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AISA, मुख्यमंत्री से आईसना ने की प्रदेश में पत्रकारों को दी जाने वाली पेंशन योजना में सुधार और परिवर्तन की मांग।

AISA, demanded from the Chief Minister to improve and change the pension scheme given to journalists in the state.

प्रदेश सूचना निदेशक बंसीधर तिवारी को सौंपा आईसना प्रदेश कार्यकारी अध्यक्षा ने मांग पत्र, साप्ताहिक के संपादक पूंजी पति नहीं।

पेंशन राशि भी न्यूनतम दस हजार रुपए मासिक करने की मांग, अन्य संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी जताई सहमति।

आल इंडिया स्माल न्यूज पेपर्स ऐसोसिएशन उत्तराखंड की ओर से प्रदेश कार्यकारी अध्यक्षा श्रीमती शशि शर्मा ने प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से पत्रकार सम्मान पेंशन योजना में सुधार और परिवर्तन के लिये आवेदन सूचना निदेशक बंसीधर तिवारी के सुपूर्द किया। मंगलवार को देहरादून सूचना निदेशालय में हुई बैठक में मुख्यमंत्री पत्रकार सम्मान पेंशन योजना समिति की सदस्य वरिष्ठ पत्रकार श्रीमती शशि शर्मा ने मांग की कि पत्रकार पेंशन योजना 2021-22 के संशोधन के बाद साप्ताहिक समाचार पत्रों के संपादकों को, समाचार पत्रों का स्वामी, मुद्रक, प्रकाशक पूंजी पति श्रेणी में रख पेंशन लाभ से वंचित कर दिया गया था जो न्याय संगत नहीं है, उन्होंने मांग की कि साप्ताहिक समाचार पत्रों के संपादकों को जो 5 से 6 हजार प्रसार संख्या रखते को योजना में पुनः सम्मिलित किया जाये। उन्होंने कहा छोटे साप्ताहिक समाचार पत्रों के मालिक सम्पादक मुद्रक प्रकाशक, पूंजी पति श्रेणी में नहीं आते हैं,वे अपने समाचार पत्र के सम्पादक से लेकर हाॅकर, चपरासी तक की भूमिका स्वयं निभाते हैं। वास्तविक स्थिति यह है कि साप्ताहिक समाचार पत्रों के संपादक वस्तुतः “पूंजीपति” नहीं होते। सीमित संसाधनों के कारण वे स्वयं ही संपादक, स्वामी, मुद्रक, प्रकाशक के साथ-साथ कार्यालय का सारा कार्य भी करते हैं। उनके पास अलग से स्टाफ रखने की आर्थिक क्षमता नहीं होती। 2. साप्ताहिक समाचार पत्रों की ऐतिहासिक भूमिका:- उत्तराखंड राज्य के गठन के समय दैनिक समाचार पत्रों की संख्या अत्यंत सीमित थी। राज्य निर्माण में जनजागरण और लोकमत तैयार करने में साप्ताहिक पत्रों की भूमिका सर्वाधिक महत्वपूर्ण रही है। दुर्भाग्यवश, राज्य गठन के बाद सबसे अधिक उपेक्षा इन्हीं छोटे साप्ताहिक पत्रों के साथ हुई है। केवल विज्ञापन प्राप्त करना आय की श्रेणी में शामिल नहीं माना जा सकता, आय के सापेक्ष व्यय की गणना के बिना आदेश अधूरा है, छोटे साप्ताहिक पत्रों के संपादकों का जीवन अभाव और संघर्ष से भरा होता है। अतः एसोसिएशन आपसे विनम्र आग्रह करती है कि माननीय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जी सरकार द्वारा दी जाने वाली अल्प पेंशन भी वयोवृद्ध पत्रकारों के लिए उनके बुढ़ापे का बड़ा सहारा बन सकती है, इसके साथ ही पेंशन राशि को भी बिहार, पंजाब और आंध्रप्रदेश के पैट्रन पर लाने की कृपा करें, अथवा पेंशन की न्यूनतम राशि 10 हजार अवश्य कर दी जाये। आपसे अपेक्षा है कि आप छोटे पत्रकारों की इस पीड़ा को सहानुभूतिपूर्वक समझते हुए पत्रकार पेंशन योजना की नियमावली में शीघ्र आवश्यक संशोधन कर अनुग्रहित करें,इस मामले में बैठक में उपस्थित अन्य पत्रकार संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी अपनी सहमति व्यक्त की । मुख्यमंत्री पत्रकार सम्मान पेंशन योजना में सुधार की मांग को माननीय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तक पंहुचने की सहमति देते हुए सूचना निदेशक बंसीधर तिवारी ने कहा इस मामले में सहानुभूति पूर्वक विचार करते हुए परिवर्तन अतिशीघ्र करने का प्रयास किया जायेगा। मामले पर सहानुभूति पूर्वक सुनवाई के लिए आल इंडिया स्माल न्यूज पेपर्स ऐसोसिएशन उत्तराखंड की प्रदेश कार्यकारी अध्यक्षा श्रीमती शशि शर्मा ने सूचना निदेशक बंसीधर तिवारी,अपर निदेशक आशीष कुमार त्रिपाठी, संयुक्त निदेशक के.एस.चौहान का आभार व्यक्त किया।

By Shashi Sharma

Shashi Sharma Working in journalism since 1985 as the first woman journalist of Uttarakhand. From 1989 for 36 years, she provided her strong services for India's top news agency PTI. Working for a long period of thirty-six years for PTI, he got her pen ironed on many important occasions, in which, by staying in Tehri for two months, positive reporting on Tehri Dam, which was in crisis of controversies, paved the way for construction with the power of her pen. Delivered.

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