श्रीराम कथा के समापन अवसर पर परमार्थ पीठाधीश्वर, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज का पावन सान्निध्य, आशीर्वाद और उद्बोधन
कथा व्यास संत श्री मुरलीधर जी के श्रीमुख से प्रवाहित हो रही मानस ज्ञान धारा का समापन
श्रावण के पावन आगमन पर 75,000 वृक्षारोपण महाअभियान का शुभारम्भ
कालिस्ता रिजॉर्ट, कापसहेड़ा, नई दिल्ली में श्रीराम कथा के समापन अवसर पर अध्यात्म, पर्यावरण और संस्कृति का अद्भुत संगम

गुरुग्राम, 27 जुलाई। परमार्थ पीठाधीश्वर, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज के पावन सान्निध्य में संत श्री मुरलीधर जी महराज के श्रीमुख से कालिस्ता रिजॉर्ट, कापसहेड़ा, नई दिल्ली में आयोजित दिव्य श्रीराम कथा का समापन हुआ।
प्रख्यात कथा व्यास संत श्री मुरलीधर जी के श्रीमुख से प्रवाहित हो रही दिव्य श्रीराम कथा के पावन समापन अवसर पर परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी का पावन सान्निध्य, आशीर्वाद एवं प्रेरणादायी उद्बोधन प्राप्त हुआ। कथा का समापन श्रावण मास के पावन आगमन से पूर्व हुआ जिससे कथा की पूर्णाहुति हरित महोत्सव के साथ हुयी।
पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि श्रीराम कथा का समापन और श्रावण माह का आगमन एक अद्भुत संयोग है। श्रावण प्रकृति, प्रार्थना और परमात्मा के साथ पुनः जुड़ने का दिव्य अवसर है। यही वह समय है जब धरती स्वयं हरित वस्त्र धारण करती है और सम्पूर्ण सृष्टि शिवमय हो उठती है। ऐसे पावन काल में पौधारोपण शिव आराधना, पृथ्वी की वंदना और भविष्य की सुरक्षा का आध्यात्मिक अनुष्ठान है।

पूज्य स्वामी जी ने कहा कि आज संसार जलवायु परिवर्तन, बढ़ते तापमान, प्रदूषण, जल संकट और जैव विविधता के विनाश जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। इन समस्याओं का समाधान केवल नीतियों से नहीं, बल्कि जनभागीदारी, जनचेतना और जनसंस्कार से सम्भव है। जब प्रत्येक परिवार अपने जीवन में कम से कम एक वृक्ष को परिवार का सदस्य मानकर उसका पालन करेगा, तभी पृथ्वी का संतुलन पुनः स्थापित होगा।

उन्होंने कहा, वृक्ष केवल ऑक्सीजन नहीं देते, वे हमें आशा देते हैं, फल देते हैं, भविष्य देते हैं वे हमारे जीवन को संरक्षण देते हैं। जहां पर वृक्षों का सम्मान होता है, वहाँ संस्कृति भी सुरक्षित रहती है और सभ्यता भी संरक्षित होती है।

पूज्य स्वामी जी ने आगे कहा कि भगवान श्रीराम का सम्पूर्ण जीवन प्रकृति के साथ गहरे संबंध का अद्भुत उदाहरण है। उनका वनवास दण्ड नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ दिव्य सह-अस्तित्व का संदेश है। पंचवटी, चित्रकूट, दण्डकारण्य और ऋषियों के आश्रम हमें संदेश देते हैं कि भारतीय संस्कृति में वन केवल जंगल नहीं, बल्कि ज्ञान, तप, संस्कृति और सभ्यता के जीवंत विश्वविद्यालय रहे हैं। इसलिए यदि हम वास्तव में श्रीराम जी को अपने जीवन में स्थापित करना चाहते हैं, तो हमें वृक्षों, नदियों, पर्वतों और सम्पूर्ण प्रकृति के प्रति वही श्रद्धा विकसित करनी होगी।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में हमारी आवश्यकता विकास की नहीं, बल्कि विवेकपूर्ण विकास की है, प्रगति के साथ प्रकृति का संतुलित भी जरूरी है। यदि विकास प्रकृति को नष्ट कर दे, तो वह विकास नहीं, विनाश है। इसलिए वृक्षारोपण को जनआन्दोलन बनाना होगा।
संत श्री मुरलीधर जी ने कहा कि भगवान श्रीराम का चरित्र हमें सत्य, मर्यादा, करुणा, कर्तव्य और समर्पण से युक्त धर्ममय जीवन जीने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि कथा तभी सार्थक होती है जब उसके संस्कार हमारे विचार, व्यवहार और चरित्र में दिखाई दें। श्रीराम ने हमें संदेश दिया कि परिस्थितियाँ कैसी भी हों, धर्म का मार्ग कभी नहीं छोड़ना चाहिए। आज के समय में समाज को श्रीराम के आदर्शों की सबसे अधिक आवश्यकता है। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में श्रीराम के एक भी गुण को धारण कर ले, तो परिवार, समाज और राष्ट्र में प्रेम, शांति, सद्भाव और नैतिकता का नया प्रकाश फैल सकता है।
इस अवसर पर श्री अशोक डिंगरा जी, श्री सुभाष डिंगरा जी एवं श्री मन्दीप डिंगरा जी ने पूज्य स्वामी जी के पावन सान्निध्य में उनके 75वें वर्ष में प्रवेश के उपलक्ष्य में 75,000 पौधों के रोपण का संकल्प दोहराया। इस महाअभियान का शुभारम्भ पूज्य स्वामी जी ने स्वयं प्रथम पौधा रोपित कर किया। जो कि पृथ्वी के भविष्य, आने वाली पीढ़ियों की साँसों और मानवता की आशा का बीजारोपण के शुभारम्भ का एक नन्हा संकल्प है।


By Shashi Sharma

Shashi Sharma Working in journalism since 1985 as the first woman journalist of Uttarakhand. From 1989 for 36 years, she provided her strong services for India's top news agency PTI. Working for a long period of thirty-six years for PTI, he got her pen ironed on many important occasions, in which, by staying in Tehri for two months, positive reporting on Tehri Dam, which was in crisis of controversies, paved the way for construction with the power of her pen. Delivered.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *