विश्व पर्यावरण दिवस पर परमार्थ निकेतन में “आस्था, आहार और परिधान” एक सतत भविष्य के लिए एकजुट

आध्यात्मिक नेता, संयुक्त राष्ट्र प्रतिनिधि, सरकारी अधिकारी और सांस्कृतिक हस्तियाँ ऋषिकेश में पर्यावरणीय कार्रवाई के लिए एकत्रित

✨झोला अन्दोलन का कराया संकल्प
🌳एक पेड़ मां के नाम-एक पेड़ धरती मां के नाम
💦गंगा जी के तटों पर चलाया महास्वच्छता अभियान

🌸परम पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी, पूज्य साध्वी भगवती सरस्वती जी, मानस कथा व्यास संत मुरलीधर जी, प्रख्यात बॉलीवुड अभिनेत्री एवं प्र्यावरण संरक्षण की प्रेरक रवीना टंडन जी, कैबिनेट मंत्री, उत्तराखंड़ सरकार, श्री प्रदीप बत्रा जी, वेलनेस समर्थक डॉ. संचित षेट्टीजी, श्री विनोद मिश्रा, कंट्री मैनेजर, यूएनओपीएस इंडिया, डॉ. सुमित षर्मा, उप प्रमुख, यूएनईपी इंडिया कार्यालय, श्रीमती मीना रामावत जी की गरिमामयी उपस्थिति

ऋषिकेश, उत्तराखंड, 5 जून। परम पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज एवं पूज्य साध्वी भगवती सरस्वती जी के दिव्य मार्गदर्शन एवं आशीर्वाद से विश्व पर्यावरण दिवस, परमार्थ निकेतन से एक शक्तिशाली आह्वान के रूप में मनाया गया, जिसका उद्देश्य सजग जीवनशैली, सामूहिक प्रयास एवं आध्यात्मिक उत्तरदायित्व के माध्यम से हमारे आंतरिक एवं बाह्य पर्यावरण को स्वस्थ करना था।

परमार्थ निकेतन एवं ग्लोबल इंटरफेथ वॉश एलायंस (जीवा) द्वारा संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) तथा संयुक्त राष्ट्र परियोजना सेवा कार्यालय (यूएनओपीएस) के सहयोग से आयोजित यह संगम आध्यात्म, सततता और सामाजिक सेवा का एक पावन मिलन था, जिसमें धर्मगुरुओं, नीति-निर्माता, पर्यावरणविद्, कलाकार और समाज परिवर्तनकर्ता एक साथ आए, ताकि सभी के लिए एक स्वस्थ और सतत भविष्य का निर्माण किया जा सके।

“आस्था, आहार एवं परिधान, सतत जीवनशैली पहल” के अंतर्गत आयोजित इस विशेष सत्र में आध्यात्मिक विभूतियों, प्रतिनिधियों, संयुक्त राष्ट्र अधिकारियों, पर्यावरण कार्यकर्ताओं, युवाओं तथा प्रसिद्ध बॉलीवुड अभिनेत्री एवं पर्यावरण प्रेरक रवीना टंडन जी ने सहभाग किया और इस पर विचार-विमर्श किया कि भोजन, फैशन और आस्था – हमारे दैनिक चयन किस प्रकार पृथ्वी संरक्षण के लिए परिवर्तनकारी शक्ति बन सकते हैं।

प्रातःकाल माँ गंगा के तट, महर्षि महेश योगी आश्रम के निकट, विश्व पर्यावरण दिवस स्वच्छता अभियान चलाया गया। सभी ने सेवा भाव के साथ इस क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता की रक्षा का संकल्प लिया। यह पहल इस बात का सशक्त संदेश थी कि पर्यावरण संरक्षण की शुरुआत व्यक्तिगत जिम्मेदारी और सामूहिक प्रयास से होती है।

इसके पश्चात सभी ने विश्व पर्यावरण दिवस विश्व शान्ति यज्ञ सहभाग किया। इस यज्ञ के माध्यम से अनेकों श्रद्धालुओं एवं आगंतुकों तक सतत जीवन शैली का संदेश पहुँचा। कार्यक्रम का मुख्य विषय “आंतरिक पर्यावरण – बाह्य पर्यावरण – वैश्विक शांति का मार्ग” रहा, जिसमें यह स्पष्ट किया गया कि पृथ्वी का उपचार पहले हमारे भीतर जागरूकता और संतुलन से प्रारंभ होता है।

