मासिक मानस कथा का दिव्य, अलौकिक, अद्भुत शुभारम्भ
माँ गंगा के पावन तट, परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश में परम पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी, पूज्य साध्वी भगवती सरस्वती जी के पावन सान्निध्य एवं आशीर्वाद से कथा व्यास संत श्री मुरलीधर जी महाराज के श्रीमुख से दिव्य मानस कथा का अमृतमयी प्रवाह प्रवाहित
पूज्य स्वामी सदानन्द जी महाराज को अर्पित की भावभीनी श्रद्धांजलि
मानस कथा के शुभारम्भ अवसर पर पूज्य स्वामीजी ने श्री दैवी सम्पद् मण्डल के पूज्य संत महामण्डलेश्वर स्वामी शुकदेवानन्द जी महाराज, स्वामी सदानन्द जी महाराज और पूरी संत परम्परा को किया नमन
पूज्य संतों व यजमान परिवार ने दीप प्रज्वलित कर 34 दिवसीय मानस कथा का किया शंखनाद
चौरासी के चक्र को काटने वाली चौतीस दिनों की कथा-मानस कथा शुभारम्भ
मातृभूमि की स्वतंत्रता और गौरव की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व अर्पित करने वाले अमर क्रांतिकारी सुखदेव की जयंती पर परमार्थ निकेतन से विनम्र श्रद्धांजलि
दिव्य मानस कथा के पावन अवसर पर परम पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने माननीय प्रधानमंत्री श्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा देशवासियों से की गई 7 प्रमुख अपीलों को जन-जागरण का माध्यम बताते हुए सभी श्रद्धालुओं को राष्ट्रहित, पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण हेतु भावपूर्ण संकल्प कराया
मानस कथा में उपस्थित श्रद्धालुओं को भावपूर्वक संकल्प कराया गया कि वे अनावश्यक संसाधनों के उपयोग से बचेंगे, स्वदेशी उत्पादों को अपनायेंगे, ईंधन की बचत करेंगे तथा अपने एसी का तापमान 24 से 26 डिग्री के मध्य रखकर ऊर्जा संरक्षण में योगदान देंगे। साथ ही पब्लिक ट्रांसपोर्ट, वर्क फ्रॉम होम और कार पूलिंग को बढ़ावा देंगे तथा प्राकृतिक खेती और पर्यावरण संरक्षण को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनायेंगे

राष्ट्र, प्रकृति और मानवता के प्रति अपने कर्तव्यों का पालन करना भी ईश्वर सेवा
स्वामी चिदानन्द सरस्वती

ऋषिकेश, 15 मई। हिमालय की गोद में विराजित, माँ गंगा के निर्मल तट पर स्थित परमार्थ निकेतन में मासिक श्रीरामचरितमानस कथा का शुभारम्भ हुआ। परम पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी एवं पूज्य साध्वी भगवती सरस्वती जी के पावन सान्निध्य और आशीर्वाद से कथा व्यास संत श्री मुरलीधर जी महाराज के श्रीमुख से मानस कथा का अमृतमय प्रवाह प्रवाहित हुआ।

पूज्य संतों एवं यजमान परिवार द्वारा 34 दिवसीय मानस कथा का शंखनाद दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। सम्पूर्ण वातावरण शंखध्वनि, वेदमंत्रों और रामनाम से गुंजायमान हो उठा।

पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने अपने आशीर्वचनों में कहा कि मानस कथा जीवन से भागना नहीं, बल्कि जीवन में रहते हुए जीवन के बंधनों से मुक्त होना सिखाती है। उन्होंने कहा कि जब मनुष्य ‘मैं’ से ‘हम’ की यात्रा पर निकल पड़ता है, वहीं से जीवन में मानस आरम्भ हो जाती है। यही कथा हमें स्मरण कराती है कि हमारा अस्तित्व अकेला नहीं, बल्कि ईश्वर, प्रकृति और समस्त सृष्टि से जुड़ा हुआ है।

उन्होंने अन्तर्राष्ट्रीय परिवार दिवस के अवसर पर कहा कि सम्पूर्ण विश्व को एक परिवार के रूप में देखना ही सनातन संस्कृति का शाश्वत संदेश है। “वसुधैव कुटुम्बकम्” केवल एक मंत्र नहीं, बल्कि मानवता को जोड़ने वाली दिव्य चेतना है, जो हजारों वर्षों से वन अर्थ, वन फैमिली और वन फ्यूचर के भाव को साकार करती आ रही है। सनातन संस्कृति हमें सिखाती है कि समस्त सृष्टि एक ही परमात्मा की संतान है, इसलिए प्रेम, करुणा, सहअस्तित्व और आत्मीयता ही मानव जीवन का वास्तविक आधार हैं।

