मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने ‘देवभूमि से विकास संवाद कॉन्क्लेव’ में किया प्रतिभाग

*मुख्यमंत्री ने कहा, उत्तराखंड में पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया से 35 हजार से अधिक युवाओं को मिली सरकारी नौकरी*

*महिला स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाना सरकार की प्राथमिकता : मुख्यमंत्री*

*विकास और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के पूरक, इकोलॉजी और इकोनॉमी के संतुलन के साथ आगे बढ़ रहा उत्तराखंड : मुख्यमंत्री*

*उत्तराखंड के मूल स्वरूप, सांस्कृतिक विरासत और भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए सरकार प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री*

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने आज होटल फेयरफील्ड, देहरादून में आयोजित ‘देवभूमि से विकास संवाद कॉन्क्लेव’ में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेश में पिछले वर्षों के दौरान हुए विकास कार्यों, युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने, महिला सशक्तिकरण, पलायन रोकने, पर्यटन को बढ़ावा देने, पर्यावरण संरक्षण तथा राज्य की सांस्कृतिक पहचान एवं मूल स्वरूप को सुरक्षित रखने के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों पर विस्तार से अपने विचार रखे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड सरकार ने युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने और भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए देश का सबसे सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया है। इसके परिणामस्वरूप राज्य में 35 हजार से अधिक युवाओं को निष्पक्ष एवं पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से सरकारी सेवाओं में चयनित होने का अवसर मिला है। इन भर्तियों में सामान्य परिवारों के बेटे-बेटियों को बिना किसी सिफारिश, भ्रष्टाचार अथवा नकल के अपनी योग्यता के आधार पर आगे बढ़ने का अवसर प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार ने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता स्थापित करने के साथ ही सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून सहित कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के निर्माण और विकास में मातृशक्ति का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। विशेषकर पर्वतीय क्षेत्रों में महिलाओं का जीवन बेहद कठिन परिस्थितियों में गुजरता है। वे परिवार की पूरी जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ खेती-बाड़ी, पशुपालन और अन्य आर्थिक गतिविधियों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसी योगदान को सम्मान देते हुए राज्य सरकार ने सरकारी नौकरियों में महिलाओं के लिए 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण की व्यवस्था की है। सरकार का प्रयास है कि महिलाओं को प्रत्येक क्षेत्र में समान अवसर और भागीदारी मिले तथा वे आत्मनिर्भर बनकर प्रदेश के विकास में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।

उन्होंने कहा कि राज्य में तीन लाख से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर स्वरोजगार और उद्यमिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रही हैं। इन समूहों द्वारा तैयार किए जा रहे स्थानीय उत्पादों की मांग देश-विदेश में बढ़ रही है। हाउस ऑफ हिमालयाज ब्रांड के माध्यम से उत्तराखंड के पारंपरिक उत्पादों को एक व्यापक बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है। इनमें सिलाई-बुनाई, मिलेट आधारित उत्पाद, पूजा सामग्री, त्योहारों से संबंधित उत्पाद, स्थानीय वस्त्र, हस्तशिल्प एवं स्मृति चिह्न सहित अनेक उत्पाद शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की महिलाओं के उत्पाद गुणवत्ता और कीमत के लिहाज से बड़े-बड़े बहुराष्ट्रीय ब्रांडों को भी प्रतिस्पर्धा देने की क्षमता रखते हैं।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा केदारनाथ धाम में 5 नवंबर, 2021 को व्यक्त किए गए ‘21वीं सदी का तीसरा दशक उत्तराखंड का दशक होगा’ के संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि जब वे प्रदेश की महिलाओं की मेहनत, इच्छाशक्ति और उनके द्वारा किए जा रहे नवाचारों को देखते हैं तो उन्हें पूरा विश्वास होता है कि मातृशक्ति उत्तराखंड को इस दशक में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य ने विकास की यात्रा में महत्वपूर्ण प्रगति की है, लेकिन यह यात्रा अभी समाप्त नहीं हुई है। प्रदेश को विकास के नए आयामों तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास करने होंगे।

राज्य के विकास से जुड़े सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास, नवाचार, विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कभी ठहराव नहीं आना चाहिए। उपलब्धियों से संतोष का भाव अवश्य होना चाहिए, लेकिन साथ ही और आगे बढ़ने का संकल्प भी बना रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की जनता की आकांक्षाएं बहुत बड़ी हैं और सरकार उन आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के संबंध में मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार प्रारंभ से ही युवाओं के प्रति समर्पित रही है। छात्र राजनीति और युवा मोर्चा के माध्यम से लंबे समय तक युवाओं के बीच कार्य करने के दौरान उन्होंने उनकी समस्याओं और अपेक्षाओं को नजदीक से समझा है। वर्ष 2021 में मुख्यमंत्री का दायित्व संभालने के बाद उन्होंने प्रदेश के सरकारी विभागों में रिक्त पदों को भरने का संकल्प लिया। उस समय लगभग 24 हजार पदों का बैकलॉग था। सरकार ने प्राथमिकता के आधार पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की और अब तक 35 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी सेवाओं में नियुक्तियां प्रदान की जा चुकी हैं। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि केवल सरकार की नहीं, बल्कि पूरी प्रशासनिक टीम और प्रदेश के युवाओं के परिश्रम एवं प्रतिभा का परिणाम है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि युवाओं को रोजगार के लिए अपने घर और गांव से दूर न जाना पड़े। इसी दिशा में पर्यटन, स्वरोजगार, होमस्टे, होटल व्यवसाय, टैक्सी संचालन, बागवानी और स्टार्टअप जैसे क्षेत्रों को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सीमांत क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। प्रधानमंत्री ने माणा गांव को देश का अंतिम गांव कहने के स्थान पर प्रथम गांव के रूप में पहचान देने का संदेश दिया था। इसके बाद सीमांत गांवों में आधारभूत सुविधाओं, संपर्क मार्गों, पर्यटन और आजीविका के साधनों के विकास को नई गति मिली है।

मुख्यमंत्री ने आदि कैलाश यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि इस क्षेत्र में पर्यटकों एवं श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इससे स्थानीय लोगों को होमस्टे, होटल, परिवहन और अन्य पर्यटन गतिविधियों के माध्यम से रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में स्टार्टअप की संख्या पहले लगभग 700 थी, जो अब बढ़कर लगभग 2,200 हो गई है। इसी प्रकार होमस्टे की संख्या लगभग 4 हजार से बढ़कर 8 हजार से अधिक हो गई है। होटल व्यवसाय और पर्यटन से जुड़े अन्य क्षेत्रों में भी निरंतर विस्तार हो रहा है। राज्य की प्रति व्यक्ति आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य का बजट वर्ष 2021 की तुलना में काफी बढ़ा है। प्रदेश की अर्थव्यवस्था और विकास गतिविधियों में तेजी आई है। नीति आयोग के सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) इंडेक्स में उत्तराखंड ने देश में प्रथम स्थान प्राप्त कर अपनी उपलब्धियों को प्रमाणित किया है। पर्यटन के क्षेत्र में भी राज्य को राष्ट्रीय स्तर पर लगातार सम्मान प्राप्त हो रहे हैं। वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में उत्तराखंड की पहचान मजबूत हो रही है। मसूरी, रामनगर, मुक्तेश्वर और अन्य पर्यटन स्थलों के साथ-साथ नए वेडिंग डेस्टिनेशन विकसित किए जा रहे हैं। इससे युवाओं, महिलाओं और स्थानीय उद्यमियों के लिए आजीविका के नए अवसर सृजित हो रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड जैसे हिमालयी राज्य के सामने विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना एक बड़ी जिम्मेदारी है। गंगा और यमुना जैसी पवित्र नदियों का उद्गम स्थल होने के साथ ही राज्य देश को जल, जीवन और प्राकृतिक संसाधन प्रदान करता है। प्रदेश का 70 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र वनाच्छादित है। यहां हिमालय, ग्लेशियर, वन संपदा और समृद्ध जैव विविधता मौजूद है। ऐसे में उत्तराखंड का दायित्व केवल अपने पर्यावरण को संरक्षित करना ही नहीं, बल्कि पूरे देश और विश्व के पर्यावरणीय संतुलन में योगदान देना भी है।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक वर्ष मानसून के दौरान अतिवृष्टि, बादल फटने, भूस्खलन और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के कारण प्रदेश को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इस वर्ष भी धराली सहित प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदाओं से भारी नुकसान हुआ है। चमोली, बागेश्वर, रुद्रप्रयाग, पौड़ी, देहरादून, हरिद्वार और चंपावत सहित अनेक क्षेत्रों में आपदा की घटनाएं सामने आई हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमालयी क्षेत्रों में आपदाओं को केवल अनियोजित निर्माण से जोड़कर देखना उचित नहीं है। कई ऐसे दुर्गम क्षेत्रों में भी बादल फटने और भूस्खलन की घटनाएं हुई हैं, जहां दूर-दूर तक निर्माण कार्य नहीं हुए हैं। जलवायु परिवर्तन और वैश्विक तापमान वृद्धि भी इन घटनाओं के महत्वपूर्ण कारण हैं। इसलिए पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी केवल हिमालयी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की नहीं, बल्कि पूरे विश्व की है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने विकास का ऐसा मॉडल अपनाया है, जिसमें इकोलॉजी और इकोनॉमी को एक-दूसरे का विरोधी नहीं, बल्कि पूरक माना गया है। विकास कार्यों के साथ प्रकृति, पर्यावरण और स्थानीय संसाधनों का संरक्षण भी सरकार की प्राथमिकता है। उत्तराखंड में ऐसा विकास सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताएं पूरी हों और आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्राकृतिक विरासत सुरक्षित रहे।

राज्य में विकास और राजनीतिक मुद्दों से जुड़े सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता केवल नारों और घोषणाओं के आधार पर नहीं, बल्कि सरकार के कार्यों और परिणामों के आधार पर अपना निर्णय लेती है। लोकतंत्र में जनता पांच वर्षों के कामकाज का मूल्यांकन करती है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की जनता जागरूक और विवेकशील है। सरकार के लिए विकास के साथ-साथ राज्य की सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक समरसता, देवभूमि की पवित्रता और मूल पहचान को सुरक्षित रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। सरकार का संकल्प है कि आने वाली पीढ़ियों को एक सुरक्षित, समृद्ध और अपनी सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा उत्तराखंड सौंपा जाए।

