भारत के मस्तक पर साहित्य, संस्कृति और स्वाभिमान का स्वर्णिम मुकुट सजाने वाले गुरुदेव रबीन्द्रनाथ टैगोर जी की पुण्यतिथि पर परमार्थ निकेतन में भावपूर्ण श्रद्धांजलि*

गुरुदेव रबीन्द्रनाथ टैगोर जी की लेखनी में भारत की संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना, प्रकृति प्रेम, मानवता और विश्व बंधुत्व की दिव्य अभिव्यक्ति*

स्वामी चिदानन्द सरस्वती*

ऋषिकेश, 7 अगस्त। भारत के मस्तक पर साहित्य, संस्कृति और स्वाभिमान का स्वर्णिम मुकुट सजाने वाले, राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के अमर रचयिता, विश्वविख्यात साहित्यकार और नोबेल पुरस्कार से सम्मानित गुरुदेव रबीन्द्रनाथ ठाकुर जी की पुण्यतिथि पर परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष, परमार्थ पीठाधीश्वर, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।

पूज्य स्वामी जी ने कहा कि गुरुदेव रबीन्द्रनाथ ठाकुर जी एक महान कवि, साहित्यकार और दार्शनिक के साथ वे भारत की आत्मा के स्वर थे। उनकी लेखनी में भारत की संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना, प्रकृति प्रेम, मानवता और विश्व बंधुत्व की दिव्य अभिव्यक्ति होती थी। उन्होंने अपने साहित्य साधना के माध्यम से भारत को विश्व पटल पर एक नई पहचान प्रदान की।

पूज्य स्वामी जी ने कहा कि गुरुदेव जी की रचनाओं में शब्दों के साथ संवेदनाओं की गंगा प्रवाहित होती है, जो हमें भीतर से जागृत करती है जो प्रेम, करुणा तथा सेवा के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।

पूज्य स्वामी जी ने कहा कि गुरुदेव रबीन्द्रनाथ ठाकुर ने साहित्य को समाज के जागरण, आत्मबोध और राष्ट्र चेतना का सशक्त माध्यम बनाया। उनकी अमर कृतियाँ गीतांजलि और अन्य कविताएँ एवं रचनाएँ भारतीय साहित्य की गौरवशाली विरासत हैं, जो आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरणा देती रहेंगी।

उन्होंने कहा कि गुरुदेव ने शिक्षा के क्षेत्र में भी अद्वितीय योगदान दिया। शांतिनिकेतन की स्थापना के माध्यम से उन्होंने ऐसी शिक्षा व्यवस्था का स्वप्न देखा जिसमें प्रकृति, संस्कृति, कला और आध्यात्मिकता का सुंदर समन्वय हो। उनका मानना था कि शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि वह जीवन को श्रेष्ठ बनाने वाली साधना होनी चाहिए।

पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि आज जब विश्व अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब गुरुदेव का मानवतावादी दर्शन और भी अधिक प्रासंगिक हो गया है। उनका संदेश हमें याद दिलाता है कि विकास के साथ संवेदना, प्रगति के साथ प्रकृति संरक्षण और ज्ञान के साथ विनम्रता आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि गुरुदेव का जीवन हमें सिखाता है कि एक व्यक्ति अपनी प्रतिभा, विचारों और कर्मों से पूरे विश्व को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने भारत की सांस्कृतिक चेतना को विश्व मंच पर प्रतिष्ठित किया और यह सिद्ध किया कि भारतीय संस्कृति में सम्पूर्ण मानवता के कल्याण का भाव निहित है।

पूज्य स्वामी जी ने कहा कि गुरूदेव की अमर रचनाएँ युगों-युगों तक मानवता का मार्गदर्शन करती रहेंगी। उनकी लेखनी की सुगंध, विचारों की गहराई और जीवन दर्शन की दिव्यता सदैव भारत और विश्व को प्रेरित करती रहेगी।

पूज्य स्वामी जी ने युवाओं का आह्वान करते हुये कहा कि गुरुदेव के विचारों को अपने जीवन में आत्मसात करें, साहित्य और संस्कृति का सम्मान करें तथा प्रेम, करुणा, सेवा और समरसता के मूल्यों को आगे बढ़ाकर एक श्रेष्ठ समाज के निर्माण में योगदान दें।

आज की परमार्थ गंगा आरती गुरुदेव रबीन्द्रनाथ ठाकुर जी की साहित्य साधना को समर्पित की। उनकी अमर वाणी और दिव्य विचार सदैव मानवता का पथ आलोकित करते रहें।


By Shashi Sharma

Shashi Sharma Working in journalism since 1985 as the first woman journalist of Uttarakhand. From 1989 for 36 years, she provided her strong services for India's top news agency PTI. Working for a long period of thirty-six years for PTI, he got her pen ironed on many important occasions, in which, by staying in Tehri for two months, positive reporting on Tehri Dam, which was in crisis of controversies, paved the way for construction with the power of her pen. Delivered.

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