पूज्य स्वामीजी ने श्री दैवी सम्पद् मण्डल की गौरवशाली संत परम्परा, पूज्य महामण्डलेश्वर स्वामी शुकदेवानन्द जी महाराज, पूज्य स्वामी सदानन्द जी महाराज को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि संत शरीर से दूर हो सकते हैं, परन्तु उनकी चेतना सदैव मार्गदर्शन करती रहती है। उनकी तपस्या आज भी इस भूमि को पावन बना रही है।

कथा व्यास संत श्री मुरलीधर जी महाराज ने कहा कि परमार्थ निकेतन वह धरा है जहाँ जल प्रवाह रूपी गंगा और वाणी प्रवाह रूपी गंगा दोनों का संगम होता है। यहाँ केवल कथा नहीं सुनाई जाती, यहाँ आत्मा को उसकी दिशा मिलती है। कथा जीवन के सारे दुःखों को दूर कर आनंद प्रदान कराती है।

पूज्य साध्वी भगवती सरस्वती जी ने अत्यंत भावपूर्ण शब्दों में कहा कि माँ गंगा के तट पर 34 दिनों तक कथा श्रवण करने का अवसर मिलना केवल संयोग नहीं, बल्कि ईश्वर की विशेष कृपा है। उन्होंने कहा कि ऋषिकेश बुलावे से आया जाने वाला तीर्थ है। यहाँ की हवा में मंत्रों की सुगंध है, यहाँ की मिट्टी में ऋषियों की तपस्या है, यहाँ बैठना ही ध्यान है और यहाँ बहती माँ गंगा स्वयं मोक्ष का मार्ग है।

पूज्य स्वामीजी ने यजमान श्री शंकर कुलरिया जी, श्रीमती पार्वती कुलरिया जी, पुत्री मनीषा कुलरिया एवं राजस्थान सहित देशभर से आये श्रद्धालुओं का अभिनन्दन करते हुए कहा कि जब भक्तिभाव से परिवार जुड़ता है तो वह केवल परिवार नहीं रहता, वह तीर्थ बन जाता है।इस शुभ अवसर पर पूज्य स्वामीजी एवं पूज्य साध्वी जी ने संत श्री मुरलीधर जी महाराज एवं माँ मीना माता जी को रुद्राक्ष का पौधा भेंट कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। यह आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित आशीर्वाद है। इसी के साथ पर्यावरण को समर्पित 34 दिवसीय मानस कथा का दिव्य शंखनाद हुआ।

By Shashi Sharma

Shashi Sharma – Senior Woman Journalist

Shashi Sharma has been active in journalism since 1985, holding the distinction of being Uttarakhand's first female journalist.

For 36 years, starting in 1989, she rendered distinguished service to India's premier news agency, PTI. During this long tenure, she demonstrated the power of her writing on numerous significant occasions; notably, she spent two months in Tehri reporting positively on the Tehri Dam—which was then mired in controversy—and used her pen to help pave the way for its construction.

Currently, Mrs. Shashi Sharma runs the news portal *Newsok24.com* and serves as the editor of the weekly newspaper *Desh Nirdesh*; she is also a registered anchor and commentator for Delhi Doordarshan.

शशि शर्मा वरिष्ठ महिला पत्रकार शशि शर्मा उत्तराखंड की पहली महिला पत्रकार के तौर पर 1985 से पत्रकारिता में कार्यरत हैं। 1989 से 36 वर्षों तक उन्होंने भारत की शीर्ष समाचार एजेंसी पीटीआई के लिए अपनी सशक्त सेवाएं दीं। छत्तीस वर्षों की लंबी अवधि तक पीटीआई के लिए काम करते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण मौकों पर अपनी कलम का लोहा मनवाया, जिसमें दो महीने तक टिहरी में रहकर विवादों के संकट में रहे टिहरी बांध पर सकारात्मक रिपोर्टिंग कर अपनी कलम की ताकत से निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया। वर्तमान में श्रीमती शशि शर्मा Newsok24 com न्यूज पोर्टल को चला रहीं हैं और साप्ताहिक समाचार पत्र देश निर्देश की सम्पादक होने के साथ ही दिल्ली दूरदर्शन की रजिस्टर्ड एंकर और कमेंटेटर भी हैं।

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