परमार्थ निकेतन से फ्रेंडशिप डे पर पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी का विशेष संदेश
आइए, अपने राष्ट्र, संस्कृति और प्रकृति के सच्चे मित्र बनें
महान स्वतंत्रता सेनानी एवं राष्ट्रध्वज के शिल्पकार पिंगली वेंकैया जी की जयंती पर विनम्र श्रद्धाजंलि
फ्रेंडशिप डे पर पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी का युवाओं को संदेश-युवा गलतफहमियों और गुमराह होने से बचें
ऋषिकेश, 2 अगस्त। परमार्थ पीठाधीश्वर, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि आज का दिन एक अद्भुत संयोग लेकर आया है। एक ओर हम फ्रेंडशिप डे मना रहे हैं और दूसरी ओर राष्ट्रध्वज के महान शिल्पकार, स्वतंत्रता सेनानी पिंगली वेंकैया जी की जयंती है। यह पावन अवसर हमें स्मरण कराता है कि सच्ची मित्रता केवल संबंधों तक सीमित नहीं होती, बल्कि वह अपने देश, अपनी संस्कृति, अपने पर्यावरण और समस्त सृष्टि के प्रति समर्पण का प्रतीक है।
पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने इस अवसर पर कहा कि मित्र वह जो हमारे सुख-दुःख में साथ दे, मित्र वह भी है जो हमें श्रेष्ठ बनाये, हमारे जीवन को दिशा दे और हमें अपने कर्तव्यों का बोध कराये। यदि हम सचमुच मित्रता का उत्सव मनाना चाहते हैं तो हमें अपने राष्ट्र, अपनी संस्कृति, अपनी नदियों, अपने पर्वतों, अपने वृक्षों और अपनी धरती का भी मित्र बनना होगा।
उन्होंने कहा कि आज हमने प्रकृति से लेना तो सीख लिया है, लेकिन उसका मित्र बनकर उसे लौटाना अभी शेष है। नदियाँ हमें जीवन देती हैं, वृक्ष हमें प्राणवायु देते हैं, धरती हमें अन्न देती है, सूर्य हमें ऊर्जा देता है और संस्कृति हमें जीवन जीने की कला देती है। यदि हम इन सबके प्रति संवेदनशील नहीं हैं तो हमारी मित्रता अधूरी है।
पूज्य स्वामी जी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में मित्रता का अर्थ केवल व्यक्तिगत संबंध नहीं, बल्कि समस्त सृष्टि के साथ आत्मीय संबंध स्थापित करना है। हमारे वेद उद्घोष करते हैं, मित्रस्य चक्षुषा सर्वाणि भूतानि समीक्षन्ताम् अर्थात् हम समस्त प्राणियों को मित्रभाव से देखें। यही सनातन संस्कृति का संदेश है और यही विश्व बंधुत्व का आधार है।
विगत दिनों हमारे कुछ युवा साथियों द्वारा माननीय प्रधानमंत्री जी एवं उनकी स्वर्गीय माताजी के प्रति कहे गए अपशब्द निश्चित रूप से पीड़ादायक हैं। ऐसा होना नहीं चाहिए था, क्योंकि हमारे संस्कार सदैव वाणी में विनम्रता, विचारों में शुद्धता और व्यवहार में सम्मान का संदेश देते हैं। मेरे लिये तो यह कल्चरल शॉक है परंतु कभी-कभी अज्ञानता, अपरिपक्वता और कुछ गलतफहमियों के कारण ऐसी भूलें हो जाती हैं, जो अनेक हृदयों को आहत कर देती हैं। ऐसे क्षणों में माननीय प्रधानमंत्री जी द्वारा इन बच्चों के प्रति जो प्यार, क्षमा, स्नेह और अपनत्व का भाव प्रकट किया अद्भुत है और वास्तव में यही मैत्री भाव है।
इतना होने पर भी माननीय प्रधानमंत्री जी ने उन छात्रों को अपने बच्चे, अपना परिवार समझकर माफ़ कर दिया। गाली देने वालों को भी गले लगाना यह सचमुच हिम्मत की बात है उन्होंने स्वयं आगे आ कर इस अभद्रता का उत्तर क्रोध से नहीं, बल्कि करुणा से दिया यही तो मित्रता हैं।
पूज्य स्वामी जी ने आज महान स्वतंत्रता सेनानी एवं राष्ट्रध्वज के शिल्पकार पिंगली वेंकैया जी की जयंती पर विनम्र श्रद्धाजंलि अर्पित करते हुये कहा कि पिंगली वेंकैया जी ने तिरंगे को स्वरूप प्रदान करने के साथ ही राष्ट्र की आत्मा को एक पहचान प्रदान की। तिरंगा केवल तीन रंगों का संयोजन नहीं, बल्कि त्याग, शांति, समृद्धि, सत्य, साहस और सतत् प्रगति का जीवंत प्रतीक है। जब भी हम तिरंगे को नमन करते हैं, तब हम उन असंख्य बलिदानों को भी प्रणाम करते हैं जिनके कारण हमें स्वतंत्र भारत का गौरव प्राप्त हुआ।
पूज्य स्वामी जी ने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि हम राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों को भी निभाएँ। स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, वृक्षारोपण, नारी सम्मान, सामाजिक सद्भाव और मानवीय मूल्यों का पालन करें यही राष्ट्रभक्ति है और यही राष्ट्र के प्रति हमारी मित्रता की पहचान भी है।
उन्होंने कहा कि यदि धरती मुस्कुराएगी तो मानवता मुस्कुराएगी। यदि नदियाँ निर्मल रहेंगी तो जीवन निर्मल रहेगा। यदि वृक्ष सुरक्षित रहेंगे तो भविष्य सुरक्षित रहेगा इसलिए फ्रेंडशिप डे पर सबसे सुंदर उपहार एक पौधा लगाना, किसी नदी को स्वच्छ रखने का संकल्प लेना, जल बचाने का प्रण करना अथवा किसी जरूरतमंद के जीवन में आशा का दीप जलाना हो सकता है।
पूज्य स्वामी जी ने कहा कि आज के युवा केवल सोशल मीडिया पर मित्रों की संख्या बढ़ाने तक सीमित न रहे, बल्कि अपने जीवन में ऐसे कार्य करे जिससे राष्ट्र मजबूत बने, समाज संवेदनशील बने और प्रकृति सुरक्षित रहे। डिजिटल मित्रता तभी सार्थक है जब वह धरातल पर सेवा, करुणा और उत्तरदायित्व में परिवर्तित हो।
उन्होंने कहा कि मित्रता का सबसे सुंदर स्वरूप वह है जिसमें स्वार्थ नहीं, समर्पण हो; अधिकार नहीं, उत्तरदायित्व हो; अपेक्षा नहीं, सेवा हो; और केवल अपना ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण विश्व के कल्याण की भावना हो। यही भारतीय संस्कृति का मूल संदेश है वसुधैव कुटुम्बकम् और यही मित्रता की सर्वाेच्च अभिव्यक्ति भी है।
आइए संकल्प लें कि हम अपने राष्ट्र का सम्मान करेंगे। संस्कृति का संरक्षण करेंगे। प्रकृति का संवर्धन करेंगे। मानवता को अपनाएँगे। और सच्चे अर्थों में मित्रता को जीवन का संस्कार बनाएँगे।


By Shashi Sharma

Shashi Sharma Working in journalism since 1985 as the first woman journalist of Uttarakhand. From 1989 for 36 years, she provided her strong services for India's top news agency PTI. Working for a long period of thirty-six years for PTI, he got her pen ironed on many important occasions, in which, by staying in Tehri for two months, positive reporting on Tehri Dam, which was in crisis of controversies, paved the way for construction with the power of her pen. Delivered.

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