ज्ञान, दान और ध्यान महोत्सव में सनातन चेतना का भव्य समागम*

आचार्य धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री जी के 29 वें जन्मदिवस के अवसर पर परमार्थ निकेतन की ओर से अनेकानेक शुभकामनायें*

परमार्थ पीठाधीश्वर पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी का पावन सान्निध्य और आशीर्वाद*

*आचार्य धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री जी ने अपने जन्मदिवस के अवसर पर बेटियों की शिक्षा का किया ऐतिहासिक संकल्प*

*आचार्य धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री जी द्वारा रचित ‘मेरा सन्यासी’ कृति का हुआ लोकार्पण*

*हनुमान चालीसा एवं सुन्दरकाण्ड के महापाठ से गुंजायमान हुआ भारत मंडपम*

*आचार्य बालकृष्ण जी, आचार्य लोकेश मुनि जी, श्री मनोज बाजपेयी जी, भजन सम्राट कन्हैया मित्तल जी तथा देश की अनेक विशिष्ट विभूतियों एवं पूज्य संतों की गरिमामयी उपस्थिति*

नई दिल्ली। प्रदर्शनी हॉल, भारत मंडपम, प्रगति मैदान, नई दिल्ली में आयोजित ज्ञान, दान और ध्यान महोत्सव एक ऐतिहासिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महापर्व के रूप में आयोजित किया गया। इस पावन असवसर पर परमार्थ पीठाधीश्वर पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज का दिव्य सान्निध्य प्राप्त हुआ।

आचार्य धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री जी के पावन जन्मोत्सव के शुभ अवसर पर हजारों श्रद्धालुओं ने सनातन संस्कृति के अप्रतिम वैभव का साक्षात्कार किया। यह आयोजन भारतीय अध्यात्म, सेवा, संस्कार और सनातन जीवन-दृष्टि का ऐसा विराट उत्सव था जिसने प्रत्येक उपस्थित श्रद्धालु के हृदय में धर्म, राष्ट्र और मानवता के प्रति नई ऊर्जा, नया विश्वास और नई प्रेरणा का संचार किया।

इस ऐतिहासिक अवसर पर आचार्य धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री जी ने एक ऐसी घोषणा की जिसने पूरे सभागार को भाव-विभोर कर दिया। उन्होंने कहा कि जिन हजारों निर्धन एवं जरूरतमंद बेटियों का विवाह उन्होंने सम्पन्न कराया था, अब उनकी बेटियों की सम्पूर्ण शिक्षा का दायित्व भी उनके द्वारा वहन किया जाएगा। यह घोषणा भारतीय संस्कृति के शाश्वत आदर्श की पुनर्प्रतिष्ठा है जहाँ बेटी को केवल सम्मान ही नहीं, बल्कि शिक्षा, संस्कार और स्वावलम्बन का अधिकार भी दिया गया है।

पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने आचार्य धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री जी के पावन जन्मदिवस पर शुभकामनाएँ देते हुए कहा, ईश्वर आपको उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु, अखण्ड ऊर्जा एवं निरंतर लोकमंगल की शक्ति प्रदान करें। आप अपनी तपस्या, भक्ति और ओजस्वी वाणी से सनातन धर्म की दिव्य पताका को विश्व के कोने-कोने में फहराते रहे। आपकी प्रेरणा से अनेकों हृदयों में धर्म, संस्कृति, राष्ट्रप्रेम और भगवान श्रीराम तथा श्रीहनुमान जी के प्रति अटूट श्रद्धा जागृत हो रही है। आपका जीवन सदैव धर्म, सेवा और मानवता के कल्याण के लिए समर्पित रहे। आप दिव्यायु हों, दीर्घायु हों, सदैव स्वस्थ रहें, मस्त रहें।

पूज्य स्वामी जी ने कहा कि ज्ञान हमें दिशा देता है, ध्यान हमें दिव्यता से जोड़ता है और दान जीवन को सार्थक बनाता है। जब ये तीनों एक साथ जीवन में उतरते हैं, तब केवल व्यक्ति ही नहीं, सम्पूर्ण समाज और राष्ट्र जागृत होता है। उन्होंने कहा कि आज का भारत केवल आर्थिक महाशक्ति बनने की ओर अग्रसर नहीं है, बल्कि वह अपनी आध्यात्मिक चेतना के आलोक से सम्पूर्ण विश्व को मार्गदर्शन देने की क्षमता भी रखता है और इसका श्रेय हमारी ऋषि परम्परा और संत परम्परा को जाता है।

कार्यक्रम के दौरान आचार्य धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री जी द्वारा रचित कृति ‘मेरा सन्यासी’ का भव्य विमोचन भी सम्पन्न हुआ। यह कृति गुरु-शिष्य परम्परा, वैराग्य, समर्पण, आध्यात्मिक साधना और सनातन जीवन-दर्शन के गहन अनुभवों का सजीव दस्तावेज है। पुस्तक का लोकार्पण उपस्थित पूज्य संतों एवं विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति में सम्पन्न हुआ।

तत्पश्चात हजारों श्रद्धालुओं ने एक स्वर में हनुमान चालीसा तथा सुन्दरकाण्ड का महापाठ किया। सम्पूर्ण भारत मंडपम श्रीराम और हनुमान जी के जयघोषों से गुंजायमान हो उठा।

आचार्य धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि सनातन केवल एक परम्परा नहीं, बल्कि जीवन जीने की शाश्वत कला है। जब तक हमारी संस्कृति, हमारे संस्कार, हमारी मातृशक्ति और हमारी युवा पीढ़ी अपने मूल्यों से जुड़ी रहेगी, तब तक भारत का भविष्य सदैव उज्ज्वल रहेगा। उन्होंने समाज से आह्वान किया कि धर्म को सेवा, करुणा, शिक्षा और राष्ट्र निर्माण के माध्यम से अपने जीवन का व्यवहारिक स्वरूप बनाएं।

पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि भारत का सनातन दर्शन ही वह प्रकाश है जो सम्पूर्ण मानवता को शांति, करुणा, सह-अस्तित्व और वैश्विक परिवार की भावना का मार्ग दिखा सकता है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे आधुनिकता को अपनाते हुए भी अपनी आध्यात्मिक जड़ों से जुड़े रहें, क्योंकि यही भारत की सबसे बड़ी शक्ति है।

ज्ञान, दान और ध्यान महोत्सव में पूज्य संतों की वाणी, सेवा का संकल्प और समाज का सहयोग के एक साथ दर्शन हुये। यह आयोजन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का ऐसा अध्याय बनेगा, जहाँ भक्ति के साथ सेवा, संस्कार के साथ शिक्षा और अध्यात्म के साथ राष्ट्र निर्माण का विराट संदेश सम्पूर्ण समाज तक पहुँचेगा।

सनातन धर्म की पताका को विश्वभर में नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने, करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को सुदृढ़ करने तथा भारतीय संस्कृति के गौरव को जन-जन तक पहुँचाने में आचार्य धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री जी का योगदान निरंतर प्रेरणास्पद है और सेवा, साधना और संस्कार की अखण्ड ज्योति को प्रज्ज्वलित कर रहा है, जो सम्पूर्ण मानवता को प्रेम, शांति, करुणा और आत्मोन्नति की दिशा में अग्रसर होने का संदेश देती है।

इस भव्य आयोजन में देशभर से पधारे संत-महात्मा, विद्वान, सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षाविद, विभिन्न क्षेत्रों की अनेक विशिष्ट विभूतियाँ तथा हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने इसे भारत की आध्यात्मिक विरासत, सांस्कृतिक अस्मिता और सामाजिक उत्तरदायित्व का जीवंत उत्सव बताया।


By Shashi Sharma

Shashi Sharma Working in journalism since 1985 as the first woman journalist of Uttarakhand. From 1989 for 36 years, she provided her strong services for India's top news agency PTI. Working for a long period of thirty-six years for PTI, he got her pen ironed on many important occasions, in which, by staying in Tehri for two months, positive reporting on Tehri Dam, which was in crisis of controversies, paved the way for construction with the power of her pen. Delivered.

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