युगदृष्टा के संकल्पों का महापर्व
परम पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज का पावन अवतरण दिवस

परमार्थ निकