*सेवा, साधना और पर्यावरण चेतना का महापर्व*

*पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी के अवतरण दिवस से पूर्व परमार्थ निकेतन में दिव्यांगता मुक्त कैम्प एवं हरित सेवा प्रकल्पों का शुभारम्भ*

*पृथ्वी केवल हमारे पूर्वजों की विरासत नहीं, बल्कि हमारी आने वाली पीढ़ियों की अमानत*

*स्वामी चिदानन्द सरस्वती*

ऋषिकेश, 2 जून 2026। परमार्थ निकेतन में प्रतिवर्ष जून माह से सेवा और समाधान प्रकल्पों का शुभारम्भ होता है जो पूरी दुनिया में दिव्यता का प्रकाश प्रस्फुटित करता है। प्रतिवर्ष की भाँति इस वर्ष भी जून माह परमार्थ निकेतन के लिये पर्यावरण महोत्सव, सेवा महायज्ञ और मानवता के उत्सव के रूप में प्रारम्भ हुआ। जब दुनिया जलवायु परिवर्तन, पर्यावरणीय संकट, मानसिक तनाव और सामाजिक विखंडन जैसी चुनौतियों से जूझ रही है, तब परमार्थ निकेतन एक आशा व शन्ति की किरण लेकर सदैव मार्गदर्शन करता है।

पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी के पावन अवतरण दिवस से पूर्व ही परमार्थ निकेतन में सेवा और संवेदना के अनेक प्रकल्पों का शुभारम्भ हुआ। इसी क्रम में 1 जून से 5 जून 2026 तक आयोजित होने वाले दिव्यांगता मुक्त कैम्प का विधिवत उद्घाटन परम पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी, कोलकाता से आये समाज सेवी श्री विनोद बागरोडिया जी, श्रीमती आभा बागरोडिया और प्रशिक्षकों की टीम ने दीप प्रज्वलित कर हरित सेवा प्रकल्पों की शुरुआत की।

पूज्य स्वामी जी का स्पष्ट संदेश है कि आज मानवता की सबसे बड़ी आवश्यकता केवल विकास नहीं, बल्कि मूल्यों से युक्त विकास है। केवल आर्थिक समृद्धि नहीं, बल्कि करुणा, संवेदना और प्रकृति के प्रति उत्तरदायित्व से परिपूर्ण समृद्धि ही मानवता को सुरक्षित भविष्य दे सकती है।

दिव्यांगता मुक्त कैम्प के माध्यम से सैकडों दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग, सहायक उपकरण, चिकित्सा परामर्श और कैलिपर्स बनाये व प्रदान की जा रहे हैं। पूज्य स्वामी जी का मानना है कि समाज की वास्तविक प्रगति तब मानी जायेगी जब विकास की अंतिम किरण समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे। इसी भावना के साथ परमार्थ निकेतन ने वर्षों से स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वच्छता, महिला सशक्तिकरण, जल संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में अनगिनत जनकल्याणकारी अभियान व सेवा प्रकल्पों का मार्गदर्शन व नेतृत्व किया है।

वहीं दूसरी ओर, पौधारोपण अभियान के माध्यम से प्रकृति संरक्षण का सशक्त संदेश प्रसारित किया जा रहा है। पौधारोपण करते हुए पूज्य स्वामी जी ने कहा कि पृथ्वी केवल हमारे पूर्वजों की विरासत नहीं, बल्कि हमारी आने वाली पीढ़ियों की अमानत है। यदि हम आज प्रकृति की रक्षा नहीं करेंगे तो आने वाली पीढ़ियाँ हमें कभी क्षमा नहीं करेंगी।

पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी का सम्पूर्ण जीवन इस सत्य का साक्षात उदाहरण है कि आध्यात्मिकता केवल मंदिरों और आश्रमों तक सीमित नहीं है। उनके लिये आध्यात्मिकता का अर्थ है, नदियों व जलस्रोतों को बचाना, पौधों को लगाना, पीड़ित को सहारा देना, नारियों का सम्मान करना, युवाओं को दिशा देना और मानवता को एकता के सूत्र में जोड़ना।

उन्होंने गंगा एक्शन परिवार के माध्यम से गंगा संरक्षण को जनआन्दोलन बनाया, पर्यावरण संरक्षण को आध्यात्मिक आन्दोलन का स्वरूप दिया और विश्व मंचों पर भारतीय संस्कृति के उस संदेश को पहुँचाया जिसमें सम्पूर्ण सृष्टि को एक परिवार माना गया है।

आज जब दुनिया प्रकृति का दोहन कर रही है, तब पूज्य स्वामी जी प्रकृति के साथ सहअस्तित्व का मार्ग दिखा रहे हैं। जब समाज विभाजनों से जूझ रहा है, तब वे एकता का मंत्र दे रहे हैं। जब युवा दिशाहीनता का अनुभव कर रहे हैं, तब वे उन्हें अपने भीतर छिपी दिव्यता को पहचानने की प्रेरणा दे रहे हैं।

जून माह में प्रारम्भ हुए ये सेवा और पर्यावरण प्रकल्प पूज्य स्वामी जी के उस महान संकल्प के प्रतीक हैं जिसका उद्देश्य ग्रीन प्लैनेट, क्लीन प्लैनेट और पीसफुल प्लैनेट। परमार्थ निकेतन अपने सेवा प्रकल्पों के माध्यम से पूरी दुनिया को यह संदेश दे रहा है कि पर्यावरण संरक्षण कोई विकल्प नहीं, बल्कि अस्तित्व का प्रश्न है। आज आवश्यकता केवल पौधे लगाने की नहीं, बल्कि चेतना जगाने की है।

परमार्थ निकेतन के तत्वाधान में पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी के आशीर्वाद से महावीर सेवा सदन, कोलकाता से आयी विशेषज्ञों की टीम दिव्यांगता मुक्त शिविर के अन्तर्गत अत्याधुनिक विशेष वाहन द्वारा ऋषिकेश तथा आसपास के ग्रामीण एवं पर्वतीय क्षेत्रों में पहुँचकर दिव्यांगजनों को निःशुल्क सेवाएँ प्रदान की जा रही हैं। टीम द्वारा लाभार्थियों की आवश्यकताओं के अनुरूप कैलिपर्स, कृत्रिम अंग एवं अन्य सहायक उपकरणों के लिये माप लिये जा रहे हैं। विशेष रूप से तैयार किये गये इन उपकरणों को लाभार्थियों को लगाकर उनकी शारीरिक स्थिति के अनुसार समायोजित भी किया जा रहा है।

इस शिविर का उद्देश्य दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाना है। कृत्रिम अंगों एवं कैलिपर्स के साथ चलने, संतुलन बनाने तथा हाथों की कार्यक्षमता को पुनः विकसित करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जा रहा हैं।

By Shashi Sharma

Shashi Sharma Working in journalism since 1985 as the first woman journalist of Uttarakhand. From 1989 for 36 years, she provided her strong services for India's top news agency PTI. Working for a long period of thirty-six years for PTI, he got her pen ironed on many important occasions, in which, by staying in Tehri for two months, positive reporting on Tehri Dam, which was in crisis of controversies, paved the way for construction with the power of her pen. Delivered.

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