देहरादून महायोजना-2041 : 12वें दिन चंद्रबनी में गूंजे विकास के सुझाव

सेक्टर-12 की जनसुनवाई में नागरिकों ने रखी अपनी बात, भविष्य के दून को लेकर दिखा उत्साह

देहरादून को वर्ष 2041 तक एक सुनियोजित, आधुनिक और पर्यावरणीय दृष्टि से संतुलित राजधानी के रूप में विकसित करने की दिशा में चल रही महायोजना-2041 की जनसुनवाई प्रक्रिया लगातार जनसमर्थन हासिल कर रही है। मंगलवार को अभियान के 12वें दिन सेक्टर-12 की जनसुनवाई चंद्रबनी रोड स्थित वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया सभागार में आयोजित की गई। जनसुनवाई में क्षेत्र के नागरिकों, भू-स्वामियों, सामाजिक संगठनों, शिक्षाविदों, व्यापारिक प्रतिनिधियों और विभिन्न हितधारकों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर अपने सुझाव और आपत्तियां दर्ज कराईं। कार्यक्रम के दौरान एमडीडीए अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों ने महायोजना-2041 के प्रस्तावित प्रावधानों की जानकारी देते हुए नागरिकों से संवाद किया। लोगों ने राजधानी के संतुलित विकास, आधारभूत ढांचे के विस्तार और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए। अधिकारियों ने सभी सुझावों को दर्ज करते हुए आश्वस्त किया कि प्रत्येक बिंदु का गंभीरता से परीक्षण किया जाएगा।

यातायात और आधारभूत ढांचे पर उठे अहम सवाल
जनसुनवाई में सबसे अधिक चर्चा तेजी से बढ़ते शहरी दबाव और उससे जुड़ी चुनौतियों को लेकर हुई। नागरिकों ने चंद्रबनी, मोहकमपुर, शिमला बाईपास और आसपास के क्षेत्रों में बढ़ते यातायात दबाव का उल्लेख करते हुए सड़क नेटवर्क को मजबूत बनाने की मांग की। प्रतिभागियों ने सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को और प्रभावी बनाने, पार्किंग सुविधाओं का विस्तार करने तथा भविष्य की आबादी को ध्यान में रखते हुए नए संपर्क मार्ग विकसित करने के सुझाव दिए। इसके अलावा जलापूर्ति, सीवरेज, ड्रेनेज, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और सार्वजनिक सुविधाओं के बेहतर विस्तार को भी महायोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने पर जोर दिया गया। कई लोगों ने कहा कि राजधानी का विकास केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि नागरिक सुविधाओं की गुणवत्ता भी समान रूप से बढ़नी चाहिए।

हरित दून की पहचान बचाने पर जोर
जनसुनवाई में पर्यावरण संरक्षण का मुद्दा भी प्रमुखता से उभरकर सामने आया। नागरिकों ने दून की हरियाली, प्राकृतिक जल स्रोतों और खुले सार्वजनिक स्थलों को संरक्षित रखने के लिए विशेष प्रावधान करने की मांग की। वर्षा जल संचयन, भूजल संरक्षण, जलभराव की समस्या के समाधान और हरित क्षेत्रों के विस्तार पर भी विस्तृत चर्चा हुई। प्रतिभागियों का कहना था कि देहरादून की पहचान उसकी प्राकृतिक सुंदरता और पर्यावरणीय संपदा से है। इसलिए विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखना महायोजना की सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए।

स्थानीय जरूरतों के अनुरूप बने विकास मॉडल
भू-स्वामियों और संस्थागत प्रतिनिधियों ने भूमि उपयोग प्रस्तावों तथा विकास नियंत्रण नियमों पर अपने सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक क्षेत्र की भौगोलिक, सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियां अलग हैं, इसलिए क्षेत्र विशेष की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर विकास मॉडल तैयार किया जाना चाहिए। एमडीडीए अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सभी सुझावों और आपत्तियों का विस्तृत अध्ययन कर उन्हें अंतिम प्रारूप में शामिल करने पर विचार किया जाएगा।

जनभागीदारी से बनेगी मजबूत महायोजना : बंशीधर तिवारी
एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि देहरादून महायोजना-2041 केवल नक्शों और नियमों का दस्तावेज नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए राजधानी की विकास रूपरेखा है। उन्होंने कहा कि जनसुनवाई के दौरान नागरिकों से जो सुझाव प्राप्त हो रहे हैं, वे योजना को अधिक व्यवहारिक, जनोन्मुखी और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। तिवारी ने कहा कि विकास, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक सुविधाओं के बीच संतुलन स्थापित करना महायोजना का प्रमुख उद्देश्य है। उन्होंने लोगों से आगे भी सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील करते हुए कहा कि जनता का सहयोग ही इस महायोजना की सबसे बड़ी ताकत है और इसी से देहरादून का सुनियोजित भविष्य तय होगा।

हर सुझाव का होगा गंभीर परीक्षण : मोहन सिंह बर्निया
एमडीडीए सचिव मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि जनसुनवाई के दौरान प्राप्त सभी सुझावों और आपत्तियों का व्यवस्थित अभिलेखीकरण किया जा रहा है। विशेषज्ञों की टीम प्रत्येक सुझाव का तकनीकी, विधिक और व्यावहारिक दृष्टिकोण से परीक्षण करेगी। उन्होंने कहा कि महायोजना का उद्देश्य केवल शहरी विस्तार नहीं, बल्कि नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार लाना भी है। इसलिए हर प्राप्त सुझाव को गंभीरता से लेते हुए अंतिम प्रारूप को अधिक प्रभावी और जनहितकारी बनाने का प्रयास किया जाएगा।


By Shashi Sharma

Shashi Sharma Working in journalism since 1985 as the first woman journalist of Uttarakhand. From 1989 for 36 years, she provided her strong services for India's top news agency PTI. Working for a long period of thirty-six years for PTI, he got her pen ironed on many important occasions, in which, by staying in Tehri for two months, positive reporting on Tehri Dam, which was in crisis of controversies, paved the way for construction with the power of her pen. Delivered.

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