गंगा नंदिनी (जीवा) ने सभी अतिथियों का स्वागत, अभिनन्दन करते हुए अध्यात्म और सतत जीवन शैली के बीच सेतु बनाने की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि धर्म आधारित समुदाय व्यवहार परिवर्तन और पर्यावरणीय जिम्मेदारी के लिए अत्यंत प्रभावशाली भूमिका निभा सकते हैं।

कार्यक्रम का शुभारम्भ श्रीराम कथा के मंच पर दीप प्रज्ज्वलन, सामूहिक पर्यावरण संकल्प, पौधारोपण अभियान (एक पेड़ माँ के नाम-एक पेड़ धरती मां के नाम) तथा गंगा तट की स्वच्छता जैसे पवित्र आयोजनों के साथ किया। सभी प्रतिभागियों ने सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग कम करने, सतत जीवन अपनाने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और पारिस्थितिक पुनर्स्थापन का संकल्प लिया। सभी विभूतियों में तुलसी जी के पौधे को जल अर्पित कर पौधों के प्रति सम्मान का संदेश दिया।

इस अवसर पर श्रीमानस कथा व्यास, संत मुरलीधर जी ने पंचवटी के प्राकृतिक सौन्दर्य का दिव्यता के साथ वर्णन करते हुये कहा कि प्रभु श्री राम ने 12 वर्षों का वनवास जंगलों में, प्रकृति के संरक्षण में रहकर यह संदेश दिया कि प्राकृतिक जीवन शैली जी सहज व सुरक्षित जीवन हैं।

परम पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में “धरती माता की जय” के उद्घोष के साथ कहा कि यदि धरती को बचाना है तो पेड़ लगाने होंगे। पानी तो हम बना नहीं सकते, लेकिन उसे बचा सकते हैं। प्लास्टिक, विशेषकर सिंगल यूज प्लास्टिक को हमें जड़ से समाप्त करना होगा।

हमारे वेदों में कहा गया है “माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः” धरती हमारी माता है और हम उसकी संताने हैं इसलिए हमें जल संरक्षण करना होगा, बिजली का संरक्षण करना होगा और अपने एसी का तापमान 24 से 26 डिग्री के बीच रखना चाहिए।

उन्होंने कहा कि पानी क्यों जरूरी है, कुछ देशों में तेल की समस्या हुई तो हाहाकार मच गया, लेकिन “वाटर इज नेक्स्ट गोल्ड”। पानी नहीं तो पूजा नहीं, कथा नहीं और कुंभ नहीं, पानी नहीं तो कुछ भी नहीं, पानी नही ंतो कल भी नहीं, जल नहीं तो जीवन नहीं।

युवा, कर्मठ, कर्मयोगी एवं निर्भीक उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी को उनके जन्मदिन पर हार्दिक शुभकामनाएँ देते हुए कहा गया कि उन्होंने अपने जन्मदिन के अवसर पर 5 करोड़ वृक्षारोपण का जो महाअभियान चलाया है, वह अत्यंत प्रेरणादायक एवं अनुकरणीय है। उपस्थित सभी गणमान्यजनों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उनके प्रति अपनी शुभकामनाएँ एवं सम्मान व्यक्त किया।

पूज्य स्वामी जी ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण की यात्रा अकेले की यात्रा नहीं है, यह हम सबकी यात्रा है। सरकार अपना कार्य कर रही है परन्तु हम सब अपना-अपना कार्य करें। उन्होंने सभी को जल बचाने, पर्यावरण संरक्षण और सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग न करने का संकल्प कराया।

