✨न्याय, धर्म, त्याग और लोकसेवा की अमर ज्योति, लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर*

*💥परमार्थ निकेतन से पुण्यश्लोक लोकमाता जी की पुण्यतिथि पर भावपूर्ण श्रद्धांजलि*

*🌺तीर्थों के पुनर्जागरण की महान साधिका*

*🙏🏻स्वामी चिदानन्द सरस्वती*

ऋषिकेश, 13 अगस्त। पुण्यश्लोक लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर जी की पुण्यतिथि पर परमार्थ निकेतन से भावभीनी श्रद्धाजंलि अर्पित करते हुये परमार्थ पीठाधीश्वर, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि वे ऐसी महान विभूति थीं जिनके जीवन में न्याय था, शासन में धर्म था, हृदय में करुणा थी, कर्म में सेवा थी और संकल्प में राष्ट्र एवं लोककल्याण का भाव था।

लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर जी की पुण्यतिथि के अवसर पर परमार्थ निकेतन से उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके अद्वितीय जीवन, राष्ट्र की आध्यात्मिक-सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण तथा जनसेवा के महान कार्यों का स्मरण किया।

अहिल्याबाई होल्कर जी ने अपने जीवन की व्यक्तिगत पीड़ाओं को दुर्बलता नहीं बनने दिया, बल्कि उन्हें लोकसेवा की शक्ति में परिवर्तित किया। उन्होंने शासन को वैभव और अधिकार का माध्यम नहीं, बल्कि प्रजा की सेवा और धर्म के संरक्षण का पवित्र दायित्व माना। उनके लिए राजधर्म का अर्थ था, प्रजा का सुख, न्याय की स्थापना, जरूरतमंदों की सहायता और सनातन संस्कृति की रक्षा।

पूज्य स्वामी जी ने कहा कि वे तीर्थों के पुनर्जागरण की महान साधिका थी। लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर ही का विराट योगदान भारत की तीर्थ परंपरा और मंदिरों के संरक्षण एवं पुनरुत्थान में दिखाई देता है। उन्होंने भारत के विभिन्न पवित्र तीर्थों में मंदिरों का निर्माण, जीर्णाेद्धार, घाटों का निर्माण तथा यात्रियों की सुविधा के लिए धर्मशालाओं, कुओं और जल-स्रोतों की व्यवस्था कराई।

काशी विश्वनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण से लेकर सोमनाथ मंदिर के पुनरुद्धार तक, उनकी धार्मिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि ने भारत की आध्यात्मिक चेतना को नई ऊर्जा दी। काशी में उन्होंने विश्वनाथ मंदिर के निर्माण के साथ तीर्थयात्रियों के लिए सुविधाओं का विस्तार कराया। उनके द्वारा निर्मित अहिल्याबाई घाट आज भी गंगा तट पर उनकी श्रद्धा और सेवा की स्मृति को जीवंत रखता है।

उन्होंने मंदिरों के शिखर ही नहीं सँवारे, बल्कि तीर्थयात्रा की पूरी व्यवस्था को मानवीय बनाया। यात्रियों के लिए धर्मशालाएँ, कुएँ, बावड़ियाँ और जल-सुविधाएँ बनवाईं। उनके लिए तीर्थ, जनसेवा, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना के केंद्र थे। लोकमाता की दृष्टि केवल मंदिर निर्माण तक सीमित नहीं थी। उन्होंने भारत की प्राचीन जल-संस्कृति और नदी-सभ्यता को भी संरक्षण दिया। गंगा जी सहित विभिन्न पवित्र नदियों के तटों पर घाटों का निर्माण एवं जीर्णाेद्धार कराया।

उनके द्वारा निर्मित घाट आज भी यह संदेश देते हैं कि नदी केवल जल की धारा नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता, संस्कृति और आध्यात्मिक जीवन की जीवनरेखा है। आज जब भारत अपनी नदियों और जल-स्रोतों के संरक्षण के लिए पुनः जागृत हो रहा है, तब लोकमाता अहिल्याबाई का जीवन हमें सदियों पुराना वह संदेश देता है कि जल की रक्षा, तीर्थों की रक्षा और प्रकृति की रक्षा ही वास्तव में हमारे जीवन की रक्षा है।

लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर जी का जीवन नारी शक्ति का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने ऐसे समय में शासन की बागडोर संभाली, जब नारियों के लिए सार्वजनिक नेतृत्व की राह अत्यंत कठिन थी। उन्होंने अपनी दूरदृष्टि, प्रशासनिक क्षमता, न्यायप्रियता और करुणामय नेतृत्व से सिद्ध किया कि नेतृत्व का वास्तविक आधार शक्ति नहीं, बल्कि चरित्र और लोकहित है।


By Shashi Sharma

Shashi Sharma Working in journalism since 1985 as the first woman journalist of Uttarakhand. From 1989 for 36 years, she provided her strong services for India's top news agency PTI. Working for a long period of thirty-six years for PTI, he got her pen ironed on many important occasions, in which, by staying in Tehri for two months, positive reporting on Tehri Dam, which was in crisis of controversies, paved the way for construction with the power of her pen. Delivered.

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