*देहरादून में आयोजित ‘शी फॉर स्टेम उत्तराखण्ड’ विषय पर आयोजित कार्याशाला में पहुंचे सीएम धामी* 

 *मुख्यमंत्री की घोषणा – शी फॉर स्टेम के तहत हर जनपद में पांच छात्राओं को छात्रवृत्ति प्रदान की जाएगी* 

 *स्टेम हेतु स्टार्टअप आरंभ करने के लिए में छात्राओं को वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे*

 *महिला प्रौद्योगिकी केंद्रों में स्वयं सहायता समूहो को जोड़ा जाएगा* 

*उत्तराखंड में मातृशक्ति के उत्थान को समर्पित धामी सरकार* 

*प्रदेश में 1.67 लाख से अधिक महिलाएं बनी लखपति दीदी* 

*ड्राप आउट छात्राओं को शिक्षा से जोड़ रही धामी सरकार* 

*बालिकाओं में विज्ञान एवं नवाचार के प्रति रुचि विकसित करने के लिए STEM आधारित कार्यक्रमों का किया जा रहा विस्तार*

 *‘शी फॉर स्टेम’ कार्यशाला में सीएम धामी ने 20 छात्राओं को दी 50-50 हजार की छात्रवृत्ति* 

 *मुख्यमंत्री ने किया एआई आधारित ‘क्यूरी चैट बॉट’ का शुभारंभ, छात्राओं को मिलेगा करियर मार्गदर्शन* 

 *STEM में 42-43% छात्राओं की भागीदारी भारत की ताकत: सीएम धामी*

 *राज्य में पहली विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति लागू* 

 *देहरादून में बन रही देश की पांचवीं साइंस सिटी* 

 *डिजिटल इंडिया से बेटियों को मिल रहा तकनीकी सशक्तिकरण* 

‘ *तीसरा दशक उत्तराखण्ड का दशक’—नारी सशक्तिकरण से होगा संकल्प साकार* 

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने अंतर्राष्ट्रीय महिला एवं बालिका विज्ञान दिवस के अवसर पर उत्तराखण्ड तकनीकी विश्वविद्यालय, सुद्धोवाला (प्रेमनगर, देहरादून) में आयोजित ‘शी फॉर स्टेम उत्तराखण्ड’ विषयक कार्यशाला में प्रतिभाग किया।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने ‘अंतर्राष्ट्रीय महिला एवं बालिका विज्ञान दिवस’ के अवसर पर सभी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं तथा कार्यशाला में उपस्थित सभी महानुभावों का अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री ने ‘शी फॉर स्टेम’ विशिष्ट कार्यक्रम के माध्यम प्रदेश की 20 प्रतिभाशाली बेटियों को 50-50 हजार रुपये की छात्रवृत्ति प्रदान की।मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने घोषणा की कि शी फॉर स्टेम के तहत हर जनपद में पांच छात्राओं को छात्रवृत्ति प्रदान की जाएगी |इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि स्टेम हेतु स्टार्टअप आरंभ करने के लिए में छात्राओं को वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे | महिला प्रौद्योगिकी केंद्रों में स्वयं सहायता समूहो को जोड़ा जाएगा |

