उत्तराखण्ड का भूस्खलन प्रबंधन माॅडल अब अन्य राज्यों में भी बना रहा अपनी पहचान

खारा हाइड्रो इलेक्ट्रिक परियोजना के लिए डीपीआर एवं तकनीकी परामर्श से यूएलएमएमसी को मिली पहली राजस्व प्राप्ति
देहरादून। उत्तराखण्ड की भूस्खलन विशेषज्ञता का दायरा लगातार बढ़ रहा है। राज्य में भूस्खलन जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन के क्षेत्र में विकसित तकनीकी क्षमता एवं अनुभव को अब दूसरे राज्यों में भी पहचान मिल रही है। उत्तराखण्ड भूस्खलन एवं न्यूनीकरण केन्द्र ने अपनी तकनीकी विशेषज्ञता के माध्यम से राज्य के बाहर भी अपनी उपयोगिता साबित करते हुए आत्मनिर्भरता की दिशा में एक अहम कदम बढ़ाया है। केन्द्र को पहली बार किसी बाहरी राज्य की परियोजना में दी गई तकनीकी सेवाओं के बदले 04 लाख 21 हजार रुपये की राजस्व प्राप्ति हुई है। यह राशि केन्द्र द्वारा तैयार की गई डीपीआर और उपलब्ध कराई गई तकनीकी परामर्श सेवाओं के लिए प्राप्त हुई है। केन्द्र की स्थापना के बाद तकनीकी सेवाओं के माध्यम से अर्जित यह पहली राजस्व राशि है जो यूएलएमएमसी की बढ़ती तकनीकी क्षमता और आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि को दर्शाती है।
सचिव, आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन ने बताया कि उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जनपद के बादशाही बाग क्षेत्र में स्थित खारा हाइड्रो इलेक्ट्रिक परियोजना के भवन परिसर के समीप भूस्खलन की सक्रियता बढ़ने से परियोजना की सुरक्षा को खतरा उत्पन्न हो गया था। समस्या के तकनीकी समाधान और आवश्यक सुरक्षात्मक कार्यों के लिए उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड ने उत्तराखण्ड भूस्खलन एवं न्यूनीकरण केन्द्र से संपर्क किया। निगम की ओर से केन्द्र को भूस्खलन रोकथाम कार्यों की डीपीआर तैयार करने के साथ-साथ निर्माण कार्य के तकनीकी पर्यवेक्षण का दायित्व सौंपा गया।
इस कार्य को पूरा करने के लिए यूएलएमएमसी की तकनीकी टीम ने जनवरी 2025 में परियोजना स्थल का विस्तृत निरीक्षण किया। स्थल की भौगोलिक एवं तकनीकी परिस्थितियों का अध्ययन करने के बाद आवश्यक जांच और विश्लेषण के आधार पर डीपीआर तैयार की गई। डॉ. शांतनु सरकार, निदेशक, उत्तराखण्ड भूस्खलन न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केन्द्र के मार्गदर्शन में टीम ने डीपीआर तैयार करने से लेकर साइट सुपरविजन और अन्य तकनीकी कार्यों को पूरा किया। इस कार्य में सहायक अभियन्ता श्री कौस्तुभ बड़थ्वाल सहित तकनीकी दल का महत्वपूर्ण योगदान रहा। केन्द्र की तकनीकी संस्तुतियों के आधार पर भूस्खलन रोकथाम के लिए निर्माण कार्य अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है।
19 अगस्त 2026 को इस उपलब्धि को एक और महत्वपूर्ण पड़ाव मिला, जब उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड की ओर से डीपीआर एवं तकनीकी सेवाओं के लिए चेक सचिव, आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास एवं महानिदेशक, उत्तराखण्ड भूस्खलन एवं न्यूनीकरण केन्द्र, देहरादून को सौंपा गया। उल्लेखनीय है कि केन्द्र ने अपनी स्थापना के बाद पहली बार तकनीकी सेवाओं के माध्यम से राजस्व अर्जित किया है।
सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन ने बताया कि यूएलएमएमसी वर्तमान में भूस्खलन जोखिम को कम करने से जुड़े विभिन्न तकनीकी कार्यों में विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध करा रहा है। केन्द्र द्वारा डीपीआर तैयार करने, परियोजना प्रबंधन परामर्शी सेवाएं देने, भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों का तकनीकी निरीक्षण तथा भू-वैज्ञानिक, भू-भौतिकीय एवं भू-तकनीकी अध्ययन किए जा रहे हैं। इन कार्यों को प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए केन्द्र में विशेषज्ञ तकनीकी मानव संसाधन के साथ आधुनिक उपकरणों की सुविधा भी उपलब्ध है।
केन्द्र की तकनीकी क्षमता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब तक सिंचाई विभाग, लोक निर्माण विभाग सहित विभिन्न विभागों के लिए आठ से अधिक महत्वपूर्ण डीपीआर तैयार की जा चुकी हैं। खारा हाइड्रो इलेक्ट्रिक परियोजना के लिए प्रदान की गई तकनीकी सेवाओं के बदले मिली यह पहली राजस्व प्राप्ति केन्द्र के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि उत्तराखण्ड में भूस्खलन जोखिम न्यूनीकरण के क्षेत्र में विकसित विशेषज्ञता अब राज्य की सीमाओं से बाहर भी उपयोगी साबित हो रही है।


By Shashi Sharma

Shashi Sharma – Senior Woman Journalist

Shashi Sharma has been active in journalism since 1985, holding the distinction of being Uttarakhand's first female journalist.

For 36 years, starting in 1989, she rendered distinguished service to India's premier news agency, PTI. During this long tenure, she demonstrated the power of her writing on numerous significant occasions; notably, she spent two months in Tehri reporting positively on the Tehri Dam—which was then mired in controversy—and used her pen to help pave the way for its construction.

Currently, Mrs. Shashi Sharma runs the news portal *Newsok24.com* and serves as the editor of the weekly newspaper *Desh Nirdesh*; she is also a registered anchor and commentator for Delhi Doordarshan.

शशि शर्मा वरिष्ठ महिला पत्रकार शशि शर्मा उत्तराखंड की पहली महिला पत्रकार के तौर पर 1985 से पत्रकारिता में कार्यरत हैं। 1989 से 36 वर्षों तक उन्होंने भारत की शीर्ष समाचार एजेंसी पीटीआई के लिए अपनी सशक्त सेवाएं दीं। छत्तीस वर्षों की लंबी अवधि तक पीटीआई के लिए काम करते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण मौकों पर अपनी कलम का लोहा मनवाया, जिसमें दो महीने तक टिहरी में रहकर विवादों के संकट में रहे टिहरी बांध पर सकारात्मक रिपोर्टिंग कर अपनी कलम की ताकत से निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया। वर्तमान में श्रीमती शशि शर्मा Newsok24 com न्यूज पोर्टल को चला रहीं हैं और साप्ताहिक समाचार पत्र देश निर्देश की सम्पादक होने के साथ ही दिल्ली दूरदर्शन की रजिस्टर्ड एंकर और कमेंटेटर भी हैं।

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