मुख्यमंत्री ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के संबंध में कहा कि यह उनकी पार्टी की विचारधारा के प्रमुख संकल्पों में से एक रहा है। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाना, अयोध्या में श्रीराम मंदिर का निर्माण और देश में समान नागरिक संहिता लागू करना पार्टी के महत्वपूर्ण संकल्प रहे हैं। उत्तराखंड को यह गौरव प्राप्त हुआ कि वह स्वतंत्र भारत में समान नागरिक संहिता लागू करने वाला पहला राज्य बना। उन्होंने कहा कि वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में प्रदेश की जनता के समक्ष यूसीसी लागू करने का संकल्प रखा गया था। जनता ने इस पर अपना विश्वास व्यक्त किया और सरकार ने अपना वादा पूरा किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लिव-इन रिलेशनशिप के संबंध में यूसीसी में किए गए प्रावधानों का उद्देश्य किसी की व्यक्तिगत स्वतंत्रता में हस्तक्षेप करना नहीं, बल्कि ऐसे संबंधों में रहने वाले व्यक्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि कई मामलों में संबंधों में विवाद, हिंसा और गंभीर आपराधिक घटनाएं सामने आती हैं। ऐसी परिस्थितियों में परिवारों को भी गहरा आघात पहुंचता है। इसलिए कानून में पंजीकरण और संबंधित प्रावधानों के माध्यम से सुरक्षा, जवाबदेही तथा आवश्यक जानकारी सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है।

निवेश और विकास परियोजनाओं के संबंध में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में अब तक लगभग एक लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों की ग्राउंडिंग हो चुकी है। इसके अतिरिक्त लगभग 24 से 25 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारने की तैयारी है। सरकार का प्रयास है कि निवेश प्रस्ताव केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि वास्तविक परियोजनाओं के रूप में विकसित होकर प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर सृजित करें।

मुख्यमंत्री ने युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि नशा केवल एक व्यक्ति का जीवन बर्बाद नहीं करता, बल्कि पूरे परिवार और समाज को प्रभावित करता है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे नशे को दृढ़ता से ‘ना’ कहें। विशेषकर विद्यालयों, महाविद्यालयों और छात्रावासों में पढ़ने वाले युवाओं को अपने मित्रों के दबाव में आकर किसी भी प्रकार के नशे की शुरुआत नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ केवल सरकार और पुलिस प्रशासन के प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति, अभिभावकों, शिक्षकों और युवाओं को भी जागरूकता अभियान में सक्रिय भागीदारी निभानी होगी। सामूहिक प्रयासों से ही उत्तराखंड को नशामुक्त बनाने का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार वर्तमान की आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ-साथ उत्तराखंड की आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए भी प्रतिबद्ध है। राज्य की विकास यात्रा निरंतर जारी रहेगी और सरकार रोजगार, स्वरोजगार, महिला सशक्तिकरण, पर्यटन, आधारभूत सुविधाओं तथा पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में नए संकल्पों के साथ आगे बढ़ती रहेगी।


By Shashi Sharma

Shashi Sharma – Senior Woman Journalist Shashi Sharma has been active in journalism since 1985, holding the distinction of being Uttarakhand's first female journalist. For 36 years, starting in 1989, she rendered distinguished service to India's premier news agency, PTI. During this long tenure, she demonstrated the power of her writing on numerous significant occasions; notably, she spent two months in Tehri reporting positively on the Tehri Dam—which was then mired in controversy—and used her pen to help pave the way for its construction. Currently, Mrs. Shashi Sharma runs the news portal *Newsok24.com* and serves as the editor of the weekly newspaper *Desh Nirdesh*; she is also a registered anchor and commentator for Delhi Doordarshan. शशि शर्मा वरिष्ठ महिला पत्रकार शशि शर्मा उत्तराखंड की पहली महिला पत्रकार के तौर पर 1985 से पत्रकारिता में कार्यरत हैं। 1989 से 36 वर्षों तक उन्होंने भारत की शीर्ष समाचार एजेंसी पीटीआई के लिए अपनी सशक्त सेवाएं दीं। छत्तीस वर्षों की लंबी अवधि तक पीटीआई के लिए काम करते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण मौकों पर अपनी कलम का लोहा मनवाया, जिसमें दो महीने तक टिहरी में रहकर विवादों के संकट में रहे टिहरी बांध पर सकारात्मक रिपोर्टिंग कर अपनी कलम की ताकत से निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया। वर्तमान में श्रीमती शशि शर्मा Newsok24 com न्यूज पोर्टल को चला रहीं हैं और साप्ताहिक समाचार पत्र देश निर्देश की सम्पादक होने के साथ ही दिल्ली दूरदर्शन की रजिस्टर्ड एंकर और कमेंटेटर भी हैं।

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