मुख्यमंत्री ने प्रसन्नता व्यक्त की कि इस कार्यक्रम के माध्यम से होनहार बेटियों को STEM अर्थात साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथमेटिक्स के क्षेत्रों में शिक्षा एवं करियर के लिए प्रेरित किया जा रहा है। साथ ही दूरस्थ एवं सीमांत क्षेत्रों में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार को बढ़ावा देने तथा महिलाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए सार्थक प्रयास किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने इस कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए इन-मोबी, विज्ञानशाला इंटरनेशनल, यूकॉस्ट तथा उत्तराखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय सहित सभी आयोजकों को साधुवाद देते हुए कहा कि उन्होंने इस दूरदर्शी पहल को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय इतिहास साक्षी है कि नारीशक्ति केवल सामाजिक या पारिवारिक जीवन तक सीमित नहीं रही, बल्कि विज्ञान, दर्शन, खगोलशास्त्र एवं चिकित्सा जैसे क्षेत्रों में भी अग्रणी रही है। वैदिक काल में गार्गी और मैत्रेयी जैसी विदुषियाँ दार्शनिक विमर्श में अग्रणी थीं, जबकि लीलावती ने गणित के क्षेत्र में विश्व को दिशा प्रदान की। उन्होंने उल्लेख किया कि चरक-संहिता और सुश्रुत-संहिता जैसे आयुर्वेदिक ग्रंथों के विकास में भी स्त्रियों के योगदान के प्रमाण मिलते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आधुनिक काल में भी अनेक महिलाओं ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में असाधारण योगदान देकर देश का गौरव बढ़ाया है। स्वतंत्रता से पूर्व के समय में, जब महिलाओं के लिए घर से बाहर निकलना भी चुनौतीपूर्ण था, अन्ना मणि ने भारत की पहली महिला मौसम वैज्ञानिक बनकर इतिहास रचा और ‘वेदर वुमन ऑफ इंडिया’ के रूप में प्रसिद्ध हुईं। उन्होंने मौसम विज्ञान और वैज्ञानिक उपकरणों के विकास में अमूल्य योगदान दिया। इसी प्रकार कमला सोहोनी विज्ञान के क्षेत्र में पीएचडी प्राप्त करने वाली भारत की पहली महिला बनीं और यह सिद्ध किया कि प्रतिभा किसी बंधन की मोहताज नहीं होती।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान भारत में डॉ. टेसी थॉमस, जिन्हें ‘मिसाइल वुमन ऑफ इंडिया’ कहा जाता है, ने अग्नि-4 और अग्नि-5 जैसी महत्वपूर्ण मिसाइल परियोजनाओं का नेतृत्व कर देश की सामरिक शक्ति को नई ऊँचाइयाँ दी हैं। साथ ही ‘रॉकेट वुमन’ के नाम से प्रसिद्ध डॉ. ऋतु करिधल ने मंगलयान जैसे ऐतिहासिक मिशन की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाकर भारत को वैश्विक मंच पर गौरवान्वित किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इन सभी महान विभूतियों का जीवन यह संदेश देता है कि जब नारी को अवसर मिलता है तो वह न केवल अपने लिए मार्ग बनाती है, बल्कि पूरे राष्ट्र को नई दिशा देने का सामर्थ्य रखती है। उन्होंने कहा कि यह संयोग नहीं है कि आज भारत में STEM क्षेत्रों से स्नातक होने वाले विद्यार्थियों में लगभग 42–43 प्रतिशत छात्राएँ हैं, जो कई विकसित देशों की तुलना में अधिक है। यह आँकड़ा इस बात का प्रमाण है कि भारत की बेटियाँ विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अभियांत्रिकी और गणित के क्षेत्रों में आगे बढ़ रही हैं तथा नेतृत्व की भूमिका निभाने के लिए पूर्णतः तैयार हैं।

उन्होंने कहा कि अब आवश्यकता इस बात की है कि बेटियों को अवसर, संसाधन और विश्वास देकर उनके सपनों को उड़ान दी जाए, ताकि वे अपने भविष्य के साथ-साथ विकसित भारत के संकल्प को भी साकार करने में योगदान दे सकें।

मुख्यमंत्री श्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का स्पष्ट मत है कि इक्कीसवीं सदी में भारत की प्रगति विज्ञान और तकनीकी नवाचार पर निर्भर करेगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अभूतपूर्व ऊँचाइयाँ प्राप्त की हैं। कोरोना वैक्सीन निर्माण, चंद्रयान-3, आदित्य L1 और गगनयान मिशन जैसी उपलब्धियों ने देश को नए कीर्तिमान स्थापित करने का अवसर दिया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि डिजिटल इंडिया अभियान के अंतर्गत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और क्लाउड कंप्यूटिंग जैसी उन्नत तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे भारत वैश्विक तकनीकी क्रांति में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। प्रधानमंत्री का मानना है कि किसी भी राष्ट्र की प्रगति इस बात पर निर्भर करती है कि उसकी आधी आबादी तकनीकी रूप से कितनी सक्षम है और नवाचार के क्षेत्र में कितना योगदान दे रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी दृष्टिकोण के साथ महिलाओं और बेटियों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने के लिए अनेक कदम उठाए गए हैं। डिजिटल इंडिया अभियान के माध्यम से महिलाओं की डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा दिया गया है। STEM शिक्षा में बालिकाओं की भागीदारी बढ़ाने हेतु राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न योजनाएँ संचालित की जा रही हैं। विज्ञान ज्योति कार्यक्रम के माध्यम से कक्षा 9 से 12 तक की बालिकाओं को प्रेरित किया जा रहा है, जबकि प्रगति छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत इंजीनियरिंग में डिप्लोमा एवं डिग्री प्राप्त करने वाली छात्राओं को प्रतिवर्ष 50 हजार रुपये की छात्रवृत्ति प्रदान की जा रही है। इंस्पायर योजना के माध्यम से प्रतिभाशाली छात्राओं को विज्ञान एवं अनुसंधान के क्षेत्र में उच्च शिक्षा के लिए सहायता दी जा रही है। अटल इनोवेशन मिशन के अंतर्गत स्थापित अटल टिंकरिंग लैब्स में बालिकाओं को रोबोटिक्स, कोडिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नवाचार से जुड़ने का अवसर मिल रहा है। महिला वैज्ञानिक योजना के अंतर्गत महिलाओं को अनुसंधान हेतु फैलोशिप प्रदान की जा रही है। केंद्रीय बजट 2026-27 में भी महिलाओं एवं बालिकाओं की उच्च शिक्षा तथा STEM में भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए ठोस प्रावधान किए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री की प्रेरणा से राज्य सरकार भी उत्तराखंड में विज्ञान एवं तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने के लिए कृतसंकल्पित है। राज्य की पहली विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति लागू की गई है तथा टेक्नोलॉजी, डिजिटल गवर्नेंस, शोध एवं विकास के अनुरूप सुदृढ़ इकोसिस्टम विकसित किया जा रहा है। राज्य में साइंस एवं इनोवेशन सेंटर्स, लैब्स ऑन व्हील्स, जीएसआई डैशबोर्ड, डिजिटल लाइब्रेरी, पेटेंट सूचना केंद्र और स्टेम लैब्स के माध्यम से विश्वस्तरीय अवसंरचना तैयार की जा रही है। एआई, रोबोटिक्स, ड्रोन, सेमीकंडक्टर और प्री-इनक्यूबेशन लैब की स्थापना को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। देहरादून में देश की पांचवीं साइंस सिटी का निर्माण कार्य प्रगति पर है, जो शीघ्र पूर्ण होकर राज्य को विज्ञान एवं नवाचार के क्षेत्र में नई पहचान देगा।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह साइंस सिटी उत्तराखंड को विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार के क्षेत्र में वैश्विक डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। राज्य सरकार का उद्देश्य है कि बेटियाँ बिना किसी बाधा के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आगे बढ़ सकें और देश-प्रदेश के विकास में अपनी भूमिका निभा सकें।

