विविधता हमारी सुंदरता है, एकता हमारा सत्य” न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन से ‘वन वर्ल्ड, वन ह्यूमैनिटी’ का वैश्विक संदेश*

‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन’ में डॉ. मोहन भागवत जी ने दिया मानवता की एकता, सद्भाव और समरसता का संदेश*

*🌺परमार्थ पीठाधीश्वर, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी, डा साध्वी भगवती सरस्वती जी, पूज्य स्वामी परमात्मानन्द और दिव्य विभूतियों का पावन सान्निध्य*

💥*विभिन्न आस्थाओं, संस्कृतियों और समुदायों के प्रतिनिधियों ने ‘वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना को साकार करने का लिया संकल्प*

न्यूयॉर्क। न्यूयॉर्क के ऐतिहासिक मैडिसन स्क्वायर गार्डन में आयोजित ‘वन वर्ल्ड, वन ह्यूमैनिटी’ एवं ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन’ ने मानवता की एकता, विविधता के सम्मान, धार्मिक सद्भाव, संवाद और वैश्विक शांति का शक्तिशाली संदेश दिया। भारतीय मूल के अमेरिकियों सहित विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधियों, आध्यात्मिक एवं धार्मिक नेताओं तथा सामाजिक क्षेत्र से जुड़े गणमान्यजनों की उपस्थिति में आयोजित इस विशेष समारोह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी, परमार्थ पीठाधीश्वर, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी, डा साध्वी भगवती सरस्वती ने संबोधित किया।

इस भव्य आयोजन का मूल उद्देश्य भारतीय सनातन दर्शन के कालजयी उद्घोष “वसुधैव कुटुम्बकम्’ सम्पूर्ण विश्व एक परिवार है” पर केंद्रित रहा। कार्यक्रम ने विभिन्न आस्थाओं, संस्कृतियों और परंपराओं के बीच संवाद, परस्पर सम्मान तथा मानवता की साझा चेतना को मजबूत करने का संदेश दिया।

परमार्थ पीठाधीश्वर, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने सरसंघचालक राष्ट्रऋषि श्री मोहन भागवत जी, धर्मगुरुओं, बहनों और भाइयों को सम्बोधित करते हुए कहा कि आज हम अनेक आस्थाओं और परंपराओं से जुड़े हैं, लेकिन हमारी आत्मा एक है और हम सभी एक वैश्विक परिवार के अंग हैं। यही सनातन धर्म और भारत की महान सभ्यता की मूल भावना है।

पूज्य स्वामी जी ने कहा कि सनातन धर्म केवल किसी एक समुदाय के कल्याण की नहीं, बल्कि सम्पूर्ण सृष्टि के मंगल की कामना करता है “सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः।” हमारे वेदों का संदेश है “आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः” अर्थात सभी दिशाओं से श्रेष्ठ और कल्याणकारी विचार हमारे पास आएँ। यही जीवन-दृष्टि सबको अपनाने, सबका सम्मान करने और सबको साथ लेकर चलने की प्रेरणा देती है।

उन्होंने कहा कि हमें प्रेम को कर्म, आध्यात्मिकता को आचरण, शांति को व्यवहार और सेवा को साधना बनाना होगा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवकों की दशकों से चली आ रही सेवा-परंपरा इसी समर्पण का उदाहरण है “मेरे लिए क्या है?” से आगे बढ़कर “मेरे माध्यम से क्या हो सकता है?” का भाव ही भारतीय दर्शन है।

पूज्य स्वामी जी ने कहा कि आज विश्व को इसी चेतना की आवश्यकता है। हमारी विविधताएँ विभाजन नहीं, शक्ति बनें और हमारी आस्थाएँ संघर्ष नहीं, संवाद एवं सद्भाव का माध्यम बनें। आइए, हम केवल साथ उपस्थित होने का नहीं, बल्कि साथ चलने का संकल्प लें। यही सनातन का संदेश है, यही भारत की आत्मा है और यही “वसुधैव कुटुम्बकम्” की वैश्विक भावना है।

अपने संबोधन में डॉ. मोहन भागवत जी ने भारतीय जीवन-दृष्टि की समावेशी चेतना को रेखांकित करते हुए कहा कि हिंदू होने का अर्थ ही यह स्वीकार करना है कि अलग-अलग मार्ग एक ही लक्ष्य की ओर ले जाते हैं और प्रत्येक मनुष्य की अपनी गरिमा है।

उन्होंने मानवता की मूल एकता पर बल देते हुए कहा कि मनुष्य के बीच किसी प्रकार का भेद नहीं है। हमारी पूजा-पद्धतियाँ, परंपराएँ और जीवन जीने के तरीके अलग हो सकते हैं, लेकिन प्रत्येक व्यक्ति में समान मानवीय गरिमा और चेतना विद्यमान है।

डॉ. भागवत जी ने कहा कि दुनिया में अनेक धर्म, पंथ, पूजा-पद्धतियाँ और जीवन-शैलियाँ हैं, लेकिन मानवता की मूल चेतना एक है। विविधता प्रकृति का स्वभाव है और एकता उसके पीछे निहित सत्य है।

भारत की सनातन परंपरा ने सदैव विभिन्न मतों और आस्थाओं के सम्मान तथा सह-अस्तित्व की भावना को महत्व दिया है। यही कारण है कि भारतीय संस्कृति में अनेक मार्गों को स्वीकार करते हुए सभी के कल्याण की कामना की गई है।

