धरती आबा बिरसा मुंडा जी, स्वाभिमान, सांस्कृतिक चेतना और जनजातीय अस्मिता के अमर प्रतीक
बिरसा मुंडा जी के बलिदान दिवस पर अर्पित की परमार्थ गंगा आरती
💦जल, जंगल और जमीन केवल संसाधन नहीं थे, बल्कि जीवन, अस्तित्व और पहचान के आधार
🙏🏻स्वामी चिदानन्द सरस्वती
ऋषिकेश, 9 जून। धरती आबा बिरसा मुंडा भारतीय इतिहास के उन युगपुरुषों में से हैं, जिनका जीवन आत्मगौरव, सांस्कृतिक चेतना, आध्यात्मिक जागरण और जनजातीय स्वाभिमान का जीवंत घोष है। वे जल, जंगल, जमीन और जनजातीय अस्मिता के ऐसे चेतन प्रहरी थे, जिन्होंने अपने अल्पायु जीवन में अन्याय, शोषण और दमन के विरुद्ध संघर्ष का ऐसा अध्याय लिखा, जो आज भी करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणास्रोत बना हुआ है।

बिरसा मुंडा का उदय ऐसे समय में हुआ, जब जनजातीय समाज आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक शोषण के कठिन दौर से गुजर रहा था। विदेशी शासन, अन्यायपूर्ण व्यवस्थाएं और सामाजिक विघटन ने लोगों के जीवन में निराशा का अंधकार फैला दिया था। ऐसे समय में बिरसा मुंडा आशा, आत्मविश्वास और जागरण के दीप बनकर प्रकट हुए। उन्होंने केवल संघर्ष का आह्वान नहीं किया, बल्कि अपने समाज को उसकी सांस्कृतिक जड़ों, आध्यात्मिक शक्ति और सामुदायिक गौरव का बोध कराया।

बिरसा मुंडा का प्रसिद्ध “उलगुलान” केवल एक राजनीतिक विद्रोह नहीं था। वह अन्याय के विरुद्ध स्वाभिमान की उद्घोषणा, अधिकारों की रक्षा का संकल्प और सांस्कृतिक अस्मिता के संरक्षण का महाअभियान था। उन्होंने अपने लोगों को यह विश्वास दिलाया कि वे केवल शोषण के शिकार नहीं हैं, बल्कि अपनी नियति को बदलने की शक्ति भी रखते हैं। उनके नेतृत्व ने जनजातीय समाज में आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता की नई चेतना का संचार किया।

पूज्य स्वामी जी ने कहा कि उनमें संत की करुणा, ऋषि की दूरदृष्टि और योद्धा का अदम्य साहस एक साथ विद्यमान था। उनकी वाणी में जागरण की शक्ति थी, उनके विचारों में परिवर्तन का संकल्प था और उनके जीवन में त्याग एवं समर्पण का अनुपम आदर्श दिखाई देता था। उन्होंने यह सिद्ध कर दिया कि इतिहास केवल संसाधनों से नहीं, बल्कि दृढ़ संकल्प, सत्यनिष्ठा और जनकल्याण की भावना से रचा जाता है।

बिरसा मुंडा ने प्रकृति और संस्कृति के बीच गहरे संबंध को समझा और उसे अपने संघर्ष का आधार बनाया। उनके लिए जल, जंगल और जमीन केवल संसाधन नहीं थे, बल्कि जीवन, अस्तित्व और पहचान के आधार थे। उनका संघर्ष पर्यावरणीय संतुलन, सांस्कृतिक संरक्षण और मानवीय गरिमा की रक्षा का संघर्ष था। आज जब विश्व पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की बात कर रहा है, तब बिरसा मुंडा के विचार और अधिक प्रासंगिक प्रतीत होते हैं।

उनका जीवन हमें संदेश देता है कि अपनी संस्कृति, परंपराओं और मूल्यों के प्रति आस्था बनाए रखते हुए आधुनिक चुनौतियों का सामना किया जा सकता है। उन्होंने समाज को यह संदेश दिया कि अपनी पहचान को सुरक्षित रखना केवल अधिकार नहीं, बल्कि एक पवित्र दायित्व भी है।
पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि धरती आबा बिरसा मुंडा उस अमर चेतना का नाम हैं, जो हर युग में अन्याय के विरुद्ध खड़ी होती है और सत्य, स्वाभिमान तथा स्वतंत्रता का मार्ग प्रशस्त करती है। वे भारत की उस अनश्वर आत्मा के प्रतीक हैं, जो परिस्थितियों से नहीं झुकती, बल्कि अपने साहस, संकल्प और संस्कारों से इतिहास की दिशा बदल देती है।

बिरसा मुंडा कोई व्यक्ति मात्र नहीं, बल्कि एक विचार हैं, एक ऐसी ज्योति हैं जो अन्याय के अंधकार में भी स्वाभिमान, आत्मबल और स्वतंत्रता का प्रकाश फैलाती है। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा, चेतना और राष्ट्रनिर्माण का अमूल्य मार्गदर्शन है।


By Shashi Sharma

Shashi Sharma – Senior Woman Journalist

Shashi Sharma has been active in journalism since 1985, holding the distinction of being Uttarakhand's first female journalist.

For 36 years, starting in 1989, she rendered distinguished service to India's premier news agency, PTI. During this long tenure, she demonstrated the power of her writing on numerous significant occasions; notably, she spent two months in Tehri reporting positively on the Tehri Dam—which was then mired in controversy—and used her pen to help pave the way for its construction.

Currently, Mrs. Shashi Sharma runs the news portal *Newsok24.com* and serves as the editor of the weekly newspaper *Desh Nirdesh*; she is also a registered anchor and commentator for Delhi Doordarshan.

शशि शर्मा वरिष्ठ महिला पत्रकार शशि शर्मा उत्तराखंड की पहली महिला पत्रकार के तौर पर 1985 से पत्रकारिता में कार्यरत हैं। 1989 से 36 वर्षों तक उन्होंने भारत की शीर्ष समाचार एजेंसी पीटीआई के लिए अपनी सशक्त सेवाएं दीं। छत्तीस वर्षों की लंबी अवधि तक पीटीआई के लिए काम करते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण मौकों पर अपनी कलम का लोहा मनवाया, जिसमें दो महीने तक टिहरी में रहकर विवादों के संकट में रहे टिहरी बांध पर सकारात्मक रिपोर्टिंग कर अपनी कलम की ताकत से निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया। वर्तमान में श्रीमती शशि शर्मा Newsok24 com न्यूज पोर्टल को चला रहीं हैं और साप्ताहिक समाचार पत्र देश निर्देश की सम्पादक होने के साथ ही दिल्ली दूरदर्शन की रजिस्टर्ड एंकर और कमेंटेटर भी हैं।

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