एससी-एसटी एक्ट के मामलों में पीड़ितों को शीघ्र मिले सहायता राशि, पुलिस समय पर उपलब्ध कराए जरूरी दस्तावेज: एडीएम

हरिद्वार। अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) वैभव गुप्ता की अध्यक्षता में शनिवार को रोशनाबाद स्थित जिला कार्यालय सभागार में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा-17 के अंतर्गत जिला स्तरीय सतर्कता एवं अनुश्रवण समिति की बैठक आयोजित हुई। बैठक में समिति के सदस्यों ने अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन, पीड़ितों को समयबद्ध सहायता और अपराधों की रोकथाम को लेकर विभिन्न सुझाव दिए।

बैठक में जिला समाज कल्याण अधिकारी ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक एससी-एसटी एक्ट के 13 प्रकरण प्राप्त हुए हैं। इनमें से 10 पीड़ितों को आर्थिक सहायता का भुगतान किया जा चुका है, जबकि शेष मामलों के लिए समाज कल्याण निदेशालय, हल्द्वानी से बजट की मांग की गई है। बजट उपलब्ध होते ही शेष पीड़ितों को भी सहायता राशि जारी कर दी जाएगी।

अपर जिलाधिकारी वैभव गुप्ता ने पुलिस विभाग को निर्देश दिए कि एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज प्रत्येक मुकदमे में प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) के साथ आधार कार्ड, जाति प्रमाण पत्र, बैंक खाते का विवरण सहित सभी आवश्यक दस्तावेज समय से समाज कल्याण विभाग को उपलब्ध कराए जाएं, ताकि शासन की गाइडलाइन के अनुरूप पीड़ितों को बिना विलंब आर्थिक सहायता मिल सके।

उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि जिन क्षेत्रों में इस प्रकार की घटनाएं अधिक होती हैं, वहां पुलिस और समाज कल्याण विभाग संयुक्त रूप से जागरूकता शिविर आयोजित करें। समाजसेवियों, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों की सहभागिता से जागरूकता कार्यक्रम चलाकर सामाजिक समरसता और कानून के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाए।

बैठक में विधायक हरिद्वार के प्रतिनिधि श्यामल कुमार ने एससी-एसटी मामलों में आरोप पत्र दाखिल करने की समय-सीमा तय करने, अनावश्यक विलंब करने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने, संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस गश्त बढ़ाने, अनुसूचित जाति बाहुल्य क्षेत्रों में मिनी स्टेडियम एवं खेल सुविधाएं विकसित करने तथा स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से रोजगार एवं लघु उद्योगों को बढ़ावा देने के सुझाव दिए।

समिति सदस्य अनूप कुमार ने जाति प्रमाण पत्र निर्गत करने की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए वर्ष 1985 के अभिलेखों के स्थान पर उत्तराखंड राज्य गठन के बाद उपलब्ध अभिलेखों को आधार बनाए जाने का सुझाव रखा।

विधायक झबरेड़ा वीरेंद्र जाति ने कहा कि कई मामलों में अनुसूचित जाति के लोगों की शिकायतों पर समुचित कार्रवाई नहीं हो पाती तथा कुछ मामलों में अंतिम रिपोर्ट (एफआर) लगा दी जाती है। इस पर अपर जिलाधिकारी ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के प्रतिनिधि एवं क्षेत्राधिकारी सदर को आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

विधायक भगवानपुर ममता राकेश ने भगवानपुर क्षेत्र में एससी-एसटी अत्याचार की घटनाओं की रोकथाम के लिए नियमित जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने की आवश्यकता जताई। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि पुलिस विभाग की अपराध समीक्षा बैठकों में जनप्रतिनिधियों और विधायकों को भी आमंत्रित किया जाए, ताकि स्थानीय समस्याओं का प्रभावी समाधान किया जा सके।

बैठक में समिति के सदस्यों ने अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन, पीड़ितों को समयबद्ध सहायता उपलब्ध कराने तथा सामाजिक जागरूकता बढ़ाने के लिए समन्वित प्रयासों पर बल दिया।


By Shashi Sharma

Shashi Sharma Working in journalism since 1985 as the first woman journalist of Uttarakhand. From 1989 for 36 years, she provided her strong services for India's top news agency PTI. Working for a long period of thirty-six years for PTI, he got her pen ironed on many important occasions, in which, by staying in Tehri for two months, positive reporting on Tehri Dam, which was in crisis of controversies, paved the way for construction with the power of her pen. Delivered.

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