नेताजी सुभाष चंद्र बोस जी की पुण्यतिथि पर राष्ट्रभक्ति, त्याग और संकल्प
✨परमार्थ निकेतन से नेताजी सुभाष चंद्र बोस को भावपूर्ण श्रद्धांजलि
🌺तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा” का आह्वान आज भी राष्ट्र के युवाओं में भरता है अदम्य साहस
🌼आज की परमार्थ गंगा आरती नेताजी सुभाष चंद्र बोस जी की पुण्यतिथि पर की समर्पित

ऋषिकेश, 18 अगस्त। भारत के स्वतंत्रता संग्राम के महानायक, अदम्य साहस, राष्ट्रभक्ति और त्याग के प्रतीक नेताजी सुभाष चंद्र बोस की पुण्यतिथि पर परमार्थ निकेतन से उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। नेताजी का जीवन भारत की स्वतंत्रता की एक गौरवशाली गाथा का एक अद्भुत इतिहास है। उन्होंने राष्ट्र सर्वोपरि का दिव्य संदेश दिया।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के महान योद्धाओं थे, जिन्होंने स्वतंत्रता को केवल एक राजनीतिक लक्ष्य नहीं माना, बल्कि उसे राष्ट्र के आत्मसम्मान, स्वाभिमान और अस्तित्व का संदेश दिया। उनका व्यक्तित्व भारतीय युवाशक्ति के उस ज्वलंत स्वरूप का प्रतीक था, जिसमें विचारों की स्पष्टता, संकल्प की दृढ़ता, नेतृत्व का तेज और राष्ट्र के लिए सर्वस्व न्यौछावर करने का साहस था।

उनका आह्वान “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा” सिर्फ एक नारा नहीं था; वह उस युग के सोए हुए आत्मविश्वास को जगाने वाली हुंकार थी। उन्होंने भारतीयों के भीतर यह विश्वास जगाया कि स्वतंत्रता किसी के उपकार से प्राप्त होने वाली वस्तु नहीं, बल्कि साहस, संगठन, संघर्ष और बलिदान से अर्जित किया जाने वाला अधिकार है।

नेताजी ने आजाद हिंद फौज के माध्यम से भारतीयों को एक ऐसे राष्ट्रवादी संकल्प से जोड़ा, जिसमें जाति, भाषा, प्रांत और धर्म की सीमाएँ पीछे छूट जाती हैं और सबसे ऊपर भारत माता का भाव प्रतिष्ठित होता है। “जय हिंद” का उद्घोष आज भी भारत की राष्ट्रीय चेतना में उसी एकता, आत्मगौरव और राष्ट्रसमर्पण की ऊर्जा का संचार करता है।

नेताजी का जीवन हमें संदेश देता है कि नेतृत्व केवल परिस्थितियों का अनुसरण नहीं करता, बल्कि इतिहास की दिशा बदलने का साहस करता है। कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया। उनके लिए राष्ट्रसेवा कोई अवसर नहीं, बल्कि जीवन का सर्वोच्च धर्म था।

परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष, परमार्थ पीठाधीश्वर, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस भारत की उस विराट चेतना के प्रतीक हैं, जो विपरीत परिस्थितियों में भी हार नहीं मानती।

उन्होंने कहा कि आज भारत की युवा शक्ति के सामने राष्ट्र को नई ऊँचाइयों तक ले जाने का अवसर है। भारत की स्वतंत्रता असंख्य ज्ञात-अज्ञात वीरों के त्याग का परिणाम है। नेताजी उस अमर परंपरा के ऐसे तेजस्वी नक्षत्र हैं, जिनका प्रकाश आने वाली पीढ़ियों को भी मार्ग दिखाता रहेगा।

परमार्थ निकेतन से महान राष्ट्रनायक नेताजी सुभाष चंद्र बोस को कोटि-कोटि नमन। उनकी राष्ट्रभक्ति की ज्वाला, उनका अदम्य साहस और उनका भारत के प्रति समर्पण प्रत्येक भारतीय के हृदय में सदैव प्रज्वलित रहे।


By Shashi Sharma

Shashi Sharma Working in journalism since 1985 as the first woman journalist of Uttarakhand. From 1989 for 36 years, she provided her strong services for India's top news agency PTI. Working for a long period of thirty-six years for PTI, he got her pen ironed on many important occasions, in which, by staying in Tehri for two months, positive reporting on Tehri Dam, which was in crisis of controversies, paved the way for construction with the power of her pen. Delivered.

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