परमार्थ गंगा तट पर मानसून में गंगा की दिव्य धारा
प्रकृति, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का पावन संगम

ऋषिकेश, 22 अगस्त। मानसून का आगमन भारतीय सनातन संस्कृति में प्रकृति के पुनर्जागरण, जल की पवित्रता और जीवन के नवसंचार का उत्सव है। विशेषकर हिमालय की गोद में जब मेघ उमड़ते हैं, वर्षा की बूंदें धरती को स्पर्श करती हैं और माँ गंगा अपने पूर्ण वेग, विस्तार और ऊर्जा के साथ प्रवाहित होती हैं, तब पूरा गंगातट एक अद्भुत आध्यात्मिक अनुभूति से भर उठता है। ऐसा प्रतीत होता है मानो गंगा स्वयं कैलाश से भगवान शिव के चरणों को स्पर्श करती हुई धरती पर उतर आई हों।
भारतीय संस्कृति में माँ गंगा, माँ, मातृशक्ति, जीवनदायिनी और मोक्षदायिनी हैं। इसके पीछे हजारों वर्षों की वह सांस्कृतिक चेतना है, जिसने जल को जीवन, नदी को माता और प्रकृति को देवत्व का स्वरूप माना है।
मानसून में जब हिमालयी क्षेत्रों में वर्षा होती है और जलधाराएँ अपनी पूरी शक्ति के साथ मां गंगा में समाहित होती हैं, तब माँ गंगा का स्वरूप और भी विराट दिखाई देता है। उनकी लहरों का वेग, जल की निर्मलता, तटों पर हरियाली और आकाश में घिरे मेघ, सब मिलकर ऐसा दृश्य रचते हैं, मानो शिव और शक्ति, आकाश और धरती, तप और करुणा का दिव्य मिलन हमारे सामने साकार हो गया हो।
शिव की जटाओं से होकर मां गंगा की धारा पृथ्वी पर प्रवाहित हुई और मानवता के लिए जीवन तथा पवित्रता का अमृत लेकर आई। यही कारण है कि मां गंगा और शिव का संबंध भारतीय आध्यात्मिक चेतना में अत्यंत गहरा और अविच्छिन्न है। मानसून की मां गंगा को देखते हुए ऐसा लगता है मानो हिमालय की ऊँचाइयों से उतरकर माँ गंगा स्वयं हमें संदेश दे रही हों “जहाँ शिव हैं, वहीं शांति है; जहाँ गंगा हैं, वहीं जीवन है।”
मां गंगा की धारा हमें यह भी स्मरण कराती है कि प्रकृति में कुछ भी अलग-अलग नहीं है। आकाश से गिरने वाली वर्षा की बूंदें हिमालय की धरती को स्पर्श करती है, छोटी-छोटी जलधाराओं में बहती है और मां गंगा का हिस्सा बन जाती है। यही भारतीय दर्शन का संदेश है बूंद और सागर अलग नहीं; जीव और ब्रह्म अलग नहीं; प्रकृति और परमात्मा अलग नहीं।

मानसून इसलिए केवल वर्षा का मौसम नहीं, बल्कि जल के प्रति कृतज्ञता का अवसर भी है। वर्षा हमें जीवन देती है, नदियाँ उसे आगे ले जाती हैं और धरती उस जल को धारण कर अन्न, वनस्पति और समस्त जीव-जगत का पोषण करती है। जलचक्र प्रकृति की उस अद्भुत व्यवस्था का प्रतीक है, जिसमें देने, धारण करने और पुनः प्रवाहित करने की सतत प्रक्रिया चलती रहती है।
परमार्थ निकेतन में मानसून के दौरान गंगा का यह विराट स्वरूप साधना और सेवा की प्रेरणा को और गहरा करता है। प्रातःकाल की शांत गंगा हो या संध्या की दिव्य गंगा आरती, हर क्षण साधक को प्रकृति के प्रति श्रद्धा, जल के प्रति संवेदनशीलता और जीवन के प्रति कृतज्ञता का संदेश देता है।
आज आवश्यकता है कि हम गंगा के प्रति हमारी श्रद्धा तक ही सीमित न रहे, बल्कि गंगा संरक्षण और जल संरक्षण के संकल्प में परिवर्तित हो। यदि गंगा हमारी माँ हैं, तो उनकी निर्मलता की रक्षा करना हमारा धर्म और कर्तव्य दोनों है। नदियों में कचरा न डालना, प्लास्टिक का उपयोग कम करना, जलस्रोतों का संरक्षण करना, वृक्षारोपण करना और जल का विवेकपूर्ण उपयोग करना ये सभी गंगा सेवा के ही स्वरूप हैं।
मानसून हमें यह संदेश देता है कि प्रकृति जब देती है तो बिना भेदभाव के देती है। आइए, इस मानसून माँ गंगा के विराट स्वरूप का दर्शन करने के साथ-साथ एक संकल्प भी लें मां गंगा को निर्मलता भी दें; संरक्षण भी दें और अपनी जिम्मेदारी भी दें।


By Shashi Sharma

Shashi Sharma – Senior Woman Journalist

Shashi Sharma has been active in journalism since 1985, holding the distinction of being Uttarakhand's first female journalist.

For 36 years, starting in 1989, she rendered distinguished service to India's premier news agency, PTI. During this long tenure, she demonstrated the power of her writing on numerous significant occasions; notably, she spent two months in Tehri reporting positively on the Tehri Dam—which was then mired in controversy—and used her pen to help pave the way for its construction.

Currently, Mrs. Shashi Sharma runs the news portal *Newsok24.com* and serves as the editor of the weekly newspaper *Desh Nirdesh*; she is also a registered anchor and commentator for Delhi Doordarshan.

शशि शर्मा वरिष्ठ महिला पत्रकार शशि शर्मा उत्तराखंड की पहली महिला पत्रकार के तौर पर 1985 से पत्रकारिता में कार्यरत हैं। 1989 से 36 वर्षों तक उन्होंने भारत की शीर्ष समाचार एजेंसी पीटीआई के लिए अपनी सशक्त सेवाएं दीं। छत्तीस वर्षों की लंबी अवधि तक पीटीआई के लिए काम करते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण मौकों पर अपनी कलम का लोहा मनवाया, जिसमें दो महीने तक टिहरी में रहकर विवादों के संकट में रहे टिहरी बांध पर सकारात्मक रिपोर्टिंग कर अपनी कलम की ताकत से निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया। वर्तमान में श्रीमती शशि शर्मा Newsok24 com न्यूज पोर्टल को चला रहीं हैं और साप्ताहिक समाचार पत्र देश निर्देश की सम्पादक होने के साथ ही दिल्ली दूरदर्शन की रजिस्टर्ड एंकर और कमेंटेटर भी हैं।

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