राष्ट्रीय सैनिक संस्था के शिक्षा प्रकोष्ठ द्वारा देहरादून में राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन*

माननीय राज्यपाल, उत्तराखंड़, लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह जी और परमार्थ पीठाधीश्वर, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी की गरिमामयी उपस्थिति*

राष्ट्रीय शिक्षा नीति में नैतिक शिक्षा से होगा भारत का उज्ज्वल भविष्य*

स्वामी चिदानन्द सरस्वती*

राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसकी सैन्य क्षमता के साथ-साथ उसके नागरिकों के चरित्र, अनुशासन और नैतिक मूल्यों में निहित*

*माननीय राज्यपाल, गुरमीत सिंह*

देहरादून, 18 जुलाई। राष्ट्रीय सैनिक संस्था के राष्ट्रीय शिक्षा प्रकोष्ठ द्वारा आज राष्ट्रीय शिक्षा नीति में नैतिक शिक्षा विषय पर एक गरिमामयी राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन लोक भवन (पूर्व राजभवन), देहरादून छावनी, उत्तराखण्ड के कॉन्फ्रेंस हॉल में किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से शिक्षा में नैतिक मूल्यों, चरित्र निर्माण, राष्ट्रभक्ति एवं भारतीय सांस्कृतिक चेतना के समावेश पर व्यापक विमर्श करना है।

परमार्थ पीठाधीश्वर, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी का पावन सान्निध्य और कार्यक्रम में उत्तराखण्ड के माननीय राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह, पीवीएसएम, यूवाईएसएम, एवीएसएम, वीएसएम मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रीय सैनिक संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष कर्नल श्री तेजेन्द्र पाल त्यागी जी, वीर चक्र ने की।

परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश के अध्यक्ष एवं आध्यात्मिक गुरु परम पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज मुख्य वक्ताओं में शामिल हुये और कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में नैतिक शिक्षा से होगा भारत का उज्ज्वल भविष्य। लेफ्टिनेंट जनरल अश्विनी कुमार बख्शी (पूर्व सैन्य सचिव, भारत के दो राष्ट्रपतियों के), मेजर जनरल (डॉ.) जी. के. थापलियाल (प्रो-कुलपति, शुभारती विश्वविद्यालय), मेजर जनरल प्रो. (डॉ.) ओ. पी. सोनी, वीएसएम (राष्ट्रीय संयोजक, शिक्षा प्रकोष्ठ), श्री राजन छिब्बर (राष्ट्रीय संयोजक, वित्त परिषद) तथा प्रो. (डॉ.) नीलम पवार (राज्याध्यक्ष, महिला विंग, उत्तर प्रदेश) ने भी अपने प्रखर विचार व्यक्त किए।

अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि ऐसे नागरिकों का निर्माण करना है जो सत्यनिष्ठ, करुणामय, संस्कारित और राष्ट्र के प्रति समर्पित हों। उन्होंने कहा कि यदि शिक्षा में नैतिकता, सेवा, सह-अस्तित्व और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता का समावेश नहीं होगा, तो विकास अधूरा रहेगा। उन्होंने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि नई शिक्षा नीति को भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक मूल्यों और वैश्विक उत्तरदायित्व से जोड़ना समय की आवश्यकता है।

भारत की शिक्षा परम्परा सदैव ज्ञान और संस्कार का अद्भुत समन्वय रहा है। हमारे गुरुकुलों ने केवल विद्वान नहीं, बल्कि ऐसे व्यक्तित्व गढ़े जिन्होंने राष्ट्र, समाज और सम्पूर्ण मानवता के कल्याण को अपने जीवन का लक्ष्य बनाया।

पूज्य स्वामी जी ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि भारत विश्वगुरु तभी बनेगा, जब उसके विद्यार्थी केवल प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ने की नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और राष्ट्र निर्माण की भावना से प्रेरित होंगे।

मुख्य अतिथि राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने कहा कि एक सशक्त राष्ट्र का निर्माण केवल तकनीकी दक्षता से नहीं, बल्कि चरित्रवान और अनुशासित नागरिकों से होता है। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति को भारतीय मूल्यों पर आधारित एक दूरदर्शी पहल बताते हुए कहा कि विद्यालयों और विश्वविद्यालयों में नैतिक शिक्षा को व्यवहारिक रूप में अपनाया होगा।

उन्होंने कहा कि राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसकी सैन्य क्षमता के साथ-साथ उसके नागरिकों के चरित्र, अनुशासन और नैतिक मूल्यों में निहित होती है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों को पुनः शिक्षा के केंद्र में स्थापित करने का महत्वपूर्ण प्रयास है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कर्नल तेजेन्द्र पाल त्यागी जी, वीर चक्र ने कहा कि राष्ट्रीय सैनिक संस्था का उद्देश्य केवल पूर्व सैनिकों को संगठित करना ही नहीं, बल्कि समाज में राष्ट्रप्रेम, अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और नैतिक मूल्यों का प्रसार करना भी है। इसी उद्देश्य से शिक्षा प्रकोष्ठ द्वारा इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया।

लेफ्टिनेंट जनरल अश्विनी कुमार बख्शी जी ने शिक्षा में अनुशासन और नेतृत्व की भूमिका पर प्रकाश डाला, मेजर जनरल (डॉ.) जी. के. थापलियाल जी ने विश्वविद्यालयों में मूल्यपरक शिक्षा की आवश्यकता पर बल दिया, मेजर जनरल प्रो. (डॉ.) ओ. पी. सोनी जी ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति तभी सफल होगी जब शिक्षा ज्ञान के साथ संस्कार भी प्रदान करे। श्री राजन छिब्बर जी ने शिक्षा और आर्थिक उत्तरदायित्व के संतुलन पर विचार रखे तथा प्रो. (डॉ.) नीलम पवार जी ने परिवार, विद्यालय और समाज के संयुक्त प्रयासों से नैतिक मूल्यों के संवर्धन की आवश्यकताओं पर जोर दिया।

संगोष्ठी में बड़ी संख्या में शिक्षाविदों, पूर्व सैनिकों, विद्यार्थियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। सभी वक्ताओं ने इस बात पर बल दिया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति का वास्तविक उद्देश्य केवल ज्ञानार्जन नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, राष्ट्र निर्माण और व्यक्तित्व निर्माण है।

कार्यक्रम का सफल संचालन एवं समन्वय राष्ट्रीय सैनिक संस्था के शिक्षा प्रकोष्ठ द्वारा किया गया। संगोष्ठी का समापन राष्ट्रगान एवं इस संकल्प के साथ हुआ कि शिक्षा को भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और सेवा भावना से जोड़कर एक सशक्त, संवेदनशील एवं आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में योगदान देना है।


By Shashi Sharma

Shashi Sharma – Senior Woman Journalist

Shashi Sharma has been active in journalism since 1985, holding the distinction of being Uttarakhand's first female journalist.

For 36 years, starting in 1989, she rendered distinguished service to India's premier news agency, PTI. During this long tenure, she demonstrated the power of her writing on numerous significant occasions; notably, she spent two months in Tehri reporting positively on the Tehri Dam—which was then mired in controversy—and used her pen to help pave the way for its construction.

Currently, Mrs. Shashi Sharma runs the news portal *Newsok24.com* and serves as the editor of the weekly newspaper *Desh Nirdesh*; she is also a registered anchor and commentator for Delhi Doordarshan.

शशि शर्मा वरिष्ठ महिला पत्रकार शशि शर्मा उत्तराखंड की पहली महिला पत्रकार के तौर पर 1985 से पत्रकारिता में कार्यरत हैं। 1989 से 36 वर्षों तक उन्होंने भारत की शीर्ष समाचार एजेंसी पीटीआई के लिए अपनी सशक्त सेवाएं दीं। छत्तीस वर्षों की लंबी अवधि तक पीटीआई के लिए काम करते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण मौकों पर अपनी कलम का लोहा मनवाया, जिसमें दो महीने तक टिहरी में रहकर विवादों के संकट में रहे टिहरी बांध पर सकारात्मक रिपोर्टिंग कर अपनी कलम की ताकत से निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया। वर्तमान में श्रीमती शशि शर्मा Newsok24 com न्यूज पोर्टल को चला रहीं हैं और साप्ताहिक समाचार पत्र देश निर्देश की सम्पादक होने के साथ ही दिल्ली दूरदर्शन की रजिस्टर्ड एंकर और कमेंटेटर भी हैं।

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