परमार्थ पीठाधीश्वर, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी का लेह में प्रथम सिंधु कुंभ एवं 30वीं सिंधु दर्शन यात्रा में पावन सान्निध्य
🌼156 देशों के पवित्र जल से हुआ ऐतिहासिक सिंधु जलाभिषेक, विश्व शांति एवं ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ का दिया संदेश
💥लेह की धरती स्नेह की धरती
स्वामी चिदानन्द सरस्वती

लेह, लद्दाख। भारत की सांस्कृतिक चेतना, आध्यात्मिक परंपरा, राष्ट्रीय एकात्मता तथा वैश्विक सद्भाव के अद्वितीय संगम के रूप में प्रथम सिंधु कुंभ एवं 30वीं सिंधु दर्शन यात्रा का लेह स्थित ऐतिहासिक सिंधु दर्शन घाट पर भव्य शुभारंभ हुआ। भारत की सनातन विरासत को विश्व समुदाय के समक्ष नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने वाले इस ऐतिहासिक आयोजन का उद्घाटन लद्दाख के माननीय उपराज्यपाल श्री विनय कुमार सक्सेना ने किया।
इस पावन अवसर पर परमार्थ पीठाधीश्वर, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक श्री इन्द्रेश कुमार, स्वामी यतिन्द्रानन्द सरस्वती जी, अनेक देशों के राजदूत, पूज्य संत और अनेक विशिष्ट अतिथि उपस्थित थे।
इस अवसर पर लगभग 2,800 श्रद्धालुओं, देश-विदेश के पूज्य संत-महात्माओं, विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों, आठ देशों के राजदूतों, अनेक विदेशी अतिथियों, जनप्रतिनिधियों तथा विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिष्ठित हस्तियों की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया।
समारोह का शुभारंभ पुलिस बैंड के साथ ध्वजारोहण एवं राष्ट्रगान से हुआ। तत्पश्चात माननीय उपराज्यपाल द्वारा विधिवत सिंधु कुंभ महोत्सव का उद्घाटन किया गया। मातृशक्ति द्वारा पारंपरिक कलश यात्रा एवं कलश पूजन ने भारतीय संस्कृति की दिव्यता और नारी शक्ति की गौरवशाली परंपरा का अनुपम दर्शन कराया। तिरंगा वंदन के साथ वातावरण राष्ट्रभक्ति एवं सांस्कृतिक चेतना से ओत-प्रोत हो उठा।
कार्यक्रम का सबसे ऐतिहासिक एवं विशेष अवसर था जब 156 देशों से एकत्रित पवित्र जल द्वारा सिंधु नदी का जलाभिषेक किया। विश्व के विभिन्न देशों से लाए गए पवित्र जल का सिंधु नदी में समर्पण केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानवता के लिए शांति, सद्भाव, सह-अस्तित्व और वैश्विक एकता का सशक्त संदेश है। यह आयोजन भारतीय दर्शन ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना को मूर्त रूप देने वाला ऐतिहासिक क्षण है। इसके उपरांत भगवान बुद्ध की प्रतिमा पर विशेष पूजन-अर्चन किया।
अपने उद्घाटन संबोधन में माननीय उपराज्यपाल श्री विनय कुमार सक्सेना ने कहा कि सिंधु नदी केवल एक जलधारा नहीं, बल्कि भारत की सभ्यता, संस्कृति और राष्ट्रीय अस्मिता की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि सिंधु कुंभ भारत की सांस्कृतिक विरासत को विश्व मंच पर स्थापित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है तथा यह आयोजन आने वाली पीढ़ियों को अपनी ऐतिहासिक जड़ों से जोड़ने का प्रेरणादायी प्रयास है।
परमार्थ पीठाधीश्वर, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि सिंधु दर्शन केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि भारत की आत्मा, आस्था और अस्मिता से जुड़ने का दिव्य अवसर है। इसी पावन धरती ने हमारी सभ्यता, संस्कृति और सनातन मूल्यों को युगों-युगों तक सुरक्षित रखा है। सिंधु के तट पर पहुँचकर यह अनुभूति होती है कि हमारी पहचान केवल वर्तमान से नहीं, बल्कि हजारों वर्षों की उस गौरवशाली परंपरा से है जिसने विश्व को ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ के मंत्र दिये।
पूज्य स्वामी जी ने कहा कि सिंधु दर्शन की यात्रा का अर्थ है, हमारे अतीत की यात्रा, अपने भविष्य की यात्रा तथा अपनी संस्कृति और संस्कारों की यात्रा। यह वह सभ्यता है, जिसने हजारों वर्षों से हमारी जड़ों, मूल और मूल्यों को समेटे हुए रखा है।यह यात्रा हमारे अतीत को नमन करने के साथ-साथ भविष्य के प्रति हमारे संकल्प को भी सुदृढ़ करती है। यह हमें अपनी जड़ों से जोड़ती है और स्मरण कराती है कि परिस्थितियों ने भले ही बहुत कुछ हमसे छीन लिया हो, पर हमारी संस्कृति, हमारी श्रद्धा, हमारी चेतना और हमारी सनातन विरासत आज भी अक्षुण्ण है। इसलिए यह भाव हमारे हृदय में सदैव जीवित रहना चाहिए कि जो हमने खोया उसका ग़म नहीं, पर जो बचा है वह भी किसी से कम नहीं। यही विश्वास भारत की अमर शक्ति और आत्मगौरव का आधार है।
पूज्य स्वामी जी ने कहा कि जब पिछली बार यहाँ आए थे, तब यहाँ तीन सौ लोग थे और इस बार तीन हजार श्रद्धालु हैं। अगली बार जब यहाँ अर्द्धकुंभ या कुंभ का आयोजन किया जाए, तो कम से कम तीस हजार लोग हों, पूरा भारत यहाँ उपस्थित हो।

