Oplus_16908288

International shooter Jaspal Rana, भारत में निशाने बाजी को खुमार की हदों तक लोक प्रिय खेल बनाने वाले अंतरराष्ट्रीय निशानेबाज जसपाल राणा नहीं रहे।

International shooter Jaspal Rana, who made shooting a popular sport in India to the extent of craze, is no more.

छोटी सी उम्र में कहा दुनिया को अलविदा पिता नारायण सिंह राणा सहित परिवार पर दुखों का पहाड़।

International shooter Jaspal Rana, भारत में निशाने बाजी को खुमार की हदों तक लोक प्रिय खेल बनाने वाले अंतरराष्ट्रीय निशानेबाज जसपाल राणा ने 11जून 2026 की देर रात दुनिया को अलविदा कह दिया।

मात्र 49 वर्ष की आयु में गोल्डन बॉय जसपाल राणा के असमय निधन से सम्पूर्ण भारत सहित उत्तराखंड खेल जगत में गहरा शोक और दुख व्याप्त हो गया है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन करने वाले राणा, जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित आईएसएसएफ विश्व कप से अपने दल के साथ भारत लौटते हुए उड़ान के दौरान ही अस्वस्थ हो गए थे रास्ते में ही उन्हें एक चिकित्सा प्रक्रिया से गुजरना पड़ा था।

जसपाल राणा का स्वास्थ्य ज़्यादा खराब होने के कारण उन्हें नयी दिल्ली में उतरते ही उन्हें दिल्ली साकेत स्थित मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां हार्ट अटैक के कारण उन्हें स्टट डाले गए थे।

वर्तमान में हाई-परफॉर्मेंस कोच के रूप में स्थापित जसपाल राणा का जन्म 28जून 1976 को श्यामा राणा और नारायण सिंह राणा के घर टिहरी जिले के नैनबाग चिलामू गांव में हुआ था।

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की एसपीजी में सुरक्षा अधिकारी के तौर पर कार्यरत नारायण सिंह राणा ने राहुल गांधी और जसपाल राणा को साथ साथ शूटिंग की बेसिक ट्रेनिंग दी थी जिसे होनहार बेटे जसपाल राणा ने अपना ही नहीं देश का जनून बना कर देश को कई समानों से जगमग किया।
जसपाल राणा ने 1994 के हिरोशिमा एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीता था, राष्ट्रमंडल खेलों में शानदार प्रदर्शन, राष्ट्रमंडल खेलों (Commonwealth Games) में उन्होंने 15 पदक जीते हैं द्रोणाचार्य अवार्डी कोच होने के साथ ही पेरिस ओलंपिक में डबल मेडल जीतने वाली मनु भाकर के वह कोच थे, उन्हें 1994 में अर्जुन पुरस्कार, 1997 में पद्म श्री और 2020 में द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
जसपाल राणा उत्तराखंड ही नहीं देश भर की शान थे। उन्होंने न केवल अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया साथ ही देहरादून के मझोन स्थित उनकी शूटिंग रेंज से कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के शूटिंग खिलाड़ी भी भारत को मिले। जसपाल राणा का नाम भारतीय निशानेबाजी के इतिहास में स्वर्णिम अंकों में दर्ज रहेगा।
जसपाल राणा की सुपुत्री देवांशी भी होनहार निशाने बाज के तौर पर अपना कैरियर बना रही है,उनके पिता नारायण सिंह राणा उत्तराखंड की पहली बीजेपी सरकार में खेल मंत्री रहे तथा उनकी बहन सुषमा जो खुद भी बेहतरीन निशाने बाज खिलाड़ी हैं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बेटे पंकज सिंह की धर्म पत्नी है, छोटे भाई सुभाष राणा भी निशाने बाजी के क्षेत्र का चमकता सितारा है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी विधानसभा अध्यक्षा ऋतु खंडूरी खेल मंत्री रेखा आर्य और अन्य कई राजनैतिक और सामाजिक संगठनों ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए इसे अपूर्णीय क्षति बताया है।

By Shashi Sharma

Shashi Sharma Working in journalism since 1985 as the first woman journalist of Uttarakhand. From 1989 for 36 years, she provided her strong services for India's top news agency PTI. Working for a long period of thirty-six years for PTI, he got her pen ironed on many important occasions, in which, by staying in Tehri for two months, positive reporting on Tehri Dam, which was in crisis of controversies, paved the way for construction with the power of her pen. Delivered.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *