परमार्थ निकेतन में आयोजित 34 दिवसीय श्री राम कथा को विराम

अनेक संकल्पों, संस्कारों और पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ सम्पन्न हुई मानस कथा

वीरता, स्वाभिमान और मेवाड़ के शेर, राष्ट्रभक्ति के प्रतीक महाराणा प्रताप जी की जयंती पर परमार्थ निकेतन से उनकी साधना को नमन

जीजाबाई की पुण्यतिथि पर परमार्थ निकेतन से भावभीनी श्रद्धांजलि, नमन

ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन में आयोजित 34 दिवसीय दिव्य एवं भव्य श्री राम कथा का आज भावपूर्ण समापन हुआ। कथा के समापन अवसर पर परमार्थ निकेतन के पीठाधीश्वर, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी, परमार्थ निकेतन की अन्तर्राष्ट्रीय अध्यक्ष, साध्वी भगवती सरस्वती जी, डॉ. परमहंस श्री रामप्रसाद जी महाराज तथा पूज्य बापू जी का पावन सान्निध्य, आशीर्वाद एवं प्रेरणादायी उद्बोधन प्राप्त हुआ।

पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने 34 दिवसीय श्रीराम मानस कथा के विराम अवसर पर मानस कथा व्यास संत मुरलीधर जी, भक्तिमति मीना जी एवं सम्पूर्ण कुलरिया परिवार को धन्यवाद देते हुए कहा कि उनके समर्पण, श्रद्धा और सेवाभाव ने इस कथा को केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि जन-जन के जीवन को संस्कारित करने वाले आध्यात्मिक महायज्ञ का स्वरूप प्रदान किया। कथा के साथ विशाल भंडारे की व्यवस्था, सैकड़ों श्रद्धालुओं के लिये सुविधाजनक आश्रय तथा निरंतर कथा श्रवण का दिव्य अवसर उपलब्ध कराना वास्तव में अनुकरणीय सेवा है।

पूज्य स्वामी जी ने कहा कि श्रीराम कथा का वास्तविक सार केवल कथा सुनने में नहीं, बल्कि उसे जीवन में उतारने में है। परिस्थितियाँ कैसी भी हों, जीवन में कितने भी उतार-चढ़ाव आएँ, यदि हमारी आंतरिक स्थिति स्थिर, शांत और सकारात्मक बनी रहे, तो वही कथा का सच्चा संदेश है। बाहरी परिस्थितियों को हम सदैव नियंत्रित नहीं कर सकते, परंतु अपने विचारों, भावनाओं और दृष्टिकोण को अवश्य नियंत्रित कर सकते हैं। यही आध्यात्मिकता है, यही रामत्व है।

पूज्य स्वामी जी ने कहा कि वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप का संपूर्ण जीवन मेवाड़ की संप्रभुता, अस्मिता और गौरवशाली परम्पराओं की रक्षा के लिए समर्पित रहा। उन्होंने राजस्थान की पुण्यभूमि का स्मरण करते हुए कहा कि इस धरती ने भारत को शक्ति और भक्ति दोनों प्रदान की हैं। यह वीरता, त्याग, समर्पण और धर्मनिष्ठा की भूमि है। इसी भूमि ने शक्ति के प्रतीक महाराणा प्रताप, भक्ति की अमर धारा भक्त शिरोमणि मीराबाई तथा राष्ट्रसेवा और दानशीलता के आदर्श भामाशाह जैसे महान विभूतियों को जन्म दिया। इनके जीवन से हमें यह प्रेरणा मिलती है कि जब शक्ति, भक्ति और सेवा का समन्वय होता है, तब राष्ट्र और समाज का गौरव बढ़ता है।

पूज्य स्वामी जी ने आज जीजाबाई की पुण्यतिथि पर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि इतिहास केवल युद्धों और विजयों से नहीं बनता, बल्कि उन महान आत्माओं के संकल्प, संस्कार और त्याग से निर्मित होता है जो युगों को दिशा देते हैं। जीजाबाई ऐसी ही दिव्य विभूति थीं। वे उस राष्ट्रचेतना की आधारशिला थीं जिसने हिन्दवी स्वराज्य के स्वप्न को जन्म दिया।

