इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में 7वां नदी उत्सव नदियों की रक्षा के संकल्प के साथ संपन्न,
नदियों को बहने दो, जल का सम्मान करो- डॉ राधिका नागरथ,
नई दिल्ली। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र नई दिल्ली द्वारा आयोजित नदी संरक्षण पहलों के अंतर्गत, 7वां नदी उत्सव नदियों की रक्षा के संकल्प के साथ सकारात्मक रूप से संपन्न हुआ। जिसमें विद्वानों, पर्यावरणविदों, नीति निर्माताओं, कलाकारों और नागरिकों ने यमुना की सांस्कृतिक विरासत, पारिस्थितिक चुनौतियों और सतत पुनरुद्धार पर विचार-विमर्श किया। नदी और जल के साथ मानवीय संबंध को परिभाषित करने के लिए “नदी और जल से संबंध: जल संधि और जल प्रलय के दौर में भारत का जल धर्म” शीर्षक से एक विशेष सत्र आयोजित किया गया। यह सत्र संहिता फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित किया गया था।
समापन सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए अंग्रेजी साहित्यकार,लेखिका, चिंतक, विचारक डॉ. राधिका नागरथ ने कहा कि यमुना और गंगा को सजीव इकाई घोषित करने के उत्तराखंड उच्च न्यायालय के फैसले का विरोध किया, जिसका अर्थ था कि नदियों को कानूनी अधिकार प्राप्त हैं। लेकिन मार्च 2017 में यह घोषणा होते ही, उन्होंने कहा, चार महीने के भीतर ही सर्वोच्च न्यायालय ने इस आदेश पर रोक लगा दी और कहा कि कानून नदी को मनुष्य के समान नहीं मानता, यदि कोई नदी को प्रदूषित करता है। इसका कारण यह था कि प्राकृतिक आपदाओं के कारण जो मलबा बहकर आता है, उस स्थिति में दंड का कोई प्रावधान नहीं था। नदी को सजीव इकाई घोषित करने का उद्देश्य केवल यही था कि नदियों के स्वच्छ और निर्बाध रूप से बहने के अधिकार को संरक्षित किया जा सके। उन्होंने आगे कहा कि लोगों की भागीदारी और जागरूकता के बिना नदियों को स्वच्छ रखना असंभव है। सीन, राइन और टेम्स जैसी विश्व प्रसिद्ध नदियों का उदाहरण देते हुए उन्होंने सरकार के संबंधित अधिकारियों से नदी तटों पर बेहतर सुविधाएं बनाने और नदी को शहर से अलग करने वाली दीवारें बनाने का आग्रह किया ताकि मानव अपशिष्ट नदियों तक न पहुंच सके। केवल दोषियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई से नदी को नहीं बचाया जा सकता।
अपने संबोधन का भावपूर्ण समापन करते हुए उन्होंने जनमानस से अपील की कि ‘नदियों को बहने दो, जल का सम्मान करो।’
वक्ताओं द्वारा उठाई गई सर्वसम्मत आवाज नदियों का सम्मान करने और नदियों पर निर्माण और पहाड़ों को नष्ट करने पर रोक लगाने की थी।
निर्वासित तिब्बती सरकार से संबद्ध शोधार्थी डॉ. तेनज़िन डोल्मा, यमुना के लिए नागरिक परिषद के संयोजक और संहिता फाउंडेशन के शासी निकाय सदस्य डॉ. ओंकार मित्तल, लेखक विद्या भूषण रावत और फरीदाबाद के जेसी बोस विश्वविद्यालय के प्रदीप डिमरी ने बढ़ते जल परियोजनाओं और नदियों पर मानव जनित खतरे पर चिंता व्यक्त की। संहिता फाउंडेशन के कार्यकारी निकाय सदस्य और यमुना के लिए नागरिक परिषद के सह-संयोजक कौशल किशोर ने नदियों के संरक्षण में कार्यकर्ताओं और पर्यावरणविदों की लंबे समय से चली आ रही भूमिका का वर्णन किया। उन्होंने वैज्ञानिक जी.डी. अग्रवाल को याद किया, जिन्होंने बाद में स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद और स्वामी निगमानंद के नाम से संन्यासी जीवन व्यतीत किया और गंगा नदी पर बन रही नई जल परियोजनाओं का विरोध किया। दोनों ने ही गंगा माता के संरक्षण की मांग उठाते हुए उपवास किया और अपने प्राणों की आहुति दी।
स्तंभकार और इंडिया तिब्बत फ्रेंडशिप सोसाइटी की सदस्य निमिषा सिंह और निर्वासित तिब्बतियों के नेता ताशी डेकी ने पारिस्थितिक असंतुलन के कारण हिमालय में ओक के पेड़ों की घटती संख्या और चीड़ के पेड़ों द्वारा हिमालयी जंगलों के पूरे हरे आवरण को घेर लेने की समस्या को उठाया।
विस्तृत चर्चा में, डॉ. तेनज़िन डोलमा ने सांख्यिकीय आंकड़ों के माध्यम से दिखाया कि विश्व के 45% बांध चीन द्वारा, 9% भारत द्वारा, 6% जापान द्वारा और 14% अमेरिका द्वारा निर्मित किए जा रहे हैं। चीन द्वारा किए जा रहे इस अत्यधिक निर्माण ने पहाड़ों और नदियों की संपूर्ण पारिस्थितिकी को बिगाड़ दिया है, जिससे हिमनदों का पिघलना और नदियों में बाढ़ आना जैसी समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। पहाड़ों से निकलने वाली प्रमुख नदियाँ – गंगा और यमुना – सबसे अधिक प्रभावित हैं। मानव आबादी की सुरक्षा के लिए इस अत्यधिक निर्माण पर रोक लगाना आवश्यक है।


By Shashi Sharma

Shashi Sharma – Senior Woman Journalist

Shashi Sharma has been active in journalism since 1985, holding the distinction of being Uttarakhand's first female journalist.

For 36 years, starting in 1989, she rendered distinguished service to India's premier news agency, PTI. During this long tenure, she demonstrated the power of her writing on numerous significant occasions; notably, she spent two months in Tehri reporting positively on the Tehri Dam—which was then mired in controversy—and used her pen to help pave the way for its construction.

Currently, Mrs. Shashi Sharma runs the news portal *Newsok24.com* and serves as the editor of the weekly newspaper *Desh Nirdesh*; she is also a registered anchor and commentator for Delhi Doordarshan.

शशि शर्मा वरिष्ठ महिला पत्रकार शशि शर्मा उत्तराखंड की पहली महिला पत्रकार के तौर पर 1985 से पत्रकारिता में कार्यरत हैं। 1989 से 36 वर्षों तक उन्होंने भारत की शीर्ष समाचार एजेंसी पीटीआई के लिए अपनी सशक्त सेवाएं दीं। छत्तीस वर्षों की लंबी अवधि तक पीटीआई के लिए काम करते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण मौकों पर अपनी कलम का लोहा मनवाया, जिसमें दो महीने तक टिहरी में रहकर विवादों के संकट में रहे टिहरी बांध पर सकारात्मक रिपोर्टिंग कर अपनी कलम की ताकत से निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया। वर्तमान में श्रीमती शशि शर्मा Newsok24 com न्यूज पोर्टल को चला रहीं हैं और साप्ताहिक समाचार पत्र देश निर्देश की सम्पादक होने के साथ ही दिल्ली दूरदर्शन की रजिस्टर्ड एंकर और कमेंटेटर भी हैं।

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