*पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी को उनकी पुण्यतिथि पर परमार्थ निकेतन से भावभीनी श्रद्धाजंलि*

*मातृभूमि के अनन्य उपासक और राष्ट्र निर्माता, पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी*

*11 फरवरी, विज्ञान में महिलाओं और लड़कियों का अंतरराष्ट्रीय दिवस हमें स्मरण कराता है कि ज्ञान, जिज्ञासा और अनुसंधान का क्षेत्र किसी लिंग तक सीमित नहीं है। प्रत्येक लड़की में अद्भुत क्षमता और अन्वेषण की शक्ति है। यदि हम उन्हें शिक्षा, अवसर और प्रोत्साहन दें, तो वे समाज और राष्ट्र के निर्माण में अद्वितीय योगदान दे सकती हैं*

*🙏🏻स्वामी चिदानन्द सरस्वती*

ऋषिकेश, 11 फरवरी। परमार्थ निकेतन से आज पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की पुण्यतिथि पर उन्हें नमन करते हुये भावभीनी श्रद्धाजंलि अर्पित की। उन्होंने अपने जीवन को मूल्यों, नैतिकता और मातृभूमि की सेवा के लिए समर्पित किया। पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी देश की आत्मा और संस्कृति के सशक्त स्तंभ थे। उनका जीवन, उनके विचार और उनके सिद्धांत आज भी प्रत्येक भारतीय के लिए प्रेरणा, दिशा और आदर्श का स्रोत हैं।

पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी का व्यक्तित्व सादगी, दृढ़ता और समाज सेवा के प्रति समर्पण का प्रतीक था। उन्होंने जीवन भर यह संदेश दिया कि राष्ट्र की शक्ति केवल उसकी अर्थव्यवस्था या सैन्य शक्ति में नहीं, बल्कि उसके नागरिकों के चरित्र, मूल्यों और नैतिक चेतना में है। उन्होंने हमेशा यह माना कि समाज और राष्ट्र तभी सशक्त बन सकते हैं जब उसके प्रत्येक सदस्य में सदाचार, आत्मनिर्भरता और देशभक्ति का संचार हो।

उनके विचारों का केंद्र एकात्म मानववाद था। पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी ने इस दर्शन के माध्यम से यह स्पष्ट किया कि समाज का हर व्यक्ति, चाहे गरीब हो या अमीर, शिक्षित हो या अशिक्षित, वह राष्ट्र निर्माण में योगदान दे सकता है। उन्होंने हमेशा यह कहा कि असली विकास केवल भौतिक समृद्धि तक सीमित नहीं, बल्कि सामाजिक, मानसिक और आध्यात्मिक उत्थान में निहित है। उनका यह दृष्टिकोण आज भी देश के नीति-निर्माण, सामाजिक सेवा और युवा नेतृत्व के लिए मार्गदर्शक है।

पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी ने भारतीय संस्कृति और परंपराओं को आधुनिकता के साथ जोड़ने का अद्वितीय प्रयास किया। उनका मानना था कि मूल्य और विकास एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि सहायक हैं। उन्होंने समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए हमेशा प्रयास किए और उन्हें आत्मनिर्भर बनने का मार्ग दिखाया। उनके योगदान ने यह साबित किया कि सच्ची सेवा और राष्ट्रभक्ति का मार्ग केवल नीतियों में नहीं, बल्कि हर व्यक्ति के जीवन में उनके चरित्र और कार्यों में निहित है। उनके अनुसार, राष्ट्र की शक्ति उसके नागरिकों की चेतना, उनके मूल्यों और उनके साहस में निहित है।

आज जब देश विभिन्न सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है, पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के विचार और सिद्धांत और भी प्रासंगिक हो गए हैं। उनका संदेश यह है कि सशक्त समाज का निर्माण केवल सरकारी नीतियों पर निर्भर नहीं, बल्कि नागरिकों की सक्रिय भागीदारी, नैतिकता और मूल्य आधारित जीवन पर भी निर्भर है। उनका जीवन और कार्य हमें यह प्रेरणा देते है कि हम सभी अपने कर्तव्यों, अपने परिवार और समाज के प्रति जिम्मेदार हों और राष्ट्र के विकास में अपना योगदान दें। परमार्थ निकेतन से उनकी देशभक्ति को श्रद्धापूर्वक नमन करते हैं।


By Shashi Sharma

Shashi Sharma Working in journalism since 1985 as the first woman journalist of Uttarakhand. From 1989 for 36 years, she provided her strong services for India's top news agency PTI. Working for a long period of thirty-six years for PTI, he got her pen ironed on many important occasions, in which, by staying in Tehri for two months, positive reporting on Tehri Dam, which was in crisis of controversies, paved the way for construction with the power of her pen. Delivered.

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