*गोल्डन आवर में दिखा बेहतरीन समन्वय और सामंजस्य*

*पांच जनपदों में माॅक ड्रिल से परखी गई तैयारियां*

देहरादून। उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के दिशा-निर्देशन में आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय मॉक ड्रिल के प्रथम चरण में मंगलवार को बागेश्वर, पौड़ी, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग एवं नैनीताल जनपदों में व्यापक स्तर पर बहु-स्थलीय मॉक अभ्यास आयोजित किए गए। इन माॅक ड्रिल के जरिये संभावित आपदा की परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया, विभागीय समन्वय, संसाधनों की उपलब्धता तथा राहत एवं बचाव तंत्र की वास्तविक तैयारियों का आकलन किया गया। यह पहला अवसर रहा जब जनपदों द्वारा स्वयं अपने स्तर पर माॅक ड्रिल की गई और यूएसडीएमए द्वारा सिर्फ माॅनीटरिंग की गई।

राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र से सभी जनपदों में संचालित मॉक अभ्यासों की निरंतर निगरानी की गई। विभिन्न परिदृश्यों जैसे भूकम्प, भूस्खलन, सड़क दुर्घटना, नदी में बाढ़, वनाग्नि एवं अन्य आपात स्थितियों के माध्यम से तैयारियों को परखा गया। मॉक अभ्यास के दौरान पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, फायर सर्विस, स्वास्थ्य विभाग, विद्युत विभाग, राजस्व विभाग सहित अन्य आपातकालीन सेवाओं ने समन्वित रूप से कार्य करते हुए प्रभावितों के सुरक्षित रेस्क्यू, प्राथमिक उपचार, राहत वितरण की प्रक्रियाओं का अभ्यास किया।

इस अवसर पर सचिव, आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन ने कहा कि इस प्रकार के राज्य स्तरीय मॉक अभ्यास न केवल हमारी तैयारियों की वास्तविक स्थिति को सामने लाते हैं, बल्कि विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को और अधिक सुदृढ़ करते हैं। आपदा की स्थिति में गोल्डन ऑवर के दौरान त्वरित एवं संगठित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है और ऐसे अभ्यास उसी दिशा में हमारी क्षमता को निरंतर बेहतर बनाते हैं। साथ ही, इनसे प्राप्त अनुभवों के आधार पर कमियों की पहचान कर उन्हें समय रहते दूर किया जा सकता है, जिससे जन-धन की हानि को न्यूनतम किया जा सके।

इस राज्यव्यापी माॅक ड्रिल का उद्देश्य आपदाओं के दौरान प्रशासनिक तत्परता का परीक्षण, विभिन्न विभागों के मध्य आपसी समन्वय को मजबूत करना, संचार एवं समन्वय तंत्र की खामियों की पहचान कर उन्हें दूर करना तथा फील्ड स्तर पर त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता का आकलन करना है, ताकि वास्तविक आपदा की स्थिति में किसी प्रकार की देरी या भ्रम की स्थिति उत्पन्न न हो। इस अवसर पर अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रियान्वयन डीआईजी श्री राजकुमार नेगी, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रशासन श्री महावीर सिंह चैहान, वित्त नियंत्रक श्री अभिषेक कुमार आनंद, संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी मो0 ओबैदुल्लाह अंसारी, यूएलएमएमसी के निदेशक श्री शांतनु सरकार तथा यूएसडीएमए के विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

जनपद बागेश्वर-अभ्यास में दिखी समन्वित त्वरित कार्रवाई

जनपद बागेश्वर में विभिन्न स्थानों पर आयोजित मॉक अभ्यास के दौरान भूकम्प, भूस्खलन, आग एवं वन्यजीव हमले जैसी परिस्थितियों का यथार्थपरक प्रदर्शन किया गया। डिग्री कॉलेज क्षेत्र में भवन क्षति एवं मलबे में फंसे लोगों के रेस्क्यू, गरुड़ क्षेत्र में भूस्खलन, कांडा में आग लगने तथा गुलदार हमले के परिदृश्यों पर प्रभावी राहत-बचाव कार्य किए गए। जिलाधिकारी आकांक्षा कोंडे द्वारा जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र से लगातार मॉनिटरिंग करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए तथा अभ्यास के दौरान चिन्हित कमियों को दर्ज कर सुधार के निर्देश दिए गए।

जनपद रुद्रप्रयाग-भूकम्प, भूस्खलन, सड़क दुर्घटना व वनाग्नि पर समग्र अभ्यास

रुद्रप्रयाग जनपद में भूकम्प, भूस्खलन, सड़क दुर्घटना एवं वनाग्नि जैसी घटनाओं पर आधारित मॉक ड्रिल आयोजित की गई। सिरोहबगड़, मुनकटिया, सोनप्रयाग क्षेत्रों में भूस्खलन, घोलतीर में सड़क दुर्घटना, अगस्त्यमुनि में भूकम्प तथा बुवाखाल क्षेत्र में वनाग्नि के परिदृश्यों पर विभिन्न विभागों द्वारा समन्वित कार्रवाई का अभ्यास किया गया। अभ्यास के दौरान त्वरित रेस्क्यू, प्राथमिक उपचार, संसाधनों के उपयोग एवं स्टेजिंग एरिया से संचालन की प्रभावशीलता का परीक्षण किया गया।

