आइए, हम सब मिलकर देवभूमि के इस देवतत्व, सद्भाव, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा करें।

चारधाम और हेमकुंट साहिब यात्राएं सदियों से रही हैं आस्था, समरसता और सहअस्तित्व का प्रतीक

हेमकुंट साहिब के प्रथम ग्रंथी रहे थे चमोली के भ्यूंडार गांव निवासी नंदा सिंह

देवभूमि उत्तराखंड की पहचान केवल हिमालय, नदियों और प्राकृतिक सौंदर्य तक सीमित नहीं है। इसकी वास्तविक आत्मा यहां की समृद्ध आध्यात्मिक परंपराओं, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक सहअस्तित्व में बसती है। चारधाम और हेमकुंट साहिब की यात्राएं इस विरासत का सबसे जीवंत और प्रेरणादायक उदाहरण हैं। सदियों से ये यात्राएं न केवल समानांतर रूप से संचालित होती रही हैं, बल्कि इन्होंने विभिन्न आस्थाओं को जोड़ते हुए भाईचारे, सहयोग और मानवीय मूल्यों को भी मजबूत किया है।

ऐसे समय में जब कुछ क्षणिक घटनाओं को आधार बनाकर सामाजिक और डिजिटल मंचों पर विभाजनकारी माहौल बनाने की कोशिशें दिखाई दे रही हैं, उत्तराखंड की इस गौरवशाली परंपरा को याद करना और उसकी रक्षा करना हम सभी की जिम्मेदारी बन जाती है। राजनीतिक लाभ या तात्कालिक उत्तेजना के लिए यदि इस सद्भाव को ठेस पहुंचती है, तो इसका असर केवल सामाजिक ताने-बाने पर ही नहीं, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था और पर्यटन पर भी पड़ सकता है।

चारधाम और हेमकुंट साहिब यात्राएं हमेशा से एक-दूसरे की पूरक रही हैं। इन दोनों यात्राओं का प्रमुख प्रवेश द्वार ऋषिकेश है। केदारनाथ, बद्रीनाथ और हेमकुंट साहिब जाने वाले श्रद्धालु यात्रा के बड़े हिस्से में एक ही मार्ग और एक जैसी सुविधाओं का उपयोग करते हैं। यात्रा मार्ग पर स्थानीय समुदाय, गुरुद्वारे, मंदिर समितियां, स्वयंसेवी संस्थाएं और आम लोग मिलकर सेवा, सहयोग और अतिथि सत्कार की परंपरा को जीवंत बनाए रखते हैं। यही उत्तराखंड की वह सांस्कृतिक चेतना है, जिसमें विविध आस्थाओं का सम्मान और परस्पर सौहार्द सर्वोपरि माना गया है।

नंदा सिंह की विरासत: समरसता का जीवंत प्रतीक
इतिहास भी इस साझा विरासत की पुष्टि करता है। चमोली जिले के भ्यूंडार गांव निवासी स्वर्गीय नंदा सिंह हेमकुंट साहिब गुरुद्वारे के प्रथम ग्रंथी रहे और लगभग ढाई दशक तक इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी का निर्वहन करते रहे। उनका जीवन इस बात का सशक्त प्रमाण है कि उत्तराखंड की संस्कृति ने कभी भी आस्था के आधार पर भेदभाव नहीं किया, बल्कि सदैव समावेश और सहयोग को अपनाया है।

चारधाम और हेमकुंट साहिब यात्राएं केवल धार्मिक आयोजन नहीं हैं, बल्कि उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था की भी मजबूत आधारशिला हैं। परिवहन, होटल व्यवसाय, होम-स्टे, घोड़ा-खच्चर संचालन, स्थानीय व्यापार और हजारों परिवारों की आजीविका प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इन यात्राओं से जुड़ी हुई है। इसलिए इन यात्राओं से जुड़े सौहार्दपूर्ण वातावरण को बनाए रखना केवल सामाजिक आवश्यकता नहीं, बल्कि आर्थिक मजबूरी भी है।

आज आवश्यकता इस बात की है कि हम किसी भी घटना पर प्रतिक्रिया देते समय संयम, विवेक और उत्तराखंड की मूल सांस्कृतिक भावना को सर्वोपरि रखें। प्रश्न यह नहीं है कि किसी घटना पर आक्रोश व्यक्त किया जाए या नहीं, बल्कि यह है कि क्या हम क्षणिक आवेश को बढ़ावा देंगे या फिर अपनी सदियों पुरानी समरसता, शांति और सहअस्तित्व की परंपरा को और मजबूत करेंगे।

देवभूमि की पहचान उसकी आस्था जितनी ही उसकी सहिष्णुता और भाईचारे से भी है। यह साझा आध्यात्मिक विरासत केवल हमारी धरोहर नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए हमारी जिम्मेदारी भी है। आइए, हम सब मिलकर इस देवतत्व, इस सद्भाव और इस सांस्कृतिक विरासत की रक्षा करें।


By Shashi Sharma

Shashi Sharma – Senior Woman Journalist

Shashi Sharma has been active in journalism since 1985, holding the distinction of being Uttarakhand's first female journalist.

For 36 years, starting in 1989, she rendered distinguished service to India's premier news agency, PTI. During this long tenure, she demonstrated the power of her writing on numerous significant occasions; notably, she spent two months in Tehri reporting positively on the Tehri Dam—which was then mired in controversy—and used her pen to help pave the way for its construction.

Currently, Mrs. Shashi Sharma runs the news portal *Newsok24.com* and serves as the editor of the weekly newspaper *Desh Nirdesh*; she is also a registered anchor and commentator for Delhi Doordarshan.

शशि शर्मा वरिष्ठ महिला पत्रकार शशि शर्मा उत्तराखंड की पहली महिला पत्रकार के तौर पर 1985 से पत्रकारिता में कार्यरत हैं। 1989 से 36 वर्षों तक उन्होंने भारत की शीर्ष समाचार एजेंसी पीटीआई के लिए अपनी सशक्त सेवाएं दीं। छत्तीस वर्षों की लंबी अवधि तक पीटीआई के लिए काम करते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण मौकों पर अपनी कलम का लोहा मनवाया, जिसमें दो महीने तक टिहरी में रहकर विवादों के संकट में रहे टिहरी बांध पर सकारात्मक रिपोर्टिंग कर अपनी कलम की ताकत से निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया। वर्तमान में श्रीमती शशि शर्मा Newsok24 com न्यूज पोर्टल को चला रहीं हैं और साप्ताहिक समाचार पत्र देश निर्देश की सम्पादक होने के साथ ही दिल्ली दूरदर्शन की रजिस्टर्ड एंकर और कमेंटेटर भी हैं।

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