नाबार्ड ने उत्तराखंड स्टेट क्रेडिट सेमिनार में जारी किया ‘स्टेट फोकस पेपर 2026–27’

मुख्य सचिव श्री आनंद बर्धन द्वारा ₹65,916 करोड़ की प्राथमिकता क्षेत्र ऋण क्षमता का विमोचन

देहरादून।राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड), उत्तराखंड क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा आज स्टेट क्रेडिट सेमिनार 2026–27 का सफल आयोजन किया गया। इस अवसर पर स्टेट फोकस पेपर (SFP) 2026–27 का औपचारिक विमोचन किया गया, जिसमें वित्तीय वर्ष 2026–27 के लिए ₹65,916 करोड़ की प्राथमिकता क्षेत्र ऋण क्षमता का आकलन प्रस्तुत किया गया—जो कि पिछले वर्ष के मुकाबले 20.51% की वृद्धि है।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, उत्तराखंड के मुख्य सचिव श्री आनंद बर्धन थे। कार्यक्रम में डॉ. एस.एन. पांडे (सचिव–कृषि), डॉ अहमद इक़बाल (सचिव–सहकारिता), श्री नवनीत पाण्डेय (अपर सचिव-वित्त), भारतीय रिज़र्व बैंक के महाप्रबंधक, SLBC, PNB, SBI सहित विभिन्न वाणिज्यिक बैंकों, राज्य सहकारी बैंक, जिला मध्यवर्ती बैंक के सदस्य, उत्तराखंड ग्रामीण बैंक, विभिन्न सरकारी विभागों के अधिकारी तथा कृषक उत्पादक संघटनों एवं स्वयं सहायता समूह के सदस्य आदि उपस्थित रहे।

वन संरक्षण और महिला सशक्तिकरण का प्रतीक—“वन अम्मा” के नाम से प्रसिद्ध श्रीमती भगिरथी देवी—की उपस्थिति कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रही।

मुख्य सचिव श्री आनंद बर्धन का वक्तव्य

मुख्य सचिव ने हर वर्ष स्टेट फोकस पेपर जारी करने के लिए नाबार्ड के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने अवसंरचना सहायता के अतिरिक्त नाबार्ड द्वारा क्रियान्वित विभिन्न विकासात्मक परियोजनाओं के लिए भी नाबार्ड की प्रशंसा की। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा आजीविका संबंधी चुनौतियों, पर्वतीय क्षेत्रों से निरंतर हो रहे पलायन, अवसंरचना की कमी तथा जल-संबंधी समस्याओं जैसे गंभीर मुद्दों को संबोधित करने हेतु की जा रही निरंतर पहलों पर प्रकाश डाला।

उन्होंने उल्लेख किया कि इन प्रयासों के बावजूद, राज्य का क्रेडिट–डिपॉज़िट (CD) अनुपात अभी भी अत्यंत निम्न स्तर पर है, जो आर्थिक विकास की गति को प्रभावित करता है और विभिन्न विकास कार्यक्रमों के प्रभाव को सीमित कर देता है।

उन्होने यह भी रेखांकित किया कि यद्यपि उत्तराखंड ने अब तक 29 भौगोलिक संकेतक (GI) उत्पाद प्राप्त किए हैं, लेकिन इन पारंपरिक उत्पादों से जुड़े स्थानीय उत्पादकों एवं समुदायों को अभी तक अपेक्षित आर्थिक लाभ नहीं मिल पाए हैं।

आगे की दिशा बताते हुए उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की प्रमुख योजनाओं एवं कार्यक्रमों में बैंकों की सक्रिय भूमिका और गहन भागीदारी अत्यावश्यक है, जिससे सतत आजीविका अवसर सुनिश्चित हो सकें और विकास पहलों का लाभ वास्तव में जमीनी स्तर तक पहुँचे।

नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक (CGM) श्री पंकज यादव का संबोधन

मुख्य महाप्रबंधक श्री पंकज यादव ने बताया कि नाबार्ड को ग्रामीण समृद्धि को सक्षम करने वाले एक मजबूत विकासात्मक इकोसिस्टम के रूप में पहचान मिल रही है—जो नवाचार, समावेशन और सतत विकास को बहु-क्षेत्रीय स्तर पर आगे बढ़ा रहा है।

अंतर्राष्ट्रीय महिला किसान वर्ष 2026 के संदर्भ में उन्होंने कृषि समुदाय को सशक्त करने, आजीविका को मजबूत करने तथा ग्रामीण विकास को नई दिशा देने हेतु नाबार्ड की प्रतिबद्धता को पुनः रेखांकित किया।

उन्होंने जानकारी दी कि—

चंपावत जिले में वन पंचायतों के सहयोग से एक पायलट परियोजना प्रारंभ की जा रही है, जिसके तहत प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और आजीविका उन्नयन का समुदाय आधारित मॉडल विकसित किया जाएगा।

इसी प्रकार उत्तरकाशी में एक परियोजना शुरू की जा रही है, जिसका उद्देश्य महिला किसानों की मेहनत को कम करना है। इसके तहत उपयुक्त कृषि उपकरण उपलब्ध कराकर गरिमा, परिचालन क्षमता और उत्पादकता में वृद्धि सुनिश्चित की जाएगी।

CGM ने उल्लेख किया कि—

Agri Stack का कार्यान्वयन जमीनी स्तर पर ऋण प्रवाह को सहज बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे किसान डेटा का एकीकरण, लक्षित लाभार्थी पहचान और पारदर्शिता में उल्लेखनीय सुधार होगा।

कृषि अवसंरचना निधि (AIF) को ₹1 लाख करोड़ से बढ़ाकर ₹2 लाख करोड़ किए जाने से उत्तराखंड को कृषि अवसंरचना एवं वैल्यू एडिशन सुविधाओं में निवेश बढ़ाने के बड़े अवसर प्राप्त होंगे।

e-KCC का प्रभावी क्रियान्वयन ऋण वितरण को आधुनिक बनाने, प्रक्रियाओं को सरल बनाने और किसानों को समयबद्ध एवं परेशानी-मुक्त ऋण सुविधा सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि ये सभी प्रयास मिलकर राज्य में एक लचीली, प्रौद्योगिकी-संचालित और किसान-केंद्रित कृषि प्रणाली के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

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“वन-अम्मा” का संबोधन

चम्पावत जिले के मनर गाँव की भगिरथी देवी, जिन्हें पूरे क्षेत्र में स्नेहपूर्वक “वन-अम्मा” के नाम से जाना जाता है, ने संगोष्ठी के दौरान महिला-नेतृत्वयुक्त वन संरक्षण के अपने उल्लेखनीय अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि किस प्रकार जंगलों की रक्षा उनके लिए प्रेम और ज़िम्मेदारी का एक मिशन रहा है। ग्रामीणों के सामूहिक प्रयासों से “वन-अम्मा” ने 12 हेक्टेयर बंजर भूमि को पुनर्जीवित किया और उन प्राकृतिक जलस्रोतों को बहाल किया जो लंबे समय से सूख रहे थे। उन्होंने अनुभव साझा किया कि जंगलों के पुनर्जीवन ने न केवल हरियाली लौटाई, बल्कि खेती और घरेलू उपयोग के लिए कई गाँवों में विश्वसनीय जल उपलब्धता भी सुनिश्चित की।

संगोष्ठी के दौरान NABARD द्वारा समर्थित एफपीओ, जनजातीय विकास परियोजनाओं और स्वयं सहायता समूहों (SHGs) से जुड़ी महिला लाभार्थियों ने भी अपनी यात्रा और अनुभव साझा किए।

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स्टेट फोकस पेपर 2026–27 की प्रमुख झलक

कुल प्राथमिकता क्षेत्र ऋण क्षमता — ₹65,916 करोड़

कृषि क्षेत्र – ₹23,248.82 करोड़

एमएसएमई (MSME) – ₹36,761.17 करोड़

अन्य प्राथमिक क्षेत्र – ₹5,906.27 करोड़

SFP, जिला-स्तरीय PLP के आधार पर तैयार किया गया है और यह बैंकों एवं विभागों के लिए राज्य के विकास की दिशा में एक रणनीतिक मार्गदर्शक का कार्य करेगा।

नाबार्ड की प्रतिबद्धता

नाबार्ड द्वारा जलवायु-अनुकूल कृषि, सहकारी क्षेत्र का डिजिटलीकरण, ग्रामीण अवसंरचना निधि, MSME संवर्द्धन, FPO समर्थन, SHG सशक्तिकरण तथा डिजिटल वित्तीय समावेशन जैसे अनेक क्षेत्रों में निरंतर प्रयास जारी हैं।

 


By Shashi Sharma

Shashi Sharma – Senior Woman Journalist

Shashi Sharma has been active in journalism since 1985, holding the distinction of being Uttarakhand's first female journalist.

For 36 years, starting in 1989, she rendered distinguished service to India's premier news agency, PTI. During this long tenure, she demonstrated the power of her writing on numerous significant occasions; notably, she spent two months in Tehri reporting positively on the Tehri Dam—which was then mired in controversy—and used her pen to help pave the way for its construction.

Currently, Mrs. Shashi Sharma runs the news portal *Newsok24.com* and serves as the editor of the weekly newspaper *Desh Nirdesh*; she is also a registered anchor and commentator for Delhi Doordarshan.

शशि शर्मा वरिष्ठ महिला पत्रकार शशि शर्मा उत्तराखंड की पहली महिला पत्रकार के तौर पर 1985 से पत्रकारिता में कार्यरत हैं। 1989 से 36 वर्षों तक उन्होंने भारत की शीर्ष समाचार एजेंसी पीटीआई के लिए अपनी सशक्त सेवाएं दीं। छत्तीस वर्षों की लंबी अवधि तक पीटीआई के लिए काम करते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण मौकों पर अपनी कलम का लोहा मनवाया, जिसमें दो महीने तक टिहरी में रहकर विवादों के संकट में रहे टिहरी बांध पर सकारात्मक रिपोर्टिंग कर अपनी कलम की ताकत से निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया। वर्तमान में श्रीमती शशि शर्मा Newsok24 com न्यूज पोर्टल को चला रहीं हैं और साप्ताहिक समाचार पत्र देश निर्देश की सम्पादक होने के साथ ही दिल्ली दूरदर्शन की रजिस्टर्ड एंकर और कमेंटेटर भी हैं।

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