पेट्रोल पंपों से देशभर तक पहुंचेगा पहाड़ का स्वाद,

रीप परियोजना से स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को मिलेगा बड़ा बाजार, डोईवाला पेट्रोल पंप में खुलेगा प्रदेश का पहला ‘हिलान्स आउटलेट’

देहरादून  उत्तराखंड के पहाड़ों में अब केवल मौसम का मिजाज ही नहीं बदल रहा, बल्कि यहाँ की ग्रामीण महिलाओं की तकदीर भी एक नया मोड़ ले रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ और महिला सशक्तिकरण के विजन को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में धरातल पर उतारा जा रहा है। पहाड़ की महिलाएं अब अपने हुनर, कड़ी मेहनत और स्थानीय उत्पादों के दम पर न केवल आत्मनिर्भर बन रही हैं, बल्कि देवभूमि आने वाले पर्यटकों का दिल भी जीत रही हैं।
इसी कड़ी में देहरादून जिला प्रशासन और रीप परियोजना ने मिलकर ग्रामीण महिलाओं की आजीविका को एक ऐसा ‘हाईवे’ दे दिया है, जहाँ उनकी सफलता की रफ्तार दोगुनी होने वाली है।

‘हिलान्स आउटलेट’ से बदलेगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था
अक्सर ग्रामीण स्वयं सहायता समूहों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि वे बेहतरीन उत्पाद तो बना लेते हैं, लेकिन उन्हें बेचने के लिए बड़ा बाजार नहीं मिल पाता। देहरादून जिला प्रशासन ने इस समस्या का एक बेहद आधुनिक और प्रभावी समाधान निकाला है। अब जिले के व्यस्त पेट्रोल पंपों पर इन महिलाओं द्वारा तैयार किए गए उत्पादों की बिक्री के लिए विशेष ‘हिलान्स आउटलेट’ स्थापित किए जाएंगे।

इस बड़ी योजना को जमीन पर उतारने के लिए राज्य स्तर पर जिला प्रशासन और इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसीएल) के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता (एमओयू) हुआ है। इसका सीधा फायदा यह होगा कि पेट्रोल-डीजल भराने रुकने वाले लाखों पर्यटक और स्थानीय उपभोक्ता सीधे इन पहाड़ी उत्पादों को खरीद सकेंगे।

डोईवाला में सजेगा प्रदेश का पहला आउटलेट
इस अनूठी पहल की शुरुआत विकासखंड डोईवाला से होने जा रही है। जिला परियोजना प्रबंधक (रीप) सोनम गुप्ता ने बताया कि ‘‘स्टेट लेवल पर इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के साथ हुए एमओयू के तहत पहले चरण में डोईवाला के ‘फन एंड फूड किंगडम वाटर पार्क’ के पास स्थित आईओसीएल पेट्रोल पंप पर प्रदेश का पहला हिलान्स आउटलेट खोला जा रहा है। इसके बाद अन्य पेट्रोल पंपों पर भी इसका विस्तार किया जाएगा।’’

एक ही छत के नीचे मिलेगा उत्तराखंड का पारंपरिक स्वाद
हिलान्स आउटलेट्स पर पर्यटकों और आम जनता के लिए उत्तराखंड के शुद्ध और प्रामाणिक उत्पाद उपलब्ध होंगे। इनमें मुख्य रूप से पारंपरिक पहाड़ी दालें (जैसे गहत, भट्ट और तोर), शुद्ध पहाड़ी मसाले और जड़ी-बूटियाँ, स्थानीय डेयरी और खाद्य उत्पाद के साथ ही ग्रामीण महिलाओं द्वारा हस्तनिर्मित हैंडीक्राफ्ट सामग्रियां भी शमिल है।

ईंधन के साथ ‘संस्कृति’ भी ले जाएंगे पर्यटक
देहरादून आने वाले सैलानियों के लिए यह अनुभव बेहद खास होने वाला है। अब वे अपनी गाड़ियों में सिर्फ ईंधन ही नहीं भरवाएंगे, बल्कि उत्तराखंड के पारंपरिक स्वाद, खुशबू और संस्कृति को भी यादगार के तौर पर अपने साथ समेट कर ले जा सकेंगे।

यह पहल महज दुकानों की शुरुआत नहीं है, बल्कि उत्तराखंड के गांवों में रहने वाली उन हजारों महिलाओं के सपनों, उनकी आत्मनिर्भरता और आर्थिक आजादी की एक नई और सुनहरी इबारत है, जो अब पूरे देश के सामने मिसाल बनने जा रही है।


By Shashi Sharma

Shashi Sharma Working in journalism since 1985 as the first woman journalist of Uttarakhand. From 1989 for 36 years, she provided her strong services for India's top news agency PTI. Working for a long period of thirty-six years for PTI, he got her pen ironed on many important occasions, in which, by staying in Tehri for two months, positive reporting on Tehri Dam, which was in crisis of controversies, paved the way for construction with the power of her pen. Delivered.

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