कल्याण शताब्दी समारोह*

अध्यात्म व राजनीति का मणिकांचन संयोग*
कल्याण के शताब्दी अंक का विमोचन*
कल्याण गुजराती अंग का विमोचन*
कल्याण की 17 करोड़ पचास लाख प्रतियाँ अब तक प्रकाशित*
घोषणा कल्याण की यात्रा आगे भी अनवरत जारी रहेगी*
माननीय केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह जी का स्वर्गाश्रम, ऋषिकेश, देवभूमि उत्तराखंड में अभिनन्दन*
श्री अमित शाह जी को स्मृति चिन्ह किया समर्पित*
पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने सुगंधित इलायची की माला माननीय श्री अमित शाह जी को की भेंट*
कल्याण शताब्दी समारोह में माननीय केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह जी, माननीय मुख्यमंत्री उत्तराखंड़, श्री पुष्कर सिंह धामी जी और माननीय सांसद पौड़ी, श्री अनिल बलूनी जी की गरिमामयी उपस्थिति*
परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी, कोषाध्यक्ष श्रीराम जन्म भूमि ट्रष्ट, पूज्य गोविंद देव गिरि जी महाराज, पूज्य द्वाराचार्य स्वामी राजेन्द्रदास जी महाराज, आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी अवधेशानन्द गिरि जी महाराज, पूज्य स्वामी श्री परमानन्द जी महाराज, श्रद्धेय श्री गोविन्दानन्द जी तीर्थ जी महाराज, अध्यक्ष गोविन्द भवन, गीताप्रेस, श्री केशोराम जी अग्रवाल और अनेक पूज्य संतों का पावन सान्निध्य*
गीताप्रेस ‘कल्याण’ पत्रिका का शताब्दी समारोह सनातन संस्कृति की अखंड ज्ञानज्योति का उत्सव*
गीता प्रेस ने हस्तलिखित पांडुलिपियों से लेकर लिथो प्रेस तक की ऐतिहासिक यात्रा तय की*
सभ्यतायें तलवार से नहीं शब्द व ज्ञान से ही खड़ी होती है*
श्री अमित शाह जी*

ऋऋषिकेश । माननीय केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह जी ने आज उत्तराखंड की पुण्यभूमि ऋषिकेश में गीताप्रेस गोरखपुर द्वारा प्रकाशित विश्वविख्यात मासिक पत्रिका ‘कल्याण’ के शताब्दी समारोह में सहभाग कर संबोधित किया। यह अवसर कल्याण पत्रिका के सौ वर्षों की यात्रा का दिव्य उत्सव है, उनका आगमन सनातन संस्कृति, भारतीय अध्यात्म और राष्ट्र की आत्मा के संरक्षण का गौरवपूर्ण पर्व है।
माननीय केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह जी ने कहा कि आज कल्याण का शताब्दी वर्ष है, सौ वाँ वर्ष अंक प्रकाशित हो रहा है। पूज्य संतों व गीता प्रेस के वाचकों को प्रणाम करते हुए उन्होंने कहा कि भारत का हर वह व्यक्ति जिसे सनातन धर्म से आकांक्षा है, जो सभी समस्याओं के समाधान के लिए भारत की ओर देख रहा है, वह गीता प्रेस से जुड़े बिना रह ही नहीं सकता।
सेठ जी व भाई जी ने करोड़ों व्यक्तियों को अध्यात्म से जोड़ा और आगे का मार्ग प्रशस्त किया। गीता प्रेस के आँकडे़ अद्भुत हैं। गीता प्रेस मुनाफे के लिए नहीं, पीढ़ियों के निर्माण के लिए चलता है। गीता प्रेस से आज तक कोई फोन न सरकार को आया, न सहायता के लिए किया गया।
श्री सेठ जी, जयदयाल जी, भाई जी एवं सभी ट्रष्टियों को मनपूर्वक प्रणाम करते हुए कहा कि कल्याण ने हर संकट में भारतीय संस्कृति के दीप को जलाए रखने का कार्य किया है। कल्याण मात्र पत्रिका नहीं, भारतीयों के लिए पथप्रदर्शक है।
भारतीय संस्कृति को जीवंत रखने के लिए अनेक प्रयास हो रहे हैं, जिनमें सबसे मजबूत शक्ति कल्याण है। कल्याण ने सौ वर्षों में सनातन धर्म की सज्जन शक्ति को संगठित करने का कार्य किया है। कल्याण का योगदान अतुलनीय है।
आदि शंकराचार्य की मीमांसा पर टीकाओं को जन-जन तक पहुँचाकर गीता प्रेस ने अत्यंत बड़ा कार्य किया है। मेरे घर में भी चार पीढ़ियों ने गीता प्रेस की पुस्तकें पढ़ी हैं।
गीता प्रेस ने हस्तलिखित पांडुलिपियों से लेकर लिथो प्रेस तक की ऐतिहासिक यात्रा तय की।
माननीय मुख्यमंत्री उत्तराखंड़, श्री पुष्कर सिंह धामी जी ने कल्याण के शताब्दी वर्ष हेतु गीता भवन व गीता प्रेस परिवार को शुभकामनायें दी। इस अवसर पर उन्होंने श्री सेठ जी, श्री भाई जी और स्वामी श्री रामसुख दास जी को नमन किया। गीता प्रेस ने ज्ञान परम्परा को घर-घर तक पहुंचाने का कार्य किया है। कल्याण पत्रिका विगत सौ वर्षो से सनातन संस्कृति की पताका पूरे देश में फहरा रही है।
परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने माननीय केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह जी के स्वर्गाश्रम में आगमन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि भारत के माननीय गृहमंत्री रिफॉर्मर, परफार्मर और ट्रांसफार्मर हैं। भारत के ऊर्जावान प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के मार्गदर्शन और श्री अमित शाह जी के नेतृत्व में भारत एक नूतन युग में प्रवेश कर रहा है।

पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि यह धरती संयम की धरती है, संगम की धरती है, देवभूमि है, दिव्य भूमि है। इन गंगा के तटों ने पूरे विश्व को जीने की राह दिखाई। इस धरती ने “जियो और जीने दो” के साथ “जीवन दो” का मंत्र दिया। यह पहली बार है पूरे विश्व में कि किसी ग्रंथ की शताब्दी मनाई जा रही है।
आदरणीय महान श्वेत वस्त्रधारी गोयनका जी, पूज्य भाई जी प्रभु के ग्रंथावतार हैं। सनातन धर्म की मर्यादाओं को बचाने के लिए गीता भवन के इस ग्रंथावतार का निर्माण किया गया। गृहस्थ में रहकर परिवार को आश्रम बनाया। गीता प्रेस पूरे विश्व का पहला ऐसा प्रेस है, जिसने इतने कम दाम पर साहित्य उपलब्ध कराया। इन तपस्वियों ने सौ वर्ष पूर्व ही भविष्य में आने वाले सोच के संकट को भाँपकर इस दिव्य प्रेस-रूपी मंदिर का निर्माण किया।
वर्ष 1962 में पूज्य स्वामी रामसुखदास जी महाराज ने इसी भूमि पर विचार का बीज बोया। यह कल्याण-वृक्ष आज कल्पवृक्ष बनकर पूरी मानवता को प्रकाशित कर रहा है। सौ करोड़ से अधिक ग्रंथों का प्रकाशन कर सनातन संस्कृति को बचाए रखने का कार्य किया गया। सनातन को जीवंत रखने में इन दिव्य महापुरुषों का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है।
गीता प्रेस, गोरखपुर एक तपोभूमि है। सनातन है तो कल्चर, नेचर और फ्यूचर है, और इसे बचाए रखने में गीता प्रेस गोरखपुर का महत्वपूर्ण योगदान है। इन्होंने केवल ग्रंथ नहीं छापे, उन्होंने ग्रंथियों को भी काटा है।
आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी अवधेशानन्द गिरि जी महाराज ने कहा कि गीताप्रेस ने अत्यंत कम मूल्य पर पूरे विश्व को साहित्य उपलब्ध कराया। कल्याण भारत के लगभग हर घर में सहज उपलब्ध है। विचारों से ही जीवन बदलता है। कल्याण ने पूरे भारत को विचार दिया है, गीता प्रेस ईश्वरीय संकल्प है। जिसने पूरे भारत में रूपान्तरण किया।
गीता मनीषी, पूज्य स्वामी ज्ञानानन्द जी महाराज ने कहा कि कल्याण ने करोड़ों भक्तों को राष्ट्रनिष्ठा से जोड़ा। कल्याण में राष्ट्ररक्षा, गोरक्षा और धर्मरक्षा की परम्पराओं को जोड़ा। कल्याण पत्रिका में सनातन के सभी प्रकल्पों को स्थान मिला। कल्याण स्वयं में एक आदर्श है, एक उदाहरण है।
कल्याण का बीजारोपण सेठ जी ने किया और भाई जी ने इसे और पुष्पित किया, तथा रामसुखदास जी महाराज ने इसे वटवृक्ष की भाँति विकसित किया।
गीताप्रेस गोरखपुर भारतीय प्रकाशन जगत की वह पवित्र धरोहर है, जिसने बिना किसी व्यावसायिक स्वार्थ के, लोककल्याण और धर्मप्रसार के उद्देश्य से सनातन ज्ञान को जन-जन तक पहुँचाने का अद्भुत कार्य किया है ‘कल्याण’ पत्रिका ने पिछले सौ वर्षों में करोड़ों पाठकों के जीवन को आध्यात्मिक दिशा दी और भारतीय संस्कृति की जड़ों को सुदृढ़ किया।
इस ऐतिहासिक यात्रा के सूत्रधार थे स्वर्गीय श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार जी, “भाई जी”। वे ‘कल्याण’ के प्रथम संपादक ही नहीं, बल्कि सनातन चेतना के सच्चे साधक थे। उनके शब्दों में भक्ति की सुगंध, विवेक की स्पष्टता और करुणा की मधुरता समाहित थी। उन्होंने लेखनी को साधना और तपस्या बनाया। भाई जी ने ‘कल्याण’ के माध्यम से वेद, उपनिषद, गीता, रामायण, पुराण, भक्ति परंपरा और भारतीय दर्शन को सरल भाषा में घर-घर पहुँचाया। उनका उद्देश्य स्पष्ट था कि हिंदू समाज को उसकी जड़ों से जोड़े रखना, और आत्मगौरव से भर देना।
आज जब आधुनिकता की आँधी में सांस्कृतिक मूल्य डगमगाते दिखाई देते हैं, तब ‘कल्याण’ पत्रिका एक दीपस्तंभ की तरह खड़ी है और आज के समय में भी अडिग, तेजस्वी और प्रेरणादायक है। वर्तमान समय में डिजिटल युग में भी ‘कल्याण’ की आत्मा अक्षुण्ण बनी हुई है।
केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी का इस अवसर पर उपस्थित होना इस बात का प्रमाण है कि राष्ट्र निर्माण केवल राजनीति से नहीं, बल्कि संस्कृति से होता है। उनका संबोधन निश्चित ही देशभर के युवाओं को यह स्मरण कराएगा कि भारत की असली शक्ति उसकी आध्यात्मिक चेतना में निहित ।कल्याण’ पत्रिका केवल पढ़ी नहीं जाती, वह जीवन को गढ़ती है। उसने लाखों साधकों, गृहस्थों, युवाओं और संतों को एक साझा सांस्कृतिक सूत्र में बाँधा है। इसमें प्रकाशित लेखों ने आत्मचिंतन, संयम, सेवा और समर्पण की प्रेरणा दी है।
आज जब कल्याण का शताब्दी समारोह मना रहे हैं, तब यह केवल अतीत की उपलब्धियों का स्मरण नहीं, बल्कि भविष्य के लिए संकल्प भी है कि सनातन संस्कृति की यह अखंड धारा सदैव प्रवाहित होती रहेगी। स्वर्गीय श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार जी की लेखनी तथा गीताप्रेस की तपस्वी परंपरा और करोड़ों पाठकों का प्रेम इन सबने मिलकर ‘कल्याण’ को एक पत्रिका से महायज्ञ बना दिया है।
आज ऋषिकेश की पुण्यभूमि से उठने वाला यह संदेश पूरे विश्व तक जाएगा, भारत केवल एक राष्ट्र नहीं, एक संस्कृति है और उस संस्कृति की धड़कन है सनातन धर्म।
श्री कृष्ण कुमार जी, श्री देवीदायल अग्रवाल जी, माननीय विधायक, यमकेश्वर श्रीमती रेणु बिष्ट जी, जिलाधिकार, पौढ़ी गढ़वाल, श्री पूनम चन्द्र राढ़ी जी, श्री मुरली मनोहर जी सर्राफ, श्री चन्द्र प्रकाश जी अग्रवाल जी, श्री जय किशन जी, श्री शुभकान्त जालान जी, श्री माधव जी अग्रवाल, श्री नन्द किशोर जी भंवर आदि अनेक विशिष्ट विभूतियों का पावन सान्निध्य।


