कांवड़ यात्रा में सुरक्षा का मजबूत प्रहरी बना बी.ई.जी. रुड़की, सेना के गोताखोर बचा रहे श्रद्धालुओं की जान

जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के निर्देशन में आपदा राहत एवं बचाव व्यवस्था सुदृढ़, बी.ई.जी. रुड़की की दो टीमें 24 घंटे तैनात

सूबेदार कुलविंदर सिंह के नेतृत्व में सेना के प्रशिक्षित गोताखोर संवेदनशील घाटों पर मुस्तैद,कांवड़ कंट्रोल रूम से बनाए हुए हैं निरंतर समन्वय

हरिद्वार। पवित्र कांवड़ यात्रा के दौरान लाखों शिवभक्तों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन द्वारा व्यापक आपदा राहत एवं बचाव व्यवस्था की गई है। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर के नेतृत्व तथा आपदा प्रबंधन अधिकारी एवं प्रभारी कांवड़ कंट्रोल रूम श्रीमती मीरा रावत के समन्वयन में बी.ई.जी. (बंगाल इंजीनियर ग्रुप) रुड़की के प्रशिक्षित सेना के गोताखोरों की दो टीमें संवेदनशील स्थलों पर 24 घंटे मुस्तैदी के साथ तैनात हैं।
बी.ई.जी. रुड़की की एक टीम हरिद्वार के हाथी पुल क्षेत्र तथा दूसरी टीम रुड़की स्थित सोलानी पार्क के निकट तैनात है। गंगा के तेज बहाव एवं कांवड़ यात्रा के दौरान भारी भीड़ को देखते हुए सेना के ये प्रशिक्षित गोताखोर हर समय सतर्क रहकर किसी भी आपात स्थिति में तत्काल राहत एवं बचाव कार्य कर श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित कर रहे हैं। उनकी तत्परता, साहस एवं अनुशासित कार्यशैली के कारण हजारों शिवभक्त सुरक्षित वातावरण में गंगास्नान एवं गंगाजल भर पा रहे हैं।
राहत एवं बचाव टीम का नेतृत्व सूबेदार कुलविंदर सिंह कर रहे हैं। टीम कांवड़/आपदा कंट्रोल रूम के साथ निरंतर संपर्क एवं समन्वय बनाए रखते हुए हर आपात स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।
जिलाधिकारी मयूर दीक्षित एवं एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर के नेतृत्व में जिला प्रशासन, पुलिस एवं सेना के बीच उत्कृष्ट समन्वय स्थापित किया गया है, जिसके परिणामस्वरूप कांवड़ यात्रा को सुरक्षित, सुव्यवस्थित एवं सफल बनाने के लिए लगातार प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं।
बी.ई.जी. (बंगाल इंजीनियर ग्रुप) रुड़की के गोताखोरों की निस्वार्थ सेवा, साहस और कर्तव्यनिष्ठा इस महापर्व में मानवता एवं सेवा भावना का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत कर रही है। गंगा घाटों पर उनकी सतत मौजूदगी श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षा और विश्वास का मजबूत आधार बनी हुई है।


By Shashi Sharma

Shashi Sharma Working in journalism since 1985 as the first woman journalist of Uttarakhand. From 1989 for 36 years, she provided her strong services for India's top news agency PTI. Working for a long period of thirty-six years for PTI, he got her pen ironed on many important occasions, in which, by staying in Tehri for two months, positive reporting on Tehri Dam, which was in crisis of controversies, paved the way for construction with the power of her pen. Delivered.

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