गणतंत्र दिवस की शुभकामनायें

परमार्थ निकेतन में धूमधाम से मनाया 77 वां गणतंत्र दिवस

पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी व ऋषिकुमारों ने दैवी सम्पद् मण्डल महाविद्यालय, परमार्थ निकेतन में ध्वजा रोहण कर तिरंगे झंडे को दी सलामी*

स्वतंत्रता संग्राम के बलिदानियों व शहीदों को अर्पित की भावभीनी श्रद्धाजंलि*

परमार्थ विद्या मन्दिर व परमार्थ गुरूकुल में आयोजित किये रंगारंग कार्यक्रम*

स्वामी जी ने निरंतरता, गतिशीलता, कर्तव्यनिष्ठा का दिया संदेश*

ऋषिकेश। भारत की पवित्र भूमि से आकाश की ऊँचाइयों तक विकास, आत्मगौरव और संकल्प की गूँज को साकार करता हुआ 77वाँ गणतंत्र दिवस परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश में अत्यंत श्रद्धा, उत्साह और राष्ट्रभक्ति के भाव के साथ मनाया गया।

प्रातःकाल परमार्थ निकेतन के दैवी सम्पद् मण्डल महाविद्यालय प्रांगण में पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी के पावन सान्निध्य में ध्वजारोहण सम्पन्न हुआ। पूज्य स्वामी जी के साथ ऋषिकुमारों ने तिरंगे ध्वज को नमन कर राष्ट्रध्वज को सलामी दी। जैसे ही राष्ट्रध्वज शान से फहराया, सम्पूर्ण वातावरण “भारत माता की जय” और “वन्दे मातरम् के उद्घोष से गूंज उठा। यह दृश्य रोमांच, गर्व और गरिमा से परिपूर्ण था, जिसमें भारत सहित विश्व के अनेक देशों की विभूतियों ने सहभाग किया।

इस पावन अवसर पर पूज्य स्वामी जी एवं उपस्थित साधकों, विद्यार्थियों और श्रद्धालुओं ने स्वतंत्रता संग्राम के वीर बलिदानियों और अमर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उनके त्याग, तपस्या और सर्वाेच्च बलिदान को स्मरण करते हुये आज की विश्व शान्ति यज्ञ उन्हें समर्पित किया।

स्वामी जी ने कहा कि 77वां गणतंत्र दिवस भारत के शौर्य की अद्भुत गाथा है। यह भारत की आत्मा, अस्मिता और अखंड शौर्य का उत्सव है। यह वह दिन है जब त्याग, तपस्या और बलिदान से गढ़ी गई हमारी राष्ट्रकथा संविधान के रूप में जीवित हुई। हिमालय की अडिग ऊँचाइयों से लेकर सागर की अथाह गहराइयों तक, गंगा की पवित्रता से लेकर थार की तपते मरुभूमि तक, भारत शौर्य, साधना और समर्पण की अखंड गाथा है। भारत वीरता, करुणा और कर्तव्य का संगम है। हमारे सैनिकों का पराक्रम, किसानों का पुरुषार्थ, श्रमिकों का पसीना और युवाओं का स्वप्न, यही भारत की शक्ति है।

विविधता में एकता, लोकतंत्र में अनुशासन और परंपरा में प्रगति, यही भारत की पहचान है। यह गणतंत्र दिवस हमें संकल्प देता है कि हम राष्ट्रधर्म निभाएँ, संविधान का मान रखें और भारत को विश्वगुरु बनाने की यात्रा में समर्पित रहें।

पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि गणतंत्र दिवस हमें केवल अधिकारों की नहीं, बल्कि कर्तव्यों की भी याद दिलाता है। उन्होंने निरंतरता, गतिशीलता और कर्तव्यनिष्ठा को राष्ट्र निर्माण के तीन मजबूत स्तंभ बताते हुए कहा कि जब हर नागरिक अपने कर्तव्यों का पालन करेगा, तभी भारत सही अर्थों में विकसित राष्ट्र बनेगा।

पूज्य स्वामी जी ने कहा, “हमारा संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि भारत की आत्मा है। इसमें समावेशिता, करुणा, समानता और एकता का संदेश निहित है। आज आवश्यकता है कि हम संविधान के मूल्यों को अपने आचरण में उतारें और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझें।” उन्होंने आगे कहा कि भारत आज केवल सीमाओं के भीतर ही नहीं, बल्कि वैश्विक मंच पर भी अपनी आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और नैतिक शक्ति के माध्यम से नई पहचान बना रहा है।

पूज्य स्वामी जी ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि युवा शक्ति ही राष्ट्र की सबसे बड़ी ऊर्जा है। यदि युवा अपने जीवन में अनुशासन, सेवा और राष्ट्रप्रेम को अपनाएँ, तो भारत को विश्वगुरु बनने से कोई नहीं रोक सकता। उन्होंने कहा कि सेवा, साधना और समर्पण, ये तीन सूत्र भारत को आंतरिक रूप से सशक्त और बाह्य रूप से समर्थ बनाएँगे।

गणतंत्र दिवस के अवसर पर परमार्थ विद्या मंदिर एवं परमार्थ गुरुकुल के विद्यार्थियों द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। देशभक्ति गीतों, प्रेरणादायक नृत्यों और भावपूर्ण प्रस्तुतियों ने भारत की सांस्कृतिक विविधता, एकता और सनातन मूल्यों को जीवंत कर दिया। विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों में भारत के गौरवशाली अतीत, सशक्त वर्तमान और उज्ज्वल भविष्य की स्पष्ट झलक दिखाई दी।

77वाँ गणतंत्र दिवस राष्ट्र के प्रति समर्पण, सेवा और संकल्प का जीवंत उदाहरण है। जो भारत की माटी की सुगंध, आकाश की ऊँचाइयों को छूते सपनों के साथ, हर हृदय में देशप्रेम की लौ प्रज्वलित से ओतप्रोत कर रहा है।


By Shashi Sharma

Shashi Sharma Working in journalism since 1985 as the first woman journalist of Uttarakhand. From 1989 for 36 years, she provided her strong services for India's top news agency PTI. Working for a long period of thirty-six years for PTI, he got her pen ironed on many important occasions, in which, by staying in Tehri for two months, positive reporting on Tehri Dam, which was in crisis of controversies, paved the way for construction with the power of her pen. Delivered.

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