परमार्थ निकेतन में मलूक पीठाधीश्वर पूज्य स्वामी श्री राजेन्द्र दास जी महाराज का दिव्य आगमन
गो सम्मान आह्वान अभियान का शुभारम्भ हेतु किया अभिनन्दन
परमार्थ निकेतन से गूँजा गौ संरक्षण, संस्कृति संवर्द्धन और राष्ट्र निर्माण का संकल्प
आज चंद्रयान-3 के सफल प्रक्षेपण की वर्षगाँठ पर परमार्थ निकेतन से भारत के वैज्ञानिकों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ
ऋषिकेश, 14 जुलाई। परमार्थ निकेतन में आध्यात्मिकता, राष्ट्रचेतना और सनातन संस्कृति का अद्भुत संगम हुआ। मलूक पीठाधीश्वर पूज्य स्वामी श्री राजेन्द्र दास जी महाराज का परमार्थ निकेतन में आगमन हुआ। पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज के साथ आत्मीय भेंटवार्ता हुई। दोनों पूज्य संतों ने सनातन संस्कृति, भारतीय जीवन-मूल्यों, गौ संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य के विषयों पर चिंतन-मंथन किया।
इस अवसर पर परम पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने पूज्य स्वामी श्री राजेन्द्र दास जी महाराज का परमार्थ निकेतन में अभिनन्दन करते हुए कहा कि भारत की आध्यात्मिक शक्ति सदैव संतों के तप, त्याग और सेवा से पुष्ट होती रही है। जब संत समाज किसी महान उद्देश्य के लिए एकजुट होते हैं, तब वह उद्देश्य केवल समाज को दिशा ही नहीं देता, बल्कि राष्ट्र के भविष्य का मार्ग भी प्रशस्त करता है।
गो सम्मान आह्वान- सनातन क्रान्ति की नूतन अभिनव पहल का शुभारम्भ करने हेतु पूज्य स्वामी जी ने पूज्य स्वामी श्री राजेन्द्र दास जी महाराज द्वारा संचालित इस अभिनव पहल का अभिनन्दन करते हुये सभी को इस अभियान से जुड़ने का आह्वान करते हुये कहा कि इसका उद्देश्य केवल गौ संरक्षण तक सीमित नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, प्राकृतिक कृषि, पर्यावरण संरक्षण और मानवीय संवेदनाओं को सशक्त बनाना भी है।
पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि गौ केवल एक पशु नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, प्रकृति और करुणा की जीवंत अभिव्यक्ति है। गौ सेवा अर्थात् जैव विविधता, पर्यावरण, कृषि, ग्राम्य जीवन और मानवीय मूल्यों की रक्षा भी है। उन्होंने कहा कि प्रकृति और संस्कृति का संरक्षण साथ-साथ चलने पर ही मानवता का भविष्य सुरक्षित रह सकता है।
अपने प्रेरक उद्बोधन में मलूक पीठाधीश्वर पूज्य स्वामी श्री राजेन्द्र दास जी महाराज ने कहा कि गौ संरक्षण किसी एक संगठन या समुदाय का विषय नहीं, बल्कि सम्पूर्ण समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि भारत की आत्मा उसकी संस्कृति, करुणा और सह-अस्तित्व की भावना में बसती है। जब तक हम अपनी जड़ों, अपनी परम्पराओं और अपनी सांस्कृतिक चेतना से जुड़े रहेंगे, तब तक हमारा राष्ट्र सदैव सशक्त बना रहेगा।
उन्होंने कहा कि पूज्य स्वामी जी महाराज के पावन सान्निध्य में परमार्थ निकेतन से राष्ट्र भक्ति, सनातन संस्कृति, सेवा, करुणा, सह-अस्तित्व, प्रकृति के प्रति सम्मान और समस्त सृष्टि के कल्याण की गंगा निरंतर प्रवाहित होती है।
पूज्य स्वामी श्री राजेन्द्र दास जी महाराज ने कहा कि गो सम्मान अभियान का उद्देश्य समाज में सकारात्मक जागरूकता लाना है। अभियान के प्रमुख संकल्पों में सम्पूर्ण भारत में गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध, देसी गोवंश का संरक्षण एवं संवर्धन, गौमाता को राष्ट्रीय सम्मान प्रदान करने की दिशा में जनजागरण, गो सेवा हेतु प्रभावी नीति एवं कानून, गो आधारित प्राकृतिक कृषि को बढ़ावा, चारा सुरक्षा नीति, पंचगव्य आधारित उत्पादों के निर्माण एवं विपणन को प्रोत्साहन तथा शिक्षा में गौ महात्म्य और भारतीय जीवन-दर्शन को समाहित करने जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अभियान किसी प्रकार के विरोध का नहीं, बल्कि जागरूकता, संवेदना, सेवा और जनभागीदारी का अभियान है। इसका उद्देश्य समाज को जोड़ना, करुणा का विस्तार करना तथा भारत की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए सकारात्मक वातावरण तैयार करना है।
परम पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने पूज्य स्वामी श्री राजेन्द्र दास जी महाराज को रूद्राक्ष का पौधा भेंट करते हुये कहा कि आपके व्यक्तित्व में विद्वता, विनम्रता और विवेकशीलता का अद्भुत संगम हैं। आपका जीवन भारतीय संत परम्परा के उन उच्च आदर्शों का प्रतिनिधित्व करता है जहाँ ज्ञान के साथ सेवा, आध्यात्मिकता के साथ सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्रभक्ति के साथ मानवता का भाव सहज रूप से प्रवाहित होता है।
आज चंद्रयान-3 के सफल प्रक्षेपण की वर्षगाँठ पर भारत के वैज्ञानिकों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ अर्पित की गईं। पूज्य स्वामी जी ने कहा कि भारत की वैज्ञानिक उपलब…


By Shashi Sharma

Shashi Sharma Working in journalism since 1985 as the first woman journalist of Uttarakhand. From 1989 for 36 years, she provided her strong services for India's top news agency PTI. Working for a long period of thirty-six years for PTI, he got her pen ironed on many important occasions, in which, by staying in Tehri for two months, positive reporting on Tehri Dam, which was in crisis of controversies, paved the way for construction with the power of her pen. Delivered.

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