By Shashi Sharma

Shashi Sharma – Senior Woman Journalist

Shashi Sharma has been active in journalism since 1985, holding the distinction of being Uttarakhand's first female journalist.

For 36 years, starting in 1989, she rendered distinguished service to India's premier news agency, PTI. During this long tenure, she demonstrated the power of her writing on numerous significant occasions; notably, she spent two months in Tehri reporting positively on the Tehri Dam—which was then mired in controversy—and used her pen to help pave the way for its construction.

Currently, Mrs. Shashi Sharma runs the news portal *Newsok24.com* and serves as the editor of the weekly newspaper *Desh Nirdesh*; she is also a registered anchor and commentator for Delhi Doordarshan.

शशि शर्मा वरिष्ठ महिला पत्रकार शशि शर्मा उत्तराखंड की पहली महिला पत्रकार के तौर पर 1985 से पत्रकारिता में कार्यरत हैं। 1989 से 36 वर्षों तक उन्होंने भारत की शीर्ष समाचार एजेंसी पीटीआई के लिए अपनी सशक्त सेवाएं दीं। छत्तीस वर्षों की लंबी अवधि तक पीटीआई के लिए काम करते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण मौकों पर अपनी कलम का लोहा मनवाया, जिसमें दो महीने तक टिहरी में रहकर विवादों के संकट में रहे टिहरी बांध पर सकारात्मक रिपोर्टिंग कर अपनी कलम की ताकत से निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया। वर्तमान में श्रीमती शशि शर्मा Newsok24 com न्यूज पोर्टल को चला रहीं हैं और साप्ताहिक समाचार पत्र देश निर्देश की सम्पादक होने के साथ ही दिल्ली दूरदर्शन की रजिस्टर्ड एंकर और कमेंटेटर भी हैं।

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