श्री कांची कामकोटि पीठम् के 69वें जगद्गुरु शंकराचार्य, पूज्यपाद प्रातःस्मरणीय श्री जयेन्द्र सरस्वती महास्वामी जी का अवित्तम् (धनिष्ठा) जन्म नक्षत्र महोत्सव
उत्तर और दक्षिण का दिव्य आलिंगन
कांची की पावन भूमि पर सनातन चेतना का अलौकिक संगम
चतुर्थ कुम्भाभिषेकम् के पावन अवसर पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य श्री विजयेंद्र सरस्वती जी महाराज एवं पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी की दिव्य भेंट
श्री कांची कामकोटि पीठम की स्थापना जगद्गुरु आदि शंकर भगवान्पाद ने लगभग 2507 वर्ष पूर्व (509 ईसा पूर्व दृ 477 ईसा पूर्व) की थी
इस पावन अवसर पर सनातन संस्कृति, अयोध्या धाम, श्रीराम मन्दिर, युवाओं के संस्कारों के रोपण, दक्षिण व उत्तर का दिव्य संगम

नई दिल्ली। श्री कांची कामकोटि पीठम् के चतुर्थ कुम्भाभिषेकम् तथा 69वें जगद्गुरु शंकराचार्य, पूज्यपाद प्रातःस्मरणीय श्री जयेन्द्र सरस्वती जी के अवित्तम् (धनिष्ठा) जन्म नक्षत्र महोत्सव के पावन अवसर पर परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश के अध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी का दिव्य सान्निध्य प्राप्त हुआ।
लगभग ढाई सहस्राब्दियों पूर्व जगद्गुरु आदि शंकर भगवान्पाद द्वारा स्थापित श्री कांची कामकोटि पीठम् भारत की सनातन चेतना का जीवंत केन्द्र है। युगों से यह पीठ वेद, उपनिषद, शास्त्र, धर्म, संस्कृति और राष्ट्रधर्म के संरक्षण का दिव्य दायित्व का अद्भुत निर्वहन कर रही है। आज भी उसकी यह ज्योति सम्पूर्ण विश्व को भारतीय अध्यात्म का मार्ग दिखा रही है।
चतुर्थ कुम्भाभिषेकम् का यह महोत्सव एक धार्मिक अनुष्ठान के साथ आत्मशुद्धि, लोकमंगल और दिव्य ऊर्जा के पुनर्संचार का विराट उत्सव है। भगवान कार्तिकेय के पावन विग्रह का महाअभिषेक, वैदिक मंत्रों के दिव्य उच्चारण, यज्ञ की पवित्र अग्नि, अनेकों श्रद्धालुओं की सामूहिक प्रार्थनाएँ और पूज्य संतों का सान्निध्य प्राप्त हुआ। कुम्भाभिषेकम् प्रत्येक बारह वर्षों में सम्पन्न होने वाला यह महोत्सव भारतीय संस्कृति, दक्षिण एवं उत्तर का दिव्य संगम है।
इस दिव्य अवसर पर पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य श्री विजयेंद्र सरस्वती जी महाराज एवं पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी का आत्मीय संगम हुआ। यह उत्तर और दक्षिण भारत की आध्यात्मिक धाराओं का ऐसा आलिंगन है, जिसने यह संदेश दिया कि सनातन धर्म की शक्ति उसकी विविधता में निहित एकता है।
इस भेंट में वर्षों पुरानी आत्मीयता पुनः सजीव हो उठी। वर्ष 1975 से प्रारम्भ हुई यह आध्यात्मिक निकटता, पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य श्री चन्द्रशेखरेन्द्र सरस्वती महास्वामी जी, पूज्य श्री जयेन्द्र सरस्वती महास्वामी जी और अब पूज्य श्री विजयेंद्र सरस्वती जी महाराज के स्नेह एवं आशीर्वाद से निरन्तर पुष्पित-पल्लवित होती रही है। परमार्थ निकेतन और श्री कांची कामकोटि पीठम् का यह संबंध साझा आध्यात्मिक संकल्प, राष्ट्रनिर्माण और मानवता की सेवा का संबंध है।
पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य श्री विजयेंद्र सरस्वती जी महाराज को परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश पधारने का सादर आमंत्रण दिया जो कि मां गंगा और कावेरी, हिमालय और दक्षिण की ज्ञान परम्पराओं, तप और भक्ति, वेद और सेवा के पुनर्मिलन का आमंत्रण है।
दोनों पूज्य संतों ने इस बात पर भी गहन चिंता और आशा व्यक्त की कि भारत का भविष्य केवल आधुनिक शिक्षा से नहीं, बल्कि संस्कारयुक्त शिक्षा से निर्मित होगा। आज आवश्यकता है कि युवाओं के हृदय में भारतीय संस्कृति, गुरु-शिष्य परम्परा, परिवार, पर्यावरण, सेवा, करुणा और राष्ट्रप्रेम के बीज रोपे जाएँ। वही संस्कार आने वाले भारत को विश्व के लिए प्रकाशस्तम्भ बनाएँगे।
भारत की सांस्कृतिक शक्ति किसी भौगोलिक सीमा में बँधी नहीं है। हिमालय की तपःभूमि और दक्षिण की ज्ञानभूमि जब एक साथ खड़ी होती हैं, तब सम्पूर्ण भारत एक परिवार के रूप में दिखाई देता है। यही सनातन का स्वरूप है, जहाँ विविध परम्पराएँ हैं, परन्तु उद्देश्य एक है; अनेक भाषाएँ हैं, परन्तु भाव एक है; अनेक तीर्थ हैं, परन्तु चेतना एक है।
श्री कांची की इस पावन भूमि से उठी यह आध्यात्मिक ज्योति सम्पूर्ण विश्व को यह प्रेरणा देती है कि संस्कृति का संरक्षण केवल स्मृतियों से नहीं, बल्कि पूज्य संतों के जीवन और उनके साझा संकल्पों से होता है। यह दिव्य मिलन आने वाली पीढि़यों के लिए एक प्रेरक अध्याय रहेगा जहाँ उत्तर और दक्षिण ने मिलकर पुनः उद्घोष किया कि सनातन केवल एक परम्परा नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानवता के कल्याण का शाश्वत पथ है।


By Shashi Sharma

Shashi Sharma Working in journalism since 1985 as the first woman journalist of Uttarakhand. From 1989 for 36 years, she provided her strong services for India's top news agency PTI. Working for a long period of thirty-six years for PTI, he got her pen ironed on many important occasions, in which, by staying in Tehri for two months, positive reporting on Tehri Dam, which was in crisis of controversies, paved the way for construction with the power of her pen. Delivered.

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