वाणिज्य मंत्रालय ने उत्तराखंड में आयुष एवं हर्बल क्षेत्र के लिए एफटीए (FTAs) के लाभ उठाने पर क्षेत्रीय आउटरीच कार्यक्रम का आयोजन किया

– कार्यक्रम “आयुष एवं हर्बल के लिए एफटीए का लाभ उठाना और उत्तराखंड के लिए अवसर” विषय पर आधारित रहा

– कार्यक्रम ने उत्तराखंड के स्थानीय हितधारकों को उभरते निर्यात अवसरों को समझने के लिए एक मंच प्रदान किया

– “सरकारी पहलों से सुदृढ़ हुआ आयुष निर्यात इकोसिस्टम; वैश्विक बाजार तक पहुंच और गुणवत्ता मानकों में हुआ ऐतिहासिक सुधार”

मंगलवार को सगन्ध पौधा केंद्र सेलाकुई, देहरादून में व्यापार, निर्यात और क्षेत्रीय विकास में पिछले बारह वर्षों के दौरान हासिल उपलब्धियों पर भारत सरकार के वाणिज्य मंत्रालय ने आयुष मंत्रालय और आयुष निर्यात संवर्धन परिषद के सहयोग से क्षेत्रीय आउटरीच कार्यक्रम और प्रेस वार्ता का आयोजन किया। यह कार्यक्रम “आयुष एवं हर्बल के लिए फ्री ट्रेड अग्रीमेंट्स (एफटीए) का लाभ उठाने और उत्तराखंड के लिए अवसर” विषय पर आधारित रहा।

इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य निर्यातकों, निर्माताओं, एमएसएमई, स्टार्टअप्स, उद्योग प्रतिनिधियों, राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरणों और अन्य हितधारकों के बीच भारत के मुक्त व्यापार समझौतों से उभरते अवसरों, निर्यात संवर्धन पहलों और आयुष उत्पादों व सेवाओं की बढ़ती वैश्विक मांग के बारे में जागरूकता पैदा करना था।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आयुष मंत्रालय के संयुक्त सलाहकार, श्री देबाशीष पांडा ने हाल के वर्षों में आयुष क्षेत्र में हुई महत्वपूर्ण प्रगति पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि नीतिगत सुधारों, गुणवत्ता आश्वासन पहलों, नियामक सुदृढ़ीकरण और भारत की पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को मिल रही बढ़ती अंतर्राष्ट्रीय मान्यता ने इस विकास को गति दी है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रिवेंटिव हेल्थकेयर (निवारक स्वास्थ्य देखभाल), वेलनेस और पारंपरिक चिकित्सा में बढ़ती वैश्विक रुचि ने अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में भारतीय आयुष उत्पादों और सेवाओं के लिए नए अवसर पैदा किए हैं।

वाणिज्य विभाग के संयुक्त सचिव, श्री अमित वर्मा ने व्यापार सुगमीकरण, डिजिटल परिवर्तन, निर्यात संवर्धन पहलों और मुक्त व्यापार समझौतों के माध्यम से बाजार पहुंच के विस्तार द्वारा भारत के निर्यात पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए पिछले दशक में सरकार द्वारा किए गए निरंतर प्रयासों को रेखांकित किया। उन्होंने उल्लेख किया कि व्यापार करने में आसानी (इज ऑफ डूइंग बिजनेस) में सुधार, अनुपालन के बोझ को कम करने और विभिन्न क्षेत्रों में वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के उद्देश्य से किए गए सुधारों की बदौलत भारत का निर्यात रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। उन्होंने आगे कहा कि आयुष को सरकार की निर्यात संवर्धन पहलों के तहत एक प्राथमिकता वाले क्षेत्र के रूप में मान्यता दी गई है, जो व्यापार, कल्याण (वेलनेस) और रोजगार सृजन में इसके बढ़ते योगदान को दर्शाता है।

कार्यक्रम में मार्केट इंटेलिजेंस, क्षमता निर्माण, क्रेता-विक्रेता बैठकों, अंतर्राष्ट्रीय आउटरीच कार्यक्रमों और नियामक अनुपालन के लिए सहायता के माध्यम से आयुष और हर्बल उत्पादों के निर्यात को सुगम बनाने में AYUSHEXCIL की भूमिका पर भी प्रकाश डाला गया। प्रतिभागियों को आयुष उत्पादों की बढ़ती वैश्विक मांग और विदेशी बाजारों में उपलब्ध विस्तारित अवसरों से अवगत कराया गया।

चर्चा के दौरान भारत के व्यापार समझौतों और प्रमुख भागीदार देशों के साथ चल रहे समझौतों से उत्पन्न अवसरों पर ध्यान केंद्रित किया गया। प्रतिभागियों को आयुष उत्पादों, औषधीय पौधों, हर्बल अर्क, न्यूट्रास्यूटिकल्स और वेलनेस सेवाओं के लिए बेहतर बाजार पहुंच, नियामक सहयोग, गुणवत्ता प्रमाणन ढांचे और निर्यात सुगमीकरण उपायों के संभावित लाभों के बारे में जानकारी दी गई।

कार्यक्रम में आयुष उत्पादों की गुणवत्ता, विश्वसनीयता और वैश्विक स्वीकार्यता को मजबूत करने के लिए सरकार द्वारा शुरू की गई विभिन्न पहलों पर भी प्रकाश डाला गया, जिसमें अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत गुणवत्ता मानकों को बढ़ावा देना, प्रमाणन प्रणाली, डिजिटल नियामक प्रणालियां और उद्योग के हितधारकों के लिए क्षमता निर्माण के उपाय शामिल हैं।

औषधीय और सुगंधित पौधों में उत्तराखंड के समृद्ध संसाधन आधार और आयुष तथा वेलनेस पारिस्थितिकी तंत्र में इसकी स्थापित उपस्थिति को देखते हुए, इस कार्यक्रम ने स्थानीय हितधारकों को उभरते निर्यात अवसरों को समझने और निर्यात, अनुपालन आवश्यकताओं व बाजार पहुंच से जुड़े मुद्दों पर विशेषज्ञों के साथ सीधे बातचीत करने का एक प्रभावी मंच प्रदान किया।

एक इंटरैक्टिव सत्र के माध्यम से प्रतिभागियों को निर्यात प्रक्रियाओं, नियामक आवश्यकताओं, गुणवत्ता मानकों और भारत के विकसित होते व्यापार ढांचे के तहत उपलब्ध अवसरों के संबंध में प्रश्न पूछने और अपने सुझाव साझा करने का अवसर मिला। कार्यक्रम का समापन प्रेस वार्ता और हितधारक जुड़ाव सत्र के साथ हुआ।

यह आउटरीच कार्यक्रम व्यापार सुगमीकरण, निर्यात संवर्धन, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और वैश्विक बाजारों के साथ भारतीय पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों के बढ़ते एकीकरण के माध्यम से आयुष क्षेत्र को मजबूत करने की सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराता है।


By Shashi Sharma

Shashi Sharma – Senior Woman Journalist

Shashi Sharma has been active in journalism since 1985, holding the distinction of being Uttarakhand's first female journalist.

For 36 years, starting in 1989, she rendered distinguished service to India's premier news agency, PTI. During this long tenure, she demonstrated the power of her writing on numerous significant occasions; notably, she spent two months in Tehri reporting positively on the Tehri Dam—which was then mired in controversy—and used her pen to help pave the way for its construction.

Currently, Mrs. Shashi Sharma runs the news portal *Newsok24.com* and serves as the editor of the weekly newspaper *Desh Nirdesh*; she is also a registered anchor and commentator for Delhi Doordarshan.

शशि शर्मा वरिष्ठ महिला पत्रकार शशि शर्मा उत्तराखंड की पहली महिला पत्रकार के तौर पर 1985 से पत्रकारिता में कार्यरत हैं। 1989 से 36 वर्षों तक उन्होंने भारत की शीर्ष समाचार एजेंसी पीटीआई के लिए अपनी सशक्त सेवाएं दीं। छत्तीस वर्षों की लंबी अवधि तक पीटीआई के लिए काम करते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण मौकों पर अपनी कलम का लोहा मनवाया, जिसमें दो महीने तक टिहरी में रहकर विवादों के संकट में रहे टिहरी बांध पर सकारात्मक रिपोर्टिंग कर अपनी कलम की ताकत से निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया। वर्तमान में श्रीमती शशि शर्मा Newsok24 com न्यूज पोर्टल को चला रहीं हैं और साप्ताहिक समाचार पत्र देश निर्देश की सम्पादक होने के साथ ही दिल्ली दूरदर्शन की रजिस्टर्ड एंकर और कमेंटेटर भी हैं।

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