अपने मुख्य संबोधन में सुप्रसिद्ध अभिनेत्री, रवीना टंडन जी ने कहा कि हमें विकास और पर्यावरण संरक्षण के लिये हाथों से हाथ मिलाकर कार्य करना होगा। हमारा इकोसिस्टम, वसुधैव कुटुंबकम, पूरी धरती पर रहने वाले जीव-जंतु सभी के पीछे प्रभु का एक महान उद्देश्य है। हमारी धरती, वायु और जल को स्वच्छ रखने से ही हमारी पीढ़ियाँ आगे बढ़ेंगी। यदि हवा स्वच्छ नहीं होगी, भोजन शुद्ध नहीं होगा, जल प्रदूषित होगा, तो हम अपनी आने वाली पीढ़ियों को क्या देंगे? कैंसर और श्वसन रोग बढ़ रहे हैं।

उन्होंने सभी जीवों के सम्मान का संदेश दिया। हर जीव के प्रति हमारी सेवा समान होनी चाहिए। जीवों के अंदर केवल जीने की चाह होती है, इसलिए हमें वैक्सीनेशन ड्राइव के प्रति भी सचेत रहना चाहिए।

यदि हम धरती माता की सेवा नहीं कर सकते, तो हमें अपने परिवार को बढ़ाने का भी अधिकार नहीं है, क्योंकि हम आने वाली पीढ़ियों को क्या दे रहे हैं? उन्होंने मिट्टी के बर्तनों के उपयोग, पेड़-पौधों और प्रत्येक प्राणी के संरक्षण का संदेश दिया। अपनी इच्छाओं, लोभ और लालच पर नियंत्रण रखने की आवश्यकता पर बल दिया, क्योंकि इन्हीं से धरती की समस्याएँ शुरू होती हैं।

साध्वी भगवती सरस्वती जी ने कहा कि गंगा केवल बाहर नहीं, भीतर भी है। वर्तमान समय में पूरे विश्व में भोजन, भूमि और संसाधनों की कमी हो रही है, जबकि हम समाधान नहीं बल्कि समस्याएँ बढ़ा रहे हैं। हमारे शास्त्र कहते हैंकृ“वसुधैव कुटुंबकम्” और “ईशावास्यमिदं सर्वम्” सब कुछ प्रभु द्वारा प्रदत्त है। धरती माँ संसाधन नहीं, बल्कि माँ है।

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि हर मिनट 45 से 50 एकड़ जंगल काटे जा रहे हैं, जिसमें 75 प्रतिशत योगदान मीट इंडस्ट्री का है। एक किलो मांस के उत्पादन में लगभग 15,000 लीटर जल लगता है। यदि हम अपने भोजन की आदतें बदलें तो बड़ा परिवर्तन संभव है।

रोज 20 से 25 हजार लोग भूख और कुपोषण का शिकार हो रहे हैं। अध्यात्म हमें “अहिंसा परमो धर्म” का संदेश देता है, परंतु यदि हमारे भोजन के कारण हिंसा हो रही है, तो यह धर्म नहीं है। आज हमें संकल्प लेना चाहिए कि हम करुणा के साथ जीवन जिएँ। धर्म हमारे कर्म में होना चाहिए, यही जीवन का सार है।

अंतरराष्ट्रीय साझेदारों की ओर से श्री विनोद मिश्रा, कंट्री मैनेजर, यूएनओपीएस इंडिया ने पर्यावरणीय प्रतिबद्धताओं को व्यावहारिक और व्यापक समाधान में बदलने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि पर्यावरण का संकट प्रकृति ने नहीं, बल्कि हम मनुष्यों ने खड़ा किया है। पूरी धरती पर तीन तरह के संकट हैं। पहला है डिजास्टर, जिससे मानव, संपत्ति व संसाधनों की क्षति हो रही है इसलिए इन्फ्रास्ट्रक्चर को पर्यावरण अनुकूल बनाना होगा। दूसरा है बायोडायवर्सिटी लॉस, जिसमें हमने अनेक प्रकार की प्राकृतिक संपदाओं को समाप्त कर दिया है। अब हम बायोडायवर्सिटी पार्क बना रहे हैं, परंतु यह पर्याप्त नहीं है, इसके लिये हम सभी को आगे आना होगा। तीसरा है प्रदूषण, जल, वायु और भूमि में प्रदूषण बहुत बढ़ गया है। शोध बताते हैं कि आने वाले 10 वर्षों में सांस की बीमारियाँ बढ़ने वाली हैं, इसलिए हमें अभी से सचेत होना होगा। हमारे देश के माननीय प्रधानमंत्री जी ने तीन वर्ष पहले जो सूत्र दिया “लाइफस्टाइल फॉर एनवायरनमेंट” उसे अपनाना होगा।

डॉ. सुमित शर्मा, उप प्रमुख, यूएनईपी इंडिया कार्यालय ने वैश्विक पर्यावरण लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु सामूहिक प्रयास और साझेदारी के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि हमारी धरती पर 1 डिग्री तापमान बढ़ जाना सुनने में भले ही छोटा लगे, लेकिन इसके परिणाम बहुत भयानक हैं। गाड़ियों से धुआँ और निर्माण कार्यों से धूल निकल रही है। इन सबका हमारे फेफड़ों और हृदय पर असर पड़ रहा है। बच्चों में सोचने-समझने की क्षमता भी प्रभावित हो रही है। हमें सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग कम करना होगा। हमें अपनी फैशन की परिभाषा बदलनी होगी और कपड़ों का बार-बार उपयोग करना चाहिए।

कैबिनेट मंत्री, उत्तराखंड़ सरकार, श्री प्रदीप बत्रा जी ने कहा कि आज का दिन धरती माता की सेवा और संकल्प का दिन है। हम कहते हैं कि यह धरती है, लेकिन वास्तव में यह हमारी माता है। विकास के साथ-साथ विरासत का संरक्षण भी आवश्यक है। हमारी नदियाँ, पर्वत और हिमालय हमारी वास्तविक विरासत हैं। “मानव सेवा माधव सेवा” का संदेश दिया।

पूज्य स्वामी जी ने सभी भक्तों, साधकों, श्रद्धालुओं को हजारों-हजारों कपड़े के थैलों का वितरण कर सिंलग यूज प्लास्टिक का उपयोग न करने का संकल्प कराया।

परमार्थ निकेतन के बारे में
परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश में स्थित भारत के सबसे बड़े आध्यात्मिक संस्थानों में से एक है, जो योग, अध्यात्म, पर्यावरण संरक्षण, मानवीय सेवा और अंतरधार्मिक संवाद का वैश्विक केंद्र है।

जीवा के बारे में
ग्लोबल इंटरफेथ वॉश एलायंस विश्व का पहला ऐसा धार्मिक नेताओं का गठबंधन है जो जल, स्वच्छता और स्वच्छता सुधार के साथ-साथ आस्था आधारित पर्यावरणीय संरक्षण को बढ़ावा देता है।


By Shashi Sharma

Shashi Sharma – Senior Woman Journalist

Shashi Sharma has been active in journalism since 1985, holding the distinction of being Uttarakhand's first female journalist.

For 36 years, starting in 1989, she rendered distinguished service to India's premier news agency, PTI. During this long tenure, she demonstrated the power of her writing on numerous significant occasions; notably, she spent two months in Tehri reporting positively on the Tehri Dam—which was then mired in controversy—and used her pen to help pave the way for its construction.

Currently, Mrs. Shashi Sharma runs the news portal *Newsok24.com* and serves as the editor of the weekly newspaper *Desh Nirdesh*; she is also a registered anchor and commentator for Delhi Doordarshan.

शशि शर्मा वरिष्ठ महिला पत्रकार शशि शर्मा उत्तराखंड की पहली महिला पत्रकार के तौर पर 1985 से पत्रकारिता में कार्यरत हैं। 1989 से 36 वर्षों तक उन्होंने भारत की शीर्ष समाचार एजेंसी पीटीआई के लिए अपनी सशक्त सेवाएं दीं। छत्तीस वर्षों की लंबी अवधि तक पीटीआई के लिए काम करते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण मौकों पर अपनी कलम का लोहा मनवाया, जिसमें दो महीने तक टिहरी में रहकर विवादों के संकट में रहे टिहरी बांध पर सकारात्मक रिपोर्टिंग कर अपनी कलम की ताकत से निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया। वर्तमान में श्रीमती शशि शर्मा Newsok24 com न्यूज पोर्टल को चला रहीं हैं और साप्ताहिक समाचार पत्र देश निर्देश की सम्पादक होने के साथ ही दिल्ली दूरदर्शन की रजिस्टर्ड एंकर और कमेंटेटर भी हैं।

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