यक्रम के प्रात:कालीन सत्र में सर्व प्रथम कुशल कुंवर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि समर्पित की गई, जिसमें जयन्त बल्लभ वरुआ कैबिनेट मंत्री, सांसद श्रीमती बिजुली कलिता मेथी, विधायक मृगेन्द्र सलोनिया तथा कमिश्नर स्वप्नानिल पाल के साथ ही अन्य प्रशासनिक अधिकारियों तथा स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पुनेश्वर दुवारा, भोलानाथ नागोरिया, गोलक हजारिका, स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी परिवार समिति के राष्ट्रीय महासचिव जितेन्द्र रघुवंशी सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
संचालन स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी परिवार समिति के कार्यकारी अध्यक्ष द्विजेन्द्र मोहन शर्मा ने किया।
दोपहर बाद दूसरे सत्र का कार्यक्रम रूपनगर स्थित स्वतंत्रता सेनानी सदन के विशाल सभागार में हुआ, जहाँ सर्वप्रथम असम के मुख्यमंत्री हिमन्त बिश्व शर्मा ने मुख्य द्वार पर स्थित कुशल कुंवर के चित्र पर पुष्पांजलि समर्पित किया तत्पश्चात सेवा सदन के कार्यालय में बैठकर संगठन के राष्ट्रीय महासचिव जितेन्द्र रघुवंशी ने अपने सहयोगियों कार्यकारी अध्यक्ष द्विजेन्द्र मोहन शर्मा, उपाध्यक्ष कमल चन्द्र लहकर, श्रीमती अलका शर्मा तथा श्रीमती स्मिता के साथ मुख्यमंत्री से स्वतंत्रता सेनानी परिवारों की वर्तमान स्थिति पर विस्तार से चर्चा की, प्रधानमंत्री को दिए गए विभिन्न बिन्दुओं में से दिल्ली में राष्ट्रीय स्वतंत्रता सेनानी मेमोरियल बनाने, राज्यसभा में 2 प्रतिनिधियों का मनोनयन करने, दिल्ली में स्वतंत्रता सेनानी सेवा सदन बनाने, पाठ्य पुस्तकों में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों, शहीदों का जीवन परिचय पढ़ाने तथा एमिनेंट कमेटी में विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों का मनोनयन करने जैसे विषयों पर गंभीरता के साथ केन्द्रीय सरकार के सामने रखने का आश्वासन दिया।

असम में अब तक प्रत्येक जिले में स्वतंत्रता सेनानी सेवा सदन बनाने के लिए 50- 50 लाख रुपये स्वीकृत करने, प्रथम पीढ़ी को सम्मान पेंशन प्रदान करने की प्रक्रिया अन्तिम चरण में है, उसे शीघ्र ही धरातल पर उतारने के लिए कहा।

विचार विमर्श के बाद सेवा सदन के विशाल सभागार में मुख्यमंत्री, विधायक विजय गुप्ता, गृह सचिव श्रीमती निवेदिता लश्कर स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों तथा राष्ट्रीय महासचिव जितेन्द्र रघुवंशी का स्वागत किया गया।
कार्यकारी अध्यक्ष द्विजेन्द्र मोहन शर्मा ने सभी अतिथियों का अंगवस्त्र तथा स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। मुख्यमंत्री हिमन्त बिश्व शर्मा ने कुशल कुंवर के जीवन पर प्रकाश डालते हुए दिल्ली में देश के सभी दिवंगत स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों तथा शहीदों को श्रद्धांजलि समर्पित करने के लिए विराट स्तर का आयोजन करने की घोषणा की, उन्होंने असम के सभी स्वतंत्रता सेनानी परिवारों को आश्वस्त किया कि यहाँ तो किसी भी स्वतंत्रता सेनानी तथा शहीद परिवारों को हम किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होने देंगे।

जितेन्द्र रघुवंशी ने इस कार्यक्रम में आमंत्रित करने के लिए आयोजकों तथा असम सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया और स्वतंत्रता सेनानी शहीद परिवारों से *हर महीने प्रथम रविवार दस बजे दस मिनट स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों तथा शहीदों के नाम* अभियान के माध्यम से प्रत्येक जिले के स्वतंत्रता सेनानी परिवारों को संगठित करने का निवेदन किया।

By Shashi Sharma

Shashi Sharma Working in journalism since 1985 as the first woman journalist of Uttarakhand. From 1989 for 36 years, she provided her strong services for India's top news agency PTI. Working for a long period of thirty-six years for PTI, he got her pen ironed on many important occasions, in which, by staying in Tehri for two months, positive reporting on Tehri Dam, which was in crisis of controversies, paved the way for construction with the power of her pen. Delivered.

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