मुख्यमंत्री ने वर्ष 2021 में बाबा केदार की पावन भूमि से प्रधानमंत्री द्वारा व्यक्त कथन—“21वीं सदी का तीसरा दशक उत्तराखंड का दशक होगा”—का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार ‘विकल्प रहित संकल्प’ के साथ इसे साकार करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि यह संकल्प तभी सिद्ध होगा जब उत्तराखंड की प्रत्येक बेटी सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनकर प्रदेश के समग्र विकास में समान रूप से सहभागी बनेगी।

मुख्यमंत्री ने पूर्ण विश्वास व्यक्त किया कि ‘शी फॉर स्टेम’ जैसे प्रयास प्रदेश की बेटियों को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए प्रेरित करेंगे तथा वे अपने ज्ञान, कौशल और समर्पण से देश और प्रदेश की प्रगति एवं समृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान देंगी।

कार्यक्रम में विधायक श्री सहदेव सिंह पुंडीर, सचिव श्री रंजीत सिन्हा, महानिदेशक यूकॉस्ट प्रो. दुर्गेश पंत सहित छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।


By Shashi Sharma

Shashi Sharma – Senior Woman Journalist

Shashi Sharma has been active in journalism since 1985, holding the distinction of being Uttarakhand's first female journalist.

For 36 years, starting in 1989, she rendered distinguished service to India's premier news agency, PTI. During this long tenure, she demonstrated the power of her writing on numerous significant occasions; notably, she spent two months in Tehri reporting positively on the Tehri Dam—which was then mired in controversy—and used her pen to help pave the way for its construction.

Currently, Mrs. Shashi Sharma runs the news portal *Newsok24.com* and serves as the editor of the weekly newspaper *Desh Nirdesh*; she is also a registered anchor and commentator for Delhi Doordarshan.

शशि शर्मा वरिष्ठ महिला पत्रकार शशि शर्मा उत्तराखंड की पहली महिला पत्रकार के तौर पर 1985 से पत्रकारिता में कार्यरत हैं। 1989 से 36 वर्षों तक उन्होंने भारत की शीर्ष समाचार एजेंसी पीटीआई के लिए अपनी सशक्त सेवाएं दीं। छत्तीस वर्षों की लंबी अवधि तक पीटीआई के लिए काम करते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण मौकों पर अपनी कलम का लोहा मनवाया, जिसमें दो महीने तक टिहरी में रहकर विवादों के संकट में रहे टिहरी बांध पर सकारात्मक रिपोर्टिंग कर अपनी कलम की ताकत से निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया। वर्तमान में श्रीमती शशि शर्मा Newsok24 com न्यूज पोर्टल को चला रहीं हैं और साप्ताहिक समाचार पत्र देश निर्देश की सम्पादक होने के साथ ही दिल्ली दूरदर्शन की रजिस्टर्ड एंकर और कमेंटेटर भी हैं।

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