सांसद राज्यसभा डा. नरेश बंसल ने आज सदन मे सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या संशोधन विधेयक 2026 पर चर्चा मे भाग लिया व इस बिल का पूरजोर सर्मथन किया।
इस पर अपने विचार रखते हुए डा. नरेश बंसल ने कहा की सरकारें निरंतरता में काम करती हैं और सरकार लोकतंत्र में सदन के प्रति उत्तरदायी होती है। किन्तु जब सदन सत्र नहीं होता है और सरकार को आवश्यकता होती है तो अध्यादेश के माध्यम से भी सरकार कानूनों को स्थापित करने का काम करती है और जब सत्र आता तो उसमें उसको रखकर सदन में चर्चा कराकर के उसको पारित कराने का काम सरकार करती है।
डा. नरेश बंसल ने कहा कि यह विधेयक भी इसका अध्यादेश 2026 यह विधेयक सर्वोच्च न्यायालय न्यायाधीशों की संख्या संशोधन अध्यादेश 2026 का स्थान लेगा जिसमें उच्चतम न्यायालय में जजों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 एवं कुल मुख्य न्यायाधीश को मिलाकर 38 हो जाएगी। उपसभापति जी न्याय का मूल भाव है न्याय केवल संविधान का शब्द नहीं है। न्याय हर नागरिक का अधिकार है जब न्याय में देरी होती है तो केवल मुकदमा लंबित नहीं रहता नागरिक का विश्वास भी लंबित हो जाता है। उच्चतम न्यायालय में लंबित मामलों का अंाकड़ा बहुत बढ़ा है अभी हमने वक्ताओं में भी बताया कि 95,000 से भी अधिक मामले सर्वोच्च न्यायालय में लंबित हैं वर्ष 2025 में ही 75410 नये मामले आये जबकि 65,615 मामलों का निपटारा हुआ अर्थात लगभग 10,000 से अधिक मामले लंबित रह गये। यानी चुनौति केवल पुराने मामलों की नहीं है नए मामलों की भी लगातार आने की भी है। जब दाखिल होने वाले मामले निपटारे से अधिक हों तो व्यवस्था पर क्षमता बढाने का दबाव स्वाभाविक है। वर्तमान स्वीकृत संख्या 33 से बढ़ाकर 37 न्यायाधीश करने का प्रस्ताव है भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर संख्या 37 होगी। कुल परिचालन संख्या 38 हो जाएगी। 4 नए न्यायिक पदों के लिए प्रशासनिक ढ़ांचे एवं वित्तीय प्रावधान का इसमे उल्लेख है। यह केवल 4 पदों को बढ़ाने का विधेयक नहीं है यह न्याय देने की संस्थागत क्षमता बढ़ाने का विधेयक है। संविधान और आम नागरिक दस्तावेज में अनुच्छेद 21 के तहत त्वरित न्याय की संवैधानिक गांरटी को प्रभावी बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
डा. नरेश बंसल ने कहा कि धर्मो रक्षतिः रक्षतः यह श्लोक पूर्णत सार्थक है अर्थात जो धर्म न्याय की रक्षा करता है न्याय उसकी रक्षा करता है। न्यायपालिका जितनी मजबूत होगी संविधान उतना ही मजबूत होगा और संविधान जितना मजबूत होगा नागरिक उतना ही सुरक्षित होगा। 3,525 जनहित याचिकाएं पीआईएल लंबित होने का उल्लेख है इनमें 698 1 दशक से अधिक पुरानी है। और सबसे पुरानी पीआईएल 1984 की है। अगर हिसाब लगाए तो लगभग 40 साल उस पीआईएल के निपटारे को हो गए। 1984 में न्याय की तलाश में आया सवाल अगर दशकों बाद भी जवाब का इंतजार करे तो हमें व्यवस्था की क्षमता पर गंभीरता से विचार करना ही होगा। विधेयक का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य संविधान पीठों का नियमित और निरंतर गठन आसान करना भी बताया गया है। ताकि संवैधानिक महत्व के मामलों की सुनवाई नियमित अपीलीय कामकाज को प्रभावित किये बिना प्रभावी हो सके। संविधान के सवालों का समाधान वर्षों तक टलना नहीं चाहिए संविधान की व्याख्या जितनी स्पष्ट और समयबद्ध होगी लोकतंत्र उतना ही मजबूत होगा दस्तावेज में टेली लाॅ के माध्यम से 776 जिलों और ढाई लाख ग्राम पंचायतांे तक पहुंच तथा 1.12 करोड़ से अधिक मुकदमे पूर्व परामर्शों का उल्लेख है। न्याय का रास्ता नागरिक की जेब और उसकी दूसरों से दूरी से तय नहीं होना चाहिए। अंत में न्याय की राह में कोई दीवार ना हो आम नागरिक के मन में कोई लाचार नहीं आना हो संविधान का सम्मान तभी साकार होगा जब समय पर हर नागरिक को न्याय मिलेगा।


By Shashi Sharma

Shashi Sharma – Senior Woman Journalist

Shashi Sharma has been active in journalism since 1985, holding the distinction of being Uttarakhand's first female journalist.

For 36 years, starting in 1989, she rendered distinguished service to India's premier news agency, PTI. During this long tenure, she demonstrated the power of her writing on numerous significant occasions; notably, she spent two months in Tehri reporting positively on the Tehri Dam—which was then mired in controversy—and used her pen to help pave the way for its construction.

Currently, Mrs. Shashi Sharma runs the news portal *Newsok24.com* and serves as the editor of the weekly newspaper *Desh Nirdesh*; she is also a registered anchor and commentator for Delhi Doordarshan.

शशि शर्मा वरिष्ठ महिला पत्रकार शशि शर्मा उत्तराखंड की पहली महिला पत्रकार के तौर पर 1985 से पत्रकारिता में कार्यरत हैं। 1989 से 36 वर्षों तक उन्होंने भारत की शीर्ष समाचार एजेंसी पीटीआई के लिए अपनी सशक्त सेवाएं दीं। छत्तीस वर्षों की लंबी अवधि तक पीटीआई के लिए काम करते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण मौकों पर अपनी कलम का लोहा मनवाया, जिसमें दो महीने तक टिहरी में रहकर विवादों के संकट में रहे टिहरी बांध पर सकारात्मक रिपोर्टिंग कर अपनी कलम की ताकत से निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया। वर्तमान में श्रीमती शशि शर्मा Newsok24 com न्यूज पोर्टल को चला रहीं हैं और साप्ताहिक समाचार पत्र देश निर्देश की सम्पादक होने के साथ ही दिल्ली दूरदर्शन की रजिस्टर्ड एंकर और कमेंटेटर भी हैं।

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