माटीकला बोर्ड के माध्यम से मिट्टी के दीये एवं मूर्तियों को नया स्वरूप देकर पौराणिक कला को मिल रहा बढ़ावा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ विजन को साकार करने की दिशा में जिलाधिकारी मयूर दीक्षित एवं मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र की पहल

हरिद्वार  भारतीय संस्कृति और परंपरा में मिट्टी के दीये एवं मूर्तियों का विशेष महत्व रहा है। बदलते समय के साथ आधुनिकता की दौड़ में मिट्टी से जुड़ी यह पारंपरिक कला धीरे-धीरे विलुप्त होने की कगार पर पहुंच रही है। ऐसे में इस प्राचीन कला को नया स्वरूप देने और स्थानीय कारीगरों को रोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से माटीकला बोर्ड रुड़की द्वारा महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ विजन को धरातल पर उतारने तथा स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित करने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के प्रयासों के क्रम में जनपद में माटीकला को बढ़ावा दिया जा रहा है।
जिलाधिकारी मयूर दीक्षित एवं मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र की पहल पर ग्राम्य विकास विभाग के माध्यम से राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) एवं आरआईपी परियोजना के सहयोग से माटीकला की इस पहल को आगे बढ़ाया जा रहा है। इसके तहत रुड़की में लिथोप्रेस के समीप महिलाओं एवं पुरुषों को मिट्टी के दीये और आकर्षक मूर्तियां बनाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि पारंपरिक कला को संरक्षित करने के साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित किए जा सकें।
माटीकला बोर्ड के उपाध्यक्ष शोभाराम प्रजापति ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ के विजन को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी निरंतर प्रयास कर रहे हैं। इसी दिशा में माटीकला बोर्ड द्वारा मिट्टी के दीये एवं मूर्तियां बनाने के लिए स्थानीय महिलाओं एवं पुरुषों को प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि प्रत्येक दो माह में 25-25 लोगों को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है। अब तक 50 लोगों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इस पहल के अंतर्गत ग्रामीण महिलाओं एवं युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए उन्हें दीये बनाने वाली मशीनें भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।
उन्होंने बताया कि प्रशिक्षित महिलाओं एवं युवाओं को दीये बनाने के लिए मशीनें उपलब्ध कराई जा रही है,जिससे कि वह अपना रोजगार शुरू कर सके और उनके लिए नियमित आय एवं रोजगार के अवसर पैदा होंगे। उन्होंने कहा कि सरकार का यह प्रयास ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय कला एवं कारीगरी को प्रोत्साहित करने के साथ ही महिलाओं और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र ने कहा कि माटीकला बोर्ड के माध्यम से हस्तनिर्मित मिट्टी के दीये एवं मूर्तियां आकर्षक और बेहतर ढंग से तैयार की जा रही हैं। इनके निर्माण के साथ-साथ उत्पादों की पैकेजिंग पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिससे ये बाजार में बेहतर पहचान बना सकें और उपभोक्ताओं को आकर्षित कर सकें। उन्होंने कहा कि मिट्टी के दीये एवं मूर्तियां हमारी पौराणिक संस्कृति और परंपराओं का अभिन्न हिस्सा हैं। वर्तमान समय में इस पारंपरिक कला को संरक्षण और प्रोत्साहन देने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ के संकल्प को आगे बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी निरंतर प्रयासरत हैं। इसी क्रम में जिलाधिकारी मयूर दीक्षित की पहल पर जनपद में ग्राम्य विकास विभाग के माध्यम से एनआरएलएम एवं रीप परियोजना द्वारा माटीकला बोर्ड को सहयोग प्रदान किया जा रहा है। इसका उद्देश्य स्थानीय उत्पादों को उचित पहचान एवं बाजार उपलब्ध कराना तथा ग्रामीण महिलाओं एवं युवाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बनाना है।
मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र ने कुम्हार,कुम्हारी कला एवं माटीकला से जुड़े ग्रामीणों को प्रोत्साहित करने के लिए दीपावली के पावन पर्व पर अपने घरों एवं प्रतिष्ठानों को सजाने के लिए कुम्हारी कला द्वारा तैयार किए गए मिट्टी के दीये एवं मूर्तियों की खरीदारी करें। उन्होंने कहा कि स्थानीय कारीगरों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों को अपनाकर ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को बढ़ावा दें तथा स्थानीय महिलाओं एवं युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में अपना योगदान दें। इससे हमारी पारंपरिक माटीकला को संरक्षण मिलने के साथ ही स्थानीय कारीगरों का उत्साहवर्धन भी होगा।
माटीकला की यह पहल केवल मिट्टी के दीये और मूर्तियां बनाने तक सीमित नहीं है,बल्कि इसके माध्यम से हमारी पारंपरिक विरासत को सहेजने,स्थानीय हुनर को पहचान दिलाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है। प्रशिक्षण,मशीनों की उपलब्धता और तैयार उत्पादों की खरीद सुनिश्चित होने से स्थानीय महिलाओं एवं युवाओं को अपने हुनर को रोजगार में बदलने का अवसर मिलेगा।


By Shashi Sharma

Shashi Sharma – Senior Woman Journalist Shashi Sharma has been active in journalism since 1985, holding the distinction of being Uttarakhand's first female journalist. For 36 years, starting in 1989, she rendered distinguished service to India's premier news agency, PTI. During this long tenure, she demonstrated the power of her writing on numerous significant occasions; notably, she spent two months in Tehri reporting positively on the Tehri Dam—which was then mired in controversy—and used her pen to help pave the way for its construction. Currently, Mrs. Shashi Sharma runs the news portal *Newsok24.com* and serves as the editor of the weekly newspaper *Desh Nirdesh*; she is also a registered anchor and commentator for Delhi Doordarshan. शशि शर्मा वरिष्ठ महिला पत्रकार शशि शर्मा उत्तराखंड की पहली महिला पत्रकार के तौर पर 1985 से पत्रकारिता में कार्यरत हैं। 1989 से 36 वर्षों तक उन्होंने भारत की शीर्ष समाचार एजेंसी पीटीआई के लिए अपनी सशक्त सेवाएं दीं। छत्तीस वर्षों की लंबी अवधि तक पीटीआई के लिए काम करते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण मौकों पर अपनी कलम का लोहा मनवाया, जिसमें दो महीने तक टिहरी में रहकर विवादों के संकट में रहे टिहरी बांध पर सकारात्मक रिपोर्टिंग कर अपनी कलम की ताकत से निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया। वर्तमान में श्रीमती शशि शर्मा Newsok24 com न्यूज पोर्टल को चला रहीं हैं और साप्ताहिक समाचार पत्र देश निर्देश की सम्पादक होने के साथ ही दिल्ली दूरदर्शन की रजिस्टर्ड एंकर और कमेंटेटर भी हैं।

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