सोमवती अमावस्या पर गंगा स्नान, राष्ट्र समृद्धि व विश्व शांति के लिये प्रार्थना
पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी, माननीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्यमंत्री, श्री भागीरथ चौधरी जी, डॉ. साध्वी भगवती सरस्वती जी, संत मुरलीधर जी एवं देश-विदेश से आये श्रद्धालुओं ने किया गंगा स्नान
माननीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्यमंत्री श्री भागीरथ चौधरी जी आये परमार्थ निकेतन
ऋषिकेश,। अधिकमास, पावन सोमवती अमावस्या के अवसर पर परमार्थ निकेतन में देश-विदेश से आये श्रद्धालुओं ने पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, माननीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्यमंत्री श्री भागीरथ चौधरी जी, डॉ. साध्वी भगवती सरस्वती जी तथा संत मुरलीधर जी के सान्निध्य में मां गंगा में आस्था की डुबकी लगाकर राष्ट्र समृद्धि, विश्व शांति एवं कल्याण की प्रार्थना की। श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान, ध्यान, दान एवं यज्ञ में सहभाग कर आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया।
इस अवसर पर पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा, “अधिकमास के अवसर पर सोमवती अमावस्या का यह पावन संयोग 301 वर्षों के बाद आया है। सबसे बड़ा योग व संयोग तो यही है कि हम मां गंगा के पावन तट पर हैं।
पूज्य स्वामी जी ने कहा कि आज विश्व वृद्ध दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस है और श्रीराम कथा हमें अपने बड़ों का सम्मान तथा उनकी आज्ञा का पालन करने का दिव्य संदेश देती है। उन्होंने कहा, “जिन हाथों ने हमें चलना सिखाया, जिन आँखों ने हमारे लिये अनगिनत सपने देखे, जिन त्याग और तपस्या ने हमारे जीवन को आकार दिया, जिनकी वजह से हमने विश्व में सम्मान पाया, परन्तु कई बार हम उन्हीं को इग्नोर कर देते हैं।”
पूज्य स्वामी जी ने कहा कि वृद्धजन परिवार की जड़ें, समाज की चेतना और अनुभव के जीवंत विश्वविद्यालय हैं। उन्होंने कहा, “जिस सभ्यता में माता-पिता को देवतुल्य माना गया हो, जहाँ ‘मातृ देवो भवः, पितृ देवो भवः’ का उद्घोष होता हो, वहाँ वृद्धों की उपेक्षा, तिरस्कार या दुर्व्यवहार केवल एक सामाजिक समस्या नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक चेतना पर एक गहरा आघात है।”
पूज्य स्वामी जी ने कहा, “अज्ञान का अहंकार ही व्यक्ति के भीतर अंहकार पैदा करता है। जीता हुआ भी हारा जा सकता है अहंकार से, लेकिन हारा हुआ भी जीता जा सकता है संस्कार से। इसीलिये यह कथा है। श्रीराम कथा संस्कारों की कथा है, संस्कृति की कथा है और संस्कारों को जगाने वाली कथा है।”

सोमवती अमावस्या के अवसर पर पूज्य स्वामी जी ने पर्यावरण संरक्षण एवं पितृ सम्मान को जोड़ते हुए एक अभिनव संदेश दिया। उन्होंने “पितृ तर्पण-पेड़ अर्पण का संदेश देते हुए कहा हम अपने वृद्धजनों का सम्मान करें और जब वे इस दुनिया से चले जाये तो उनकी थोड़ी-सी अस्थियाँ नदियों में प्रवाहित करें, परन्तु जो बाकी अस्थियाँ हैं, उन्हें पौधा रोपण करते समय उन गढ़डों में डालें और उनकी उनकी स्मृति में फलदार पौधों का रोपण कर ‘वृद्धजन स्मृति स्थल’ और ‘सम्मान स्थल’ बनायें।”

उन्होंने आगे कहा, “जितने वर्ष के पिताजी व माताजी हों, उनकी स्मृति में उतने फलदार पेड़ों का रोपण करें, ताकि हमारे पूर्वज जीते-जी हमें अपना सब कुछ देकर गये और जाते-जाते भी अनेकों पक्षियों को आश्रय, भोजन और छाया देते रहें। इससे गंगाजी, यमुनाजी एवं अन्य नदियों के तटों पर ग्रीन कॉरिडोर का निर्माण होगा। यही संकल्प आज यहाँ से लेकर जायें।”

इस अवसर पर संत मुरलीधर जी ने श्रीराम परिवार के आदर्शों का उल्लेख करते हुए कहा, “सम्पत्ति के लिये बँटवारे तो बहुत देखे, परन्तु विपत्ति के लिये बँटवारा पहली बार श्रीराम परिवार में ही देखा। श्रीराम परिवार में विपत्तियों को बाँटने का जो भाव है, यही हमारा संस्कार है।”

उन्होंने कहा कि श्रीराम का जीवन त्याग, सेवा, समर्पण और परिवार के प्रति उत्तरदायित्व का अनुपम उदाहरण है। आज के समय में समाज को इन्हीं मूल्यों को आत्मसात करने की आवश्यकता है, जिससे परिवार, समाज और राष्ट्र अधिक सशक्त बन सके।

परमार्थ गंगा तट पर श्रद्धालुओं ने गंगा जी से विशेष प्रार्थनाएँ कीं तथा अपने जीवन में संस्कार, सम्मान और सेवा के मूल्यों को अपनाने का संकल्प लिया।


By Shashi Sharma

Shashi Sharma – Senior Woman Journalist

Shashi Sharma has been active in journalism since 1985, holding the distinction of being Uttarakhand's first female journalist.

For 36 years, starting in 1989, she rendered distinguished service to India's premier news agency, PTI. During this long tenure, she demonstrated the power of her writing on numerous significant occasions; notably, she spent two months in Tehri reporting positively on the Tehri Dam—which was then mired in controversy—and used her pen to help pave the way for its construction.

Currently, Mrs. Shashi Sharma runs the news portal *Newsok24.com* and serves as the editor of the weekly newspaper *Desh Nirdesh*; she is also a registered anchor and commentator for Delhi Doordarshan.

शशि शर्मा वरिष्ठ महिला पत्रकार शशि शर्मा उत्तराखंड की पहली महिला पत्रकार के तौर पर 1985 से पत्रकारिता में कार्यरत हैं। 1989 से 36 वर्षों तक उन्होंने भारत की शीर्ष समाचार एजेंसी पीटीआई के लिए अपनी सशक्त सेवाएं दीं। छत्तीस वर्षों की लंबी अवधि तक पीटीआई के लिए काम करते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण मौकों पर अपनी कलम का लोहा मनवाया, जिसमें दो महीने तक टिहरी में रहकर विवादों के संकट में रहे टिहरी बांध पर सकारात्मक रिपोर्टिंग कर अपनी कलम की ताकत से निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया। वर्तमान में श्रीमती शशि शर्मा Newsok24 com न्यूज पोर्टल को चला रहीं हैं और साप्ताहिक समाचार पत्र देश निर्देश की सम्पादक होने के साथ ही दिल्ली दूरदर्शन की रजिस्टर्ड एंकर और कमेंटेटर भी हैं।

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