उन्होंने कहा कि अपनी पहचान और आस्था के प्रति श्रद्धा रखते हुए दूसरे की पहचान और आस्था का सम्मान करना ही सच्ची मानवता है। विविधता को समाप्त करना एकता नहीं है; बल्कि विविधताओं को स्वीकार करते हुए उनमें निहित एकत्व को अनुभव करना ही वास्तविक एकता है।

डा साध्वी भगवती सरस्वती जी ने इस कार्यक्रम में हिन्दू धर्म का प्रतिनिधित्व करते हुये “असतो मा सद्गमय” के दिव्य मंत्र के साथ ओपनिंग प्रेयर की। उन्होंने प्रार्थना करते हुए कहा कि हे प्रभु! हमें उस अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलिए, उस असत्य से सत्य की ओर ले चलिए, जिसमें हम स्वयं पीड़ा सहते हैं और अपनी अज्ञानता के कारण दूसरों के लिए भी पीड़ा का कारण बनते हैं।

उन्होंने कहा कि यह अंधकार केवल असत्य का ही नहीं, बल्कि उस मिथ्या पहचान का भी है, जिसमें हम स्वयं को केवल अपने भौतिक शरीर, उसके आकार, रूप, रंग, जाति, धर्म और बाहरी पहचान तक सीमित मान लेते हैं। इसी गलत पहचान में हम स्वयं भी दुःख भोगते हैं और दूसरों के लिए भी दुःख का कारण बनते हैं।

पूज्य साध्वी जी ने कहा कि “असतो मा सद्गमय” की प्रार्थना हमें इस मिथ्या पहचान के अंधकार से सत्य के प्रकाश की ओर ले जाती है, उस सत्य की ओर, जहाँ हम स्मरण करते हैं कि हम केवल यह शरीर नहीं हैं; हम दिव्य आत्माएँ हैं, जो शाश्वत, अनंत और परमात्मा से जुड़ी हुई।

उन्होंने कहा कि जब हम इस सत्य को पहचानते हैं, तब हमारे भीतर का भेद मिटने लगता है। हम अलग-अलग शरीर हो सकते हैं, हमारी पहचान और आस्थाएँ अलग हो सकती हैं, लेकिन हमारी आत्मा एक है, हम परमात्मा के साथ एक हैं, हम एक-दूसरे से जुड़े हैं और हम सम्पूर्ण सृष्टि के साथ एकाकार हैं। यही अंधकार से प्रकाश की, असत्य से सत्य की और विभाजन से एकत्व की यात्रा है।

कार्यक्रम में भारतीय मूल के अमेरिकियों सहित विभिन्न समुदायों के लोगों की सहभागिता रही। विभिन्न आस्थाओं और परंपराओं से जुड़े प्रतिनिधियों ने एक मंच पर एकत्र होकर एकता, सद्भाव, संवाद और मानवता की साझा भावना को अभिव्यक्त किया।

कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि विश्व में स्थायी शांति केवल मतभेदों को समाप्त करने से नहीं, बल्कि एक-दूसरे को समझने, संवाद करने, सम्मान देने और साथ मिलकर मानवता की सेवा करने से स्थापित होगी।

न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में आयोजित ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन’ कार्यक्रम में 5,000 से ज्यादा भारतीय मूल के अमेरिकी शामिल हुए। इसका आयोजन अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग ने किया। कार्यक्रम में 30 देशों के 180 धार्मिक नेताओं का सहभाग रहा।


By Shashi Sharma

Shashi Sharma – Senior Woman Journalist

Shashi Sharma has been active in journalism since 1985, holding the distinction of being Uttarakhand's first female journalist.

For 36 years, starting in 1989, she rendered distinguished service to India's premier news agency, PTI. During this long tenure, she demonstrated the power of her writing on numerous significant occasions; notably, she spent two months in Tehri reporting positively on the Tehri Dam—which was then mired in controversy—and used her pen to help pave the way for its construction.

Currently, Mrs. Shashi Sharma runs the news portal *Newsok24.com* and serves as the editor of the weekly newspaper *Desh Nirdesh*; she is also a registered anchor and commentator for Delhi Doordarshan.

शशि शर्मा वरिष्ठ महिला पत्रकार शशि शर्मा उत्तराखंड की पहली महिला पत्रकार के तौर पर 1985 से पत्रकारिता में कार्यरत हैं। 1989 से 36 वर्षों तक उन्होंने भारत की शीर्ष समाचार एजेंसी पीटीआई के लिए अपनी सशक्त सेवाएं दीं। छत्तीस वर्षों की लंबी अवधि तक पीटीआई के लिए काम करते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण मौकों पर अपनी कलम का लोहा मनवाया, जिसमें दो महीने तक टिहरी में रहकर विवादों के संकट में रहे टिहरी बांध पर सकारात्मक रिपोर्टिंग कर अपनी कलम की ताकत से निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया। वर्तमान में श्रीमती शशि शर्मा Newsok24 com न्यूज पोर्टल को चला रहीं हैं और साप्ताहिक समाचार पत्र देश निर्देश की सम्पादक होने के साथ ही दिल्ली दूरदर्शन की रजिस्टर्ड एंकर और कमेंटेटर भी हैं।

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