एक माँ के रूप में उन्होंने अपने पुत्र को केवल जन्म ही नहीं दिया, बल्कि उसे धर्म, कर्तव्य, करुणा, न्याय और राष्ट्रप्रेम के उच्चतम संस्कार प्रदान किए। उन्होंने शिवाजी के मन में यह भाव जगाया कि सत्ता का उद्देश्य स्वार्थ नहीं, बल्कि लोककल्याण और धर्म की रक्षा है।

आइए, हम उनके जीवन से प्रेरणा लेकर ऐसे चरित्रवान, करुणामय और राष्ट्रनिष्ठ समाज के निर्माण का संकल्प लें, जहाँ प्रत्येक घर से शिवाजी जैसे आदर्श और जीजाबाई जैसी दिव्य मातृशक्ति का उदय हो।

साध्वी भगवती सरस्वती जी ने कहा कि हम सब माँ गंगा के पावन तट पर विगत 34 दिनों से श्रवण कर रहे हैं। अब कथा में सुनने के साथ हमें कथा को जीना भी होगा। हमें स्वयं से पूछना है कि श्रीराम चरित्र मानस ने हमें बदल दिया, अब हमें अपने परिवार, समाज और राष्ट्र में कुछ सकारात्मक बदलाव करना है।

जहाँ हम हैं, वहीं से हमें राम राज्य शुरू करना होगा। जब हम अपने घरों में वापस जाएँ तो माँ सीता, श्री राम जी और हनुमान जी की तरह जीने का प्रयास करें। हमें श्रीराम राज्य वापस लाने हेतु साधना करनी होगी। यहाँ से आप गंगा जल अपने घर में लेकर जरूर जाएँ, परन्तु माँ गंगा का दिव्य संदेश भी अपने साथ लेकर जाएँ।

डॉ. परमहंस श्री रामप्रसाद जी महाराज ने कहा कि परमार्थ निकेतन के पावन गंगा तट पर पूज्य संत मुरलीधर जी महाराज के श्रीमुख से निरंतर प्रवाहित हो रही मानस-ज्ञान गंगा का श्रवण करने का परम सौभाग्य सभी को प्राप्त हुआ। परम पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी, साध्वी भगवती सरस्वती जी एवं पूज्य संतों का स्नेहिल आशीर्वाद और प्रेरणादायी उद्बोधन भी निरंतर प्राप्त हुआ, जो वास्तव में जीवन को सकारात्मक दिशा प्रदान करने वाला तथा आध्यात्मिक चेतना को जागृत करने वाला है। परमार्थ निकेतन स्वयं में एक दिव्य तीर्थ स्थल है, इस दिव्य धाम में बैठकर कथा श्रवण करना स्वर्ग का आनंद देने वाला है।

समापन अवसर पर पर्यावरण संरक्षण एवं स्वच्छता के संकल्प कराए। श्रद्धालुओं ने जल संरक्षण, वृक्षारोपण, प्लास्टिक मुक्त जीवनशैली अपनाने तथा माँ गंगा सहित सभी नदियों की स्वच्छता एवं अविरलता के लिए सक्रिय योगदान देने का संकल्प लिया। 34 दिनों तक चली इस दिव्य राम कथा ने हजारों श्रद्धालुओं के जीवन को आध्यात्मिक ऊर्जा, सांस्कृतिक चेतना और सकारात्मक प्रेरणा से आलोकित किया। मानस परिवार, शंकर जी कुलरिया, धर्म जी कुलरिया, माता जी हरप्रिया जी और सभी मानस प्रेमियों को अनेकानेक धन्यवाद दिया।


By Shashi Sharma

Shashi Sharma Working in journalism since 1985 as the first woman journalist of Uttarakhand. From 1989 for 36 years, she provided her strong services for India's top news agency PTI. Working for a long period of thirty-six years for PTI, he got her pen ironed on many important occasions, in which, by staying in Tehri for two months, positive reporting on Tehri Dam, which was in crisis of controversies, paved the way for construction with the power of her pen. Delivered.

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