जनपद पौड़ी-जटिल परिस्थितियों में त्वरित रेस्क्यू का प्रदर्शन

जनपद पौड़ी में चार अलग-अलग स्थानों पर नदी के जलस्तर में वृद्धि, भूस्खलन, बस दुर्घटना एवं वनाग्नि के परिदृश्यों पर मॉक अभ्यास किया गया। कोटद्वार क्षेत्र में बाढ़ जैसी स्थिति में फंसे लोगों को सुरक्षित निकाला गया, थलीसैंण में भूस्खलन के दौरान घायलों को एयरलिफ्ट किया गया, धुमाकोट क्षेत्र में बस दुर्घटना में फंसे लोगों का रेस्क्यू किया गया तथा बुवाखाल क्षेत्र में वनाग्नि पर नियंत्रण पाया गया। जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया के निर्देशन में कंट्रोल रूम से पूरी कार्यवाही की सघन निगरानी की गई तथा सभी एजेंसियों द्वारा त्वरित एवं प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित की गई।

उत्तरकाशी में सिलक्यारा टनल में किया गया माॅक अभ्यास

जनपद उत्तरकाशी में मनेरी भाली परियोजना-01 में बांध से रिसाव की स्थिति को दर्शाते हुए निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की कार्यवाही का अभ्यास किया गया। इस दौरान प्रशासन एवं आपदा प्रबंधन टीमों द्वारा समयबद्ध निकासी एवं अलर्ट प्रणाली की प्रभावशीलता का परीक्षण किया गया। सिलक्यारा क्षेत्र में सुरंग धंसने की स्थिति का परिदृश्य तैयार किया गया, जिसमें सुरंग के भीतर फंसे यात्रियों को सुरक्षित निकालने के लिए विशेष रेस्क्यू ऑपरेशन संचालित किया गया। पाली गाड़ क्षेत्र में वाहन दुर्घटना का परिदृश्य प्रस्तुत किया गया तथा डुंडालगांव क्षेत्र में भूस्खलन की स्थिति को दर्शाते हुए मार्ग अवरुद्ध होने एवं बड़ी संख्या में वाहनों के फंसने का परिदृश्य तैयार किया गया।

नैनीताल में देखने को मिला सटीक समन्वय

जनपद नैनीताल के मल्लीताल क्षेत्र स्थित चार्टन लॉज में भूस्खलन की स्थिति दर्शाते हुए प्रभावित क्षेत्र में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने तथा क्षेत्र को सुरक्षित करने की कार्यवाही की गई। वहीं हल्द्वानी के कलसिया नाला क्षेत्र में त्वरित बाढ़ का परिदृश्य तैयार कर जलभराव में फंसे लोगों के रेस्क्यू एवं सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करने का अभ्यास किया गया। कालाढूंगी क्षेत्र में वन्य क्षेत्र के समीप बाघ के हमले की घटना को दर्शाते हुए घायल व्यक्ति को तत्काल रेस्क्यू कर प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराने तथा अस्पताल पहुंचाने की कार्यवाही की गई। इसके अतिरिक्त कैंची धाम मंदिर परिसर में भगदड़ की स्थिति का परिदृश्य प्रस्तुत कर भीड़ नियंत्रण, घायलों की सहायता एवं निकासी की प्रक्रिया का अभ्यास किया गया। मल्लीताल स्थित बोट हाउस क्लब क्षेत्र में नाव पलटने की घटना का अभ्यास किया गया, जिसमें पानी में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने, लाइफ सेविंग उपकरणों के उपयोग तथा त्वरित रेस्क्यू तकनीकों का प्रदर्शन किया गया।

By Shashi Sharma

Shashi Sharma – Senior Woman Journalist

Shashi Sharma has been active in journalism since 1985, holding the distinction of being Uttarakhand's first female journalist.

For 36 years, starting in 1989, she rendered distinguished service to India's premier news agency, PTI. During this long tenure, she demonstrated the power of her writing on numerous significant occasions; notably, she spent two months in Tehri reporting positively on the Tehri Dam—which was then mired in controversy—and used her pen to help pave the way for its construction.

Currently, Mrs. Shashi Sharma runs the news portal *Newsok24.com* and serves as the editor of the weekly newspaper *Desh Nirdesh*; she is also a registered anchor and commentator for Delhi Doordarshan.

शशि शर्मा वरिष्ठ महिला पत्रकार शशि शर्मा उत्तराखंड की पहली महिला पत्रकार के तौर पर 1985 से पत्रकारिता में कार्यरत हैं। 1989 से 36 वर्षों तक उन्होंने भारत की शीर्ष समाचार एजेंसी पीटीआई के लिए अपनी सशक्त सेवाएं दीं। छत्तीस वर्षों की लंबी अवधि तक पीटीआई के लिए काम करते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण मौकों पर अपनी कलम का लोहा मनवाया, जिसमें दो महीने तक टिहरी में रहकर विवादों के संकट में रहे टिहरी बांध पर सकारात्मक रिपोर्टिंग कर अपनी कलम की ताकत से निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया। वर्तमान में श्रीमती शशि शर्मा Newsok24 com न्यूज पोर्टल को चला रहीं हैं और साप्ताहिक समाचार पत्र देश निर्देश की सम्पादक होने के साथ ही दिल्ली दूरदर्शन की रजिस्टर्ड एंकर और कमेंटेटर भी हैं।

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