गंगा दशहरा के स्नान पर्व पर हरिद्वार पहुंची भारी भीड़, तड़के से जारी है मुक्ति की डुबकी।

 

गंगा दशहरा पर विशेष
शशि शर्मा
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गंगा दशहरा का पर्व मां गंगा के धरती पर अवतरण के पवित्र दिवस के रूप में मनाया जाता है।
जन्हुपुत्री , विष्णुपदी , नीलवर्णा , जटाजूटरी , महेश्वरी , भागीरथी,,
ऋग्वेद , ब्रह्मवैवर्त पुराण , स्कंद पुराण गंगा मईया की महिमा और उनके असंख्य नामों से भर हुएे हैं।
गंगा का एक नाम दश-हरा यानि दस तरह के पापों का हरण करने वाली देवी भी माना गया है।
कलिमलहारिणी पतित पावनी माँ गंगा कलयुग की अधिष्ठात्री देवी कहलाती है। कलयुग में गङ्गा तीर्थ ही महान और कल्याण कारी है गङ्गा की उत्पत्ति भगवान विष्णु के चरणों से हुई मानी जाती है,
एक कथा के अनुसार सृष्टि निर्माण के समय ब्रह्मा ने विष्णु के पद धोए और चरण प्रक्षालन से निकले उस चरणोदक को ब्रहम्मा जी ने अपने ब्रह्म कमंडल में भर लिया तभी से मां गंगा को विष्णुपदी , विष्णुनखी , ब्रह्म कमण्डलिनी आदि नाम दिये गये।
त्रेतायुग में भगवान राम के पुरखे इक्ष्वाकु वंश के राजा भगीरथ अपने पूर्वजों के शेषांशों को मोक्ष प्रदान करने के लिए धरती पर लाये,राजा सगर के सौ पुत्रों की ऋषि दुर्वासा के श्राप से हुई दुर्गति को सदगति में बदलने के लिए केवल मां गंगा ही सक्षम थीं ऋषि दुर्वासा के ही कुटीर पर बैठे गरुण से इस रहस्य को जानने के बाद राजा सगर के पुत्र, फिर पौत्र फिर पढ़पौत्र की तपस्या के बाद हिमालय पर्वत राज की पुत्री गंगा जिनके प्रचंड वेग का कारण उनका स्वर्ग से धरती पर भेजे जाने से उपजा क्रोध भी था,को धरती पर लाना सम्भव नहीं था अतः शिव की भक्ति और तपस्या से भगीरथ को उपाय के रुप में मदद की तरह भगवान शिव की जटाओं से अवतरित कराया गया।
गंगा जिस दिन भगवान शिव की जटाओं से होते हुए धरती पर अवतरित हुई उस दिन जेयष्ठ मास शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि थी, इसलिए प्रतिवर्ष जेष्ठ मास शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि मंगलवार को गंगा मईया का अवतरण दिवस मनाया जाता है। कहा गया है,

ज्येष्ठे मासि क्षितिसुतदिने शुक्लपक्षे दशम्यां हस्ते शैलादवतरदसौ जाह्नवी मर्त्यलोकम्।

शिव के जटाजूटों से होते हुए सगर पुत्रों के कल्याणनार्थ धरती पर आई गंगा जगत कल्याणी बन गई न केवल सगर पुत्रों की राख बहायी अपितु युगों-युगों से आज तक भवभंजना बन कर पाप ताप श्राप से मुक्ति प्रदान कर रहीं हैं।

“गंगे तव दर्शनात् मुक्ति” देखें वीडियो:-

गंगा की पवित्रता का बखान शास्त्र इस तरह से करते हैं कि हे गंगा स्नान छोड आपके तो केवल दर्शन से ही मुक्ति का मार्ग प्रशस्त हो जाता है।

कलयुग में गङ्गा तीर्थ ही महान और कल्याण कारी माना गया है गङ्गा की उत्पत्ति भगवान विष्णु के चरणों से हुई मानी जाती है, इसलिए मात्र गंगाजल के सेवन से समस्त रोग, पाप नष्ट हो जाते हैं ये भारतीय शास्त्रों में कहा गया है, कि गंगा की आध्यात्मिक ऊर्जा हमारे शरीर मे एक सकारात्मक प्रभाव छोड़ती है गंगाजल में जड़ी बुटियों के साथ साथ पर्याप्त मात्रा में खनिज होने के कारण गंगाजल कभी दूषित नही होता और वर्षो पुराना रखा गंगाजल भी उसी अवस्था मे रहता है इसलिए पूरे विश्व के वैज्ञानिक इसकी शुद्धता का परीक्षण कर चुके है। विष्णु पुराण के अनुसार भगवान का जलमय रूप ही इस संसार की उत्पत्ति का कारण है।
आज गंगा दशहरा पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ तड़के से ही गंगा के विभिन्न घाटों पर स्नान कर रही है, बढी जनसंख्या के साथ ही हरिद्वार में गंगा घाटों की संख्या में भी वृद्धि हुई है।

हरकी पैड़ी के साथ ही तमाम घाटों पर गंगा स्नान जारी है।दान पुण्य हवन यज्ञ किया जा रहा है शाम तक भीड और बढ़ने की संभावना है क्योंकि कल निर्जला एकादशी पर्व भी है।

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