*💥परमार्थ पीठाधीश्वर पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी को पूज्य संतों ने ’’आदि सनातन धर्म रत्न’’ सम्मान से किया विभूषित*

*✨पूज्य स्वामीजी को विगत 50 से अधिक वर्षों से भारतीय संस्कृति, संस्कार, योग, पर्यावरण संरक्षण तथा नदियों एवं जलस्रोतों के संरक्षण के लिए वैश्विक स्तर पर निरंतर कार्य करने, अनेक नदियों के तटों पर वृक्षारोपण एवं गंगा आरती सहित विभिन्न नदी आरतियों की परंपरा का शुभारम्भ कर जनजागरण का व्यापक अभियान चलाने हेतु इस प्रतिष्ठित सम्मान ’’आदि सनातन धर्म रत्न’’ सम्मान से किया सम्मानित*

*🌺विश्व युवा कौशल दिवस पर परमार्थ निकेतन का संदेश – कौशल के साथ संस्कार ही युवा शक्ति की वास्तविक पहचान*

*🌼युवाओं के हाथों में कौशल, हृदय में करुणा और जीवन में संस्कार हों, तभी विकसित भारत का सपना होगा साकार*

*💐परमार्थ निकेतन पधारें पूज्य संत ब्रह्मऋषि श्री कुमार स्वामी जी, महंत श्री भूपेंद्र गिरि जी, निरंजनी अखाड़ा, श्री निरंजन स्वामी जी, नेपाल की धरती से आये स्वामी आनंद अरूण जी, एवं अन्य संतों ने भी युवाओं के लिये दिये प्रेरक संदेश*

*✨पूज्य संतों ने दिया संदेश-गंगा जी सबकी हैं, सबको जीवन प्रदान करती हैं। उन्हें स्वच्छ, निर्मल और अविरल बनाए रखना ही हमारा सबसे बड़ा कौशल, कर्तव्य और संस्कार*

*🌺युवा केवल भविष्य नहीं, वर्तमान की सबसे बड़ी शक्ति हैं*

*स्वामी चिदानन्द सरस्वती*

ऋषिकेश, 15 जुलाई। विश्व युवा कौशल दिवस के अवसर पर परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष, परमार्थ पीठाधीश्वर, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि आज का युग केवल डिग्रियों का नहीं, बल्कि कौशल, संस्कार, संवेदनशीलता और सतत् सीखने की क्षमता का युग है। यदि युवाओं को सही दिशा, श्रेष्ठ संस्कार, मूल्य और आधुनिक कौशल का समन्वय प्राप्त हो जाए तो वे न केवल अपने जीवन को सफल बना सकते हैं, बल्कि समाज, राष्ट्र और विश्व के उज्ज्वल भविष्य का भी निर्माण कर सकते हैं।

परमार्थ निकेतन में पूज्य संत ब्रह्मऋषि श्री कुमार स्वामी जी, महंत श्री भूपेंद्र गिरि जी, निरंजनी अखाड़ा के श्री निरंजन स्वामी जी, नेपाल से पधारे स्वामी आनंद अरुण जी एवं अन्य संतों ने युवाओं को प्रेरित किया। संतों ने कहा, ष्गंगा जी सबकी हैं, सबको जीवन प्रदान करती हैं। उन्हें स्वच्छ, निर्मल और अविरल बनाए रखना ही हमारा सबसे बड़ा कौशल, कर्तव्य और संस्कार है।

पूज्य स्वामीजी को विगत 50 से अधिक वर्षों से भारतीय संस्कृति, संस्कार, योग, पर्यावरण संरक्षण तथा नदियों एवं जलस्रोतों के संरक्षण के लिए वैश्विक स्तर पर निरंतर कार्य करने, अनेक नदियों के तटों पर वृक्षारोपण एवं गंगा आरती सहित विभिन्न नदी आरतियों की परंपरा का शुभारम्भ कर जनजागरण का व्यापक अभियान चलाने हेतु इस प्रतिष्ठित सम्मान ’’आदि सनातन धर्म रत्न’’ सम्मान से सम्मानित किया।

पूज्य संतों ने कहा कि आदि सनातन धर्म के विश्व व्यापी प्रचार प्रसार तथा सामाजिक और जनकल्याणकारी अद्भुत कार्यो के लिये आदि सनातन धर्म रत्न से पूज्य स्वामी जी को विभूषित करते हुये वल्र्ड ह्मूमैनिटी पार्लियामेंट और आदि सनातन धर्म के देश-विदेश के करोड़ों अनुयायियों को अत्यंत हर्ष की अनुभूति हो रही है।

पूज्य स्वामी जी ने कहा कि भारत विश्व का सबसे युवा राष्ट्र है। यह हमारी सबसे बड़ी शक्ति है, परन्तु यह शक्ति तभी सार्थक होगी जब हमारे युवाओं के हाथों में कौशल, हृदय में करुणा, जीवन में अनुशासन और विचारों में सकारात्मकता होगी। केवल रोजगार प्राप्त करना ही कौशल का उद्देश्य नहीं है, कौशल ऐसा होना चाहिए जो व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाए, समाज के प्रति उत्तरदायी बनाए और मानवता की सेवा के लिये प्रेरित करे।

पूज्य स्वामी जी ने बताया कि परमार्थ निकेतन द्वारा संचालित गुरूकुलों में संस्कृत के विशद् ज्ञान के साथ आधुनिक शिक्षा, कम्प्यूटर का प्रशिक्षण, अंगे्रजी, म्यूजिक, फोटोग्राफी, आदि अनेक आधुनिक कौशल भी प्रदान किया जाता हैं ताकि ऋषिकुमारों का समग्र विकास हो सके।

पूज्य स्वामी जी ने कहा कि तीव्र गति से बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था के इस दौर में युवाओं के लिये निरन्तर सीखते रहना अत्यंत आवश्यक है। जीवन में वही आगे बढ़ता है जो परिवर्तन को स्वीकार करता है, नई तकनीकों को अपनाता है और अपने ज्ञान को निरन्तर विकसित करता है। उन्होंने कहा कि तकनीक का उपयोग मानवता की सेवा, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक उत्थान के लिये होना चाहिए, तभी वास्तविक उद्देश्य पूर्ण हो सके।

उन्होंने कहा कि परमार्थ निकेतन में शिक्षा का अर्थ केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि व्यक्तित्व का निर्माण करना है। यहाँ युवाओं को योग, ध्यान, भारतीय संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, सेवा, नेतृत्व, नैतिक मूल्यों और वैश्विक उत्तरदायित्व का प्रशिक्षण भी दिया जाता है।

उन्होंने कहा कि आज विश्व को ऐसे युवाओं की आवश्यकता है जो केवल सफल प्रोफेशनल ही नहीं, बल्कि संवेदनशील नागरिक भी हों। कौशल और संस्कारों का संगम ही वास्तविक सफलता का आधार है। यदि कौशल के साथ करुणा न हो तो विकास अधूरा है, और यदि संस्कार के साथ दक्षता न हो तो क्षमता सीमित रह जाती है। इसलिए युवाओं को तकनीकी दक्षता के साथ मानवीय मूल्यों को भी अपनाना होगा।

पूज्य स्वामी जी ने कहा कि आज पृथ्वी को ऐसे युवाओं की आवश्यकता है जो केवल करियर ही नहीं, बल्कि प्रकृति के भविष्य के प्रति भी उत्तरदायी हों। पौधे लगाना, जल बचाना, प्लास्टिक का कम उपयोग करना, नदियों को स्वच्छ रखना, यूज एंड थ्रो कल्चर से यूज एंड ग्रो कल्चर की ओर बढ़ना और टिकाऊ जीवनशैली अपनाना भी आज के समय का महत्वपूर्ण जीवन कौशल है। प्रकृति के साथ संतुलन ही मानव सभ्यता की स्थायी प्रगति का आधार है।

उन्होंने कहा कि फूड इज मेडिसिन अर्थात् हमारा भोजन ही हमारी पहली औषधि है। स्वस्थ शरीर, शांत मन और जागरूक जीवनशैली ही किसी भी युवा की सबसे बड़ी पूँजी है। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि वे योग, संतुलित आहार, नियमित दिनचर्या और सकारात्मक सोच को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाएँ।

विश्व युवा कौशल दिवस के अवसर पर परमार्थ निकेतन ने सभी युवाओं का आह्वान किया कि वे अपने कौशल को केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित न रखें, बल्कि उसे समाज, राष्ट्र और विश्व कल्याण का माध्यम बनायें। जब कौशल सेवा से जुड़ता है, ज्ञान करुणा से जुड़ता है और सफलता संस्कारों से जुड़ती है, तभी एक समृद्ध, शांतिपूर्ण और सतत् भविष्य का निर्माण सम्भव है।

पूज्य स्वामी जी ने कहा, युवा केवल कल के नेता नहीं, आज के परिवर्तनकर्ता हैं। अपने भीतर की शक्ति को पहचानिए, अपने कौशल को निखारिए, अपने संस्कारों को सशक्त बनाइए और अपने जीवन को मानवता, प्रकृति तथा राष्ट्र की सेवा के लिये समर्पित कीजिये। यही सच्चा कौशल है, यही सच्ची सफलता है और यही विकसित भारत तथा विकसित विश्व का मार्ग है।


By Shashi Sharma

Shashi Sharma – Senior Woman Journalist

Shashi Sharma has been active in journalism since 1985, holding the distinction of being Uttarakhand's first female journalist.

For 36 years, starting in 1989, she rendered distinguished service to India's premier news agency, PTI. During this long tenure, she demonstrated the power of her writing on numerous significant occasions; notably, she spent two months in Tehri reporting positively on the Tehri Dam—which was then mired in controversy—and used her pen to help pave the way for its construction.

Currently, Mrs. Shashi Sharma runs the news portal *Newsok24.com* and serves as the editor of the weekly newspaper *Desh Nirdesh*; she is also a registered anchor and commentator for Delhi Doordarshan.

शशि शर्मा वरिष्ठ महिला पत्रकार शशि शर्मा उत्तराखंड की पहली महिला पत्रकार के तौर पर 1985 से पत्रकारिता में कार्यरत हैं। 1989 से 36 वर्षों तक उन्होंने भारत की शीर्ष समाचार एजेंसी पीटीआई के लिए अपनी सशक्त सेवाएं दीं। छत्तीस वर्षों की लंबी अवधि तक पीटीआई के लिए काम करते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण मौकों पर अपनी कलम का लोहा मनवाया, जिसमें दो महीने तक टिहरी में रहकर विवादों के संकट में रहे टिहरी बांध पर सकारात्मक रिपोर्टिंग कर अपनी कलम की ताकत से निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया। वर्तमान में श्रीमती शशि शर्मा Newsok24 com न्यूज पोर्टल को चला रहीं हैं और साप्ताहिक समाचार पत्र देश निर्देश की सम्पादक होने के साथ ही दिल्ली दूरदर्शन की रजिस्टर्ड एंकर और कमेंटेटर भी हैं।

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