लंदन से गूंजे एकत्व, सेवा और आध्यात्मिकता का दिव्य संदेश
पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी के 75वें वर्ष में प्रवेश के इस वर्ष में लंदन में विशेष आध्यात्मिक समागम
परम पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी, पूज्य साध्वी भगवती सरस्वती जी, पूज्य संत श्री त्रिलोचन दर्शन दास जी और पूज्य संतों का पावन सान्निध्य

लंदन। आज का युग तकनीक और डिजिटल माध्यमों से पूरी दुनिया को एक-दूसरे के अत्यंत निकट ले आया है, लेकिन वास्तविक जुड़ाव केवल तकनीक से नहीं, बल्कि प्रेम, करुणा, सेवा और आध्यात्मिकता से होता है। लंदन में एक विशेष आध्यात्मिक समागम आयोजित किया गया, जिसमें लंदन में रहने वाले एक हजार से अधिक भक्तों और विश्वभर से अनेक श्रद्धालुओं ने डिजिटल माध्यम से जुड़कर पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी, साध्वी भगवती सरस्वती जी और संतों के पावन सान्निध्य और आध्यात्मिक संदेशों को आत्मसात किया।

यह विशेष आयोजन परमार्थ पीठाधीश्वर, परम पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी के 75वें जन्मवर्ष को समर्पित किया। पूज्य स्वामी जी का जीवन आध्यात्मिक साधना के साथ-साथ मानवता, पर्यावरण संरक्षण, गंगा संरक्षण, सेवा, सद्भाव और विश्वशांति के लिए समर्पित है। उनके 75वें वर्ष में प्रवेश का यह अवसर सेवा, साधना और समर्पण से भरी उस जीवन-यात्रा का अभिनंदन है, जिसने भारत ही नहीं, बल्कि विश्व के अनेक देशों के श्रद्धालुओं को आध्यात्मिकता और सेवा से जोड़ा है।

इस विशेष अवसर पर परम पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी, पूज्य साध्वी भगवती सरस्वती जी, पूज्य संत श्री त्रिलोचन दर्शन दास जी, श्री राज राजेश्वर शास्त्री दास जी तथा अन्य पूज्य संत-महात्माओं का पावन सान्निध्य प्राप्त होगा।

समागम का मूल भाव है, दूरी चाहे कितनी भी हो, हृदयों को जोड़ने वाली शक्ति प्रेम और आध्यात्मिकता की है। डिजिटल युग में तकनीक हमारे लिए एक माध्यम बन सकती है, लेकिन उस माध्यम को सार्थक बनाती है हमारी भावना। जब तकनीक सेवा, सद्भाव, ज्ञान और आध्यात्मिक चेतना के प्रसार का माध्यम बनती है, तब वह मानवता को जोड़ने वाली शक्ति बन जाती है।

दुनिया के कोने में रहें, प्रवासी भारतीयों के हृदय में भारत कभी दूर नहीं होता। वह भारत की मिट्टी की सुगंध में, माँ की लोरी में, घर की पूजा में, दीपक की लौ में, त्योहारों की खुशियों में और संस्कारों की हर छोटी-सी परंपरा में जीवित रहता है। वे अपने बच्चों को हिंदी, भारतीय भाषाएँ, योग, संस्कृति, पर्व और परिवार के संस्कार देकर भारत से जोड़ते हैं। उनके घर भले ही विदेशों में हों, पर उनके हृदय में गंगा बहती है, मंदिरों की घंटियाँ गूंजती हैं और भारत की आत्मा धड़कती है। यही प्रवासी भारतीयों की सबसे सुंदर विरासत है।

पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि हमारी प्रगति केवल बाहरी विकास में नहीं, बल्कि भीतर के विकास में भी होती है। विज्ञान और तकनीक हमें बाहरी संसार से जोड़ सकते हैं, लेकिन ध्यान, प्रार्थना, सेवा और प्रेम हमें अपने भीतर से जोड़ते हैं। आज आवश्यकता है कि आधुनिक तकनीक के साथ प्राचीन ऋषि-परंपरा की चेतना का समन्वय हो और हमारी डिजिटल दुनिया करुणा, शांति तथा एकत्व की वाहक बने।

पूज्य स्वामी जी ने कहा कि “वसुधैव कुटुम्बकम्” जीवन जीने की दृष्टि है। जब हम अपने भीतर यह अनुभव करते हैं कि समस्त मानवता एक परिवार है, तब धर्म, भाषा, देश और संस्कृति की सीमाएँ हमें विभाजित नहीं करतीं, बल्कि विविधता में एकता का उत्सव बन जाती हैं। लंदन में आयोजित यह विशेष समागम इसी वैश्विक एकत्व की भावना को अभिव्यक्ति है।

पूज्य स्वामी जी के 75वें जन्मवर्ष का उत्सव हमें यह स्मरण कराता है कि जीवन की वास्तविक सार्थकता इस बात में नहीं कि हमने कितना प्राप्त किया, बल्कि इस बात में है कि हमने कितना बाँटा, कितनों में आशा जगाई, कितने हृदयों को प्रेम दिया और कितने लोगों के जीवन को सेवा से स्पर्श किया।
पूज्य साध्वी भगवती सरस्वती जी ने कहा कि आज विश्व को केवल ज्ञान, तकनीक या संसाधनों की ही आवश्यकता नहीं है बल्कि, विश्व को एक नई दृष्टि की आवश्यकता है, ऐसी दृष्टि, जिसमें हम स्वयं को प्रकृति से अलग नहीं, बल्कि उसका अभिन्न अंग मानें, धर्म को विभाजन नहीं, प्रेम और एकत्व का मार्ग समझें, और विकास को केवल भौतिक समृद्धि नहीं, बल्कि चेतना, करुणा और सेवा की समृद्धि मानें। सनातन की दृष्टि हमें संदेश देती है कि हम सब एक ही अस्तित्व की अभिव्यक्तियाँ हैं। जब हमारी सोच ‘मैं’ से ‘हम’ और ‘मेरे’ से ‘हमारे’ की ओर बढ़ेगी, तभी मानवता एक शांत, करुणामय और टिकाऊ भविष्य की ओर आगे बढ़ सकेगी।

यह अवसर एक आह्वान भी है, आइए, तकनीक को केवल सुविधा का माध्यम न बनाकर सद्भाव और सेवा का माध्यम बनाएं। अपने डिजिटल जीवन में भी करुणा, संयम, सत्य और सकारात्मकता को स्थान दें। अपने समय, प्रतिभा और संसाधनों का उपयोग समाज और प्रकृति के कल्याण के लिए करें।

पूज्य स्वामी जी के 74 वर्षों का यह उत्सव वास्तव में 74 वर्षों की साधना से निकली सेवा की सुगंध, करुणा की गंगा और एकत्व के संदेश का उत्सव है। आइए, दूरियाँ मिटाएँ, हृदय जोड़ें और तकनीक के माध्यम से भी प्रेम, सेवा एवं एकत्व की ज्योति जलाएँ।


By Shashi Sharma

Shashi Sharma – Senior Woman Journalist

Shashi Sharma has been active in journalism since 1985, holding the distinction of being Uttarakhand's first female journalist.

For 36 years, starting in 1989, she rendered distinguished service to India's premier news agency, PTI. During this long tenure, she demonstrated the power of her writing on numerous significant occasions; notably, she spent two months in Tehri reporting positively on the Tehri Dam—which was then mired in controversy—and used her pen to help pave the way for its construction.

Currently, Mrs. Shashi Sharma runs the news portal *Newsok24.com* and serves as the editor of the weekly newspaper *Desh Nirdesh*; she is also a registered anchor and commentator for Delhi Doordarshan.

शशि शर्मा वरिष्ठ महिला पत्रकार शशि शर्मा उत्तराखंड की पहली महिला पत्रकार के तौर पर 1985 से पत्रकारिता में कार्यरत हैं। 1989 से 36 वर्षों तक उन्होंने भारत की शीर्ष समाचार एजेंसी पीटीआई के लिए अपनी सशक्त सेवाएं दीं। छत्तीस वर्षों की लंबी अवधि तक पीटीआई के लिए काम करते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण मौकों पर अपनी कलम का लोहा मनवाया, जिसमें दो महीने तक टिहरी में रहकर विवादों के संकट में रहे टिहरी बांध पर सकारात्मक रिपोर्टिंग कर अपनी कलम की ताकत से निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया। वर्तमान में श्रीमती शशि शर्मा Newsok24 com न्यूज पोर्टल को चला रहीं हैं और साप्ताहिक समाचार पत्र देश निर्देश की सम्पादक होने के साथ ही दिल्ली दूरदर्शन की रजिस्टर्ड एंकर और कमेंटेटर भी हैं।

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