पूज्य स्वामी जी ने लद्दाखवासियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सदियों से उन्होंने इस धरती को संभालकर रखा है। यहाँ की पवित्रता और दिव्यता को सुरक्षित रखा है। हम यहाँ के लोगों के प्रति कृतज्ञ हैं, जिन्होंने इतनी कठिन परिस्थितियों में भी सब कुछ संभालकर रखा है। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने जो विकास की यात्रा शुरू की है, वह अद्भुत है। उसका दृश्य पूरे भारत में स्पष्ट दिखाई दे रहा है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक श्री इन्द्रेश कुमार जी ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि सिंधु भारत की आत्मा का प्रतीक है। उन्होंने सिंधु सभ्यता, सनातन संस्कृति, राष्ट्रीय एकात्मता एवं विश्व बंधुत्व के मूल्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत सदैव विश्व को शांति, करुणा और सह-अस्तित्व का मार्ग दिखाता रहा है। उन्होंने सभी उपस्थित जनों से सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण तथा राष्ट्रीय एकता को और अधिक सशक्त बनाने का आह्वान किया।
समारोह के दौरान लेह के मुख्य कार्यकारी पार्षद ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। इस अवसर पर विभिन्न देशों के राजदूत, परम पूज्य रिम्पोछे, दिल्ली विधानसभा के माननीय अध्यक्ष तथा अन्य विशिष्ट अतिथियों का औपचारिक अभिनंदन किया गया।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने समारोह की गरिमा को और अधिक बढ़ाया। लद्दाख के पारंपरिक लोकनृत्यों, लोकसंगीत, भारतीय शास्त्रीय एवं लोक कलाओं तथा देश के विभिन्न राज्यों के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने भारत की ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को जीवंत कर दिया। विविधता में एकता की यह अनुपम झलक उपस्थित सभी देशी-विदेशी अतिथियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रही।
सिंधु कुंभ महोत्सव भारत की प्राचीन सांस्कृतिक चेतना, राष्ट्रीय एकता, आध्यात्मिक विरासत और वैश्विक मैत्री का विराट उत्सव है। यह आयोजन इस सत्य को पुनः स्थापित करता है कि भारत की सनातन संस्कृति सम्पूर्ण मानवता के कल्याण, विश्व शांति और सार्वभौमिक भाईचारे की वाहक रही है।
लेह में प्रारंभ हुआ यह पाँच दिवसीय सिंधु कुंभ महोत्सव विभिन्न आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं राष्ट्रीय कार्यक्रमों के माध्यम से सिंधु सभ्यता की गौरवशाली परंपरा, भारत की सांस्कृतिक धरोहर तथा विश्व शांति के संदेश को जन-जन तक पहुँचाएगा। आयोजन से लद्दाख को सांस्कृतिक पर्यटन, राष्ट्रीय एकात्मता तथा अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक संवाद के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में नई पहचान मिलने की भी अपेक्षा है। इस कार्यक्रम के संयोजक डॉ. विजय जॉली जी और महासचिव, श्री भूपेन्द्र कंसल जी का विशेष योगदान करा।


By Shashi Sharma

Shashi Sharma – Senior Woman Journalist

Shashi Sharma has been active in journalism since 1985, holding the distinction of being Uttarakhand's first female journalist.

For 36 years, starting in 1989, she rendered distinguished service to India's premier news agency, PTI. During this long tenure, she demonstrated the power of her writing on numerous significant occasions; notably, she spent two months in Tehri reporting positively on the Tehri Dam—which was then mired in controversy—and used her pen to help pave the way for its construction.

Currently, Mrs. Shashi Sharma runs the news portal *Newsok24.com* and serves as the editor of the weekly newspaper *Desh Nirdesh*; she is also a registered anchor and commentator for Delhi Doordarshan.

शशि शर्मा वरिष्ठ महिला पत्रकार शशि शर्मा उत्तराखंड की पहली महिला पत्रकार के तौर पर 1985 से पत्रकारिता में कार्यरत हैं। 1989 से 36 वर्षों तक उन्होंने भारत की शीर्ष समाचार एजेंसी पीटीआई के लिए अपनी सशक्त सेवाएं दीं। छत्तीस वर्षों की लंबी अवधि तक पीटीआई के लिए काम करते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण मौकों पर अपनी कलम का लोहा मनवाया, जिसमें दो महीने तक टिहरी में रहकर विवादों के संकट में रहे टिहरी बांध पर सकारात्मक रिपोर्टिंग कर अपनी कलम की ताकत से निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया। वर्तमान में श्रीमती शशि शर्मा Newsok24 com न्यूज पोर्टल को चला रहीं हैं और साप्ताहिक समाचार पत्र देश निर्देश की सम्पादक होने के साथ ही दिल्ली दूरदर्शन की रजिस्टर्ड एंकर और कमेंटेटर भी हैं।

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