कल्पना की उडानः गांव की बेकरी बनी महिलाओं की ताकत

रीप परियोजना से बदली तस्वीर, महिला उद्यमिता की नई मिसाल

पारंपरिक मिलेट्स स्वाद से लाखों का कारोबार, बेकरी यूनिट बनी सफलता का मॉडल

38वें राष्ट्रीय खेलों में स्वाभिमान बेकरी की रही शानदार सफलता

सालाना 40 लाख का कारोबार, 9 महिलाओं का मिला आत्मनिर्भरता का सहारा

देहरादून से टिहरी-उत्तरकाशी तक पहुंचा स्वाभिमान बेकरी का स्वाद,

मुख्यमंत्री ने सराहा महिला समूह का उत्कृष्ट कार्य, वर्ष 2021 में प्रदान की थी 5 लाख की सहायता

महिला समूहों के लिए रोल मॉडल बन रही स्वाभिमान बेकरी यूनिट- जिला परियोजना प्रबंधक

देहरादून , राजधानी देहरादून की एक महिला उद्यमी आज प्रदेशभर की महिलाओं के लिए प्रेरणा बनकर उभरी हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की जनकल्याणकारी योजनाओं और ग्रामोत्थान (रीप) परियोजना के सहयोग से विकासखंड विकासनगर की ग्राम सोरना डोभरी निवासी कल्पना बिष्ट ने अपने सपनों को नई उड़ान देते हुए “स्वाभिमान महिला बेकरी यूनिट” की स्थापना की। आज यह यूनिट न केवल स्थानीय महिलाओं को रोजगार दे रही है, बल्कि मिलेट्स और पारंपरिक उत्पादों के माध्यम से बाजार में अपनी अलग पहचान भी बना चुकी है।

कल्पना बिष्ट कई वर्षों से स्वाभिमान महिला क्लस्टर लेवल फेडरेशन (सीएलएफ) स्वायत्त सहकारिता से जुड़ी हुई हैं। वर्ष 2024-25 में उन्होंने ग्रामोत्थान (रीप) परियोजना के सहयोग से लगभग 10 लाख रुपये की लागत से बेकरी यूनिट स्थापित की। इसमें रीप परियोजना से 6 लाख रुपये की सहायता, 7 प्रतिशत ब्याज दर पर 3 लाख रुपये का बैंक ऋण तथा 1 लाख रुपये का स्वयं का अंशदान शामिल है। आज यह यूनिट सालाना लगभग 40 लाख रुपये का कारोबार कर रही है। साथ ही इस पहल ने स्थानीय स्तर पर 9 महिलाओं को रोजगार देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर भी प्रदान किया है।

पारंपरिक स्वाद को मिला आधुनिक पहचान
स्वाभिमान महिला बेकरी यूनिट में मिलेट्स और स्थानीय अनाजों से कई प्रीमियम उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इनमें मिल्क रस, गोलगप्पे, मांडवे के बिस्कुट, गुड़-मक्खन बिस्कुट, शहद से बने हनी ओट्स बिस्कुट सहित अनेक पारंपरिक उत्पाद शामिल हैं। स्थानीय स्वाद और पौष्टिकता के कारण इन उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है। यूनिट के कई उत्पाद, जैसे मक्खन बिस्कुट, मिल्क रस और गुड़ की चॉकलेट कैंडी, “हाउस ऑफ हिमालय” में भी अपनी विशेष पहचान बना चुके हैं। इसके अतिरिक्त कल्पना बिष्ट पहाड़ी दालों और कच्ची घानी के सरसों के तेल का व्यवसाय भी कर रही हैं। चकराता की राजमा, तुअर एवं मसूर दाल जैसे स्थानीय उत्पाद भी उनके व्यवसाय का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं।

राष्ट्रीय खेलों में भी मिली बड़ी सफलता
38वें राष्ट्रीय खेलों के दौरान स्वाभिमान महिला बेकरी यूनिट ने एनआरएलएम के माध्यम से विभिन्न राज्यों से आए खिलाड़ियों को मिलेट्स आधारित उत्पादों का स्वाद चखाया। इस दौरान यूनिट ने 27 क्विंटल गुड़-मक्खन, मांडवे, झंगोरे और शहद से बने बिस्कुटों की बिक्री कर लगभग 10 लाख रुपये की आय अर्जित की। हाल ही में आयोजित वसंत उत्सव में भी लोक भवन में लगाए गए स्टॉलों के माध्यम से यूनिट को अच्छा लाभ प्राप्त हुआ।

अब उत्तरकाशी और टिहरी तक पहुंच
शुरुआत में यह यूनिट केवल प्रेमनगर, सेलाकुई, सहसपुर, हरबर्टपुर, विकासनगर, कालसी और देहरादून तक सीमित थी, लेकिन अब इसके उत्पाद उत्तरकाशी और टिहरी तक सीधे पहुंच रहे हैं। प्रत्येक सप्ताह इन जनपदों से मिल्क रस और मांडवे के बिस्कुट जैसे उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है। उत्पादों की सप्लाई को सुगम बनाने के लिए स्वाभिमान महिला क्लस्टर लेवल फेडरेशन की सहायता से शून्य प्रतिशत ब्याज पर एक इको वैन भी खरीदी गई है, जिससे अब दूरस्थ बाजारों तक आसानी से उत्पाद पहुंचाए जा रहे हैं।

फैशन डिजाइनिंग का हुनर बना पहचान
कल्पना बिष्ट ने अपने फैशन डिजाइनिंग के हुनर को भी इस व्यवसाय में प्रभावी ढंग से उपयोग किया है। बेकरी उत्पादों की आकर्षक और प्रीमियम पैकेजिंग स्वयं कल्पना तैयार करती हैं, जिससे उत्पादों की प्रस्तुति ग्राहकों को काफी पसंद आ रही है।

मुख्यमंत्री कर चुके हैं सम्मानित
कल्पना बिष्ट ने बताया कि वर्ष 2021 में स्वाभिमान महिला समूह के उत्कृष्ट कार्यों को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने समूह को 5 लाख रुपये की धनराशि प्रदान की थी। इस राशि का उपयोग समूह ने बेकरी यूनिट की मार्केटिंग और पैकेजिंग को मजबूत बनाने में किया।

महिलाओं के लिए बन रही प्रेरणा
जिला परियोजना प्रबंधक सोनम गुप्ता ने बताया कि स्वाभिमान महिला बेकरी यूनिट आज प्रोफेशनल और स्वच्छ तरीके से कार्य कर रही है तथा इसके उत्पादों की बाजार में अच्छी मांग है। उन्होंने कहा कि इस मॉडल की सफलता को देखते हुए अन्य विकासखंडों में भी ऐसी यूनिट स्थापित की जाएंगी, ताकि अधिक से अधिक महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकें।

राज्य सरकारी की योजनाओं से प्रेरित होकर कल्पना बिष्ट की यह पहल न केवल उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को रोजगार, सम्मान और आत्मनिर्भरता की नई राह भी दिखा रही है।

By Shashi Sharma

Shashi Sharma Working in journalism since 1985 as the first woman journalist of Uttarakhand. From 1989 for 36 years, she provided her strong services for India's top news agency PTI. Working for a long period of thirty-six years for PTI, he got her pen ironed on many important occasions, in which, by staying in Tehri for two months, positive reporting on Tehri Dam, which was in crisis of controversies, paved the way for construction with the power of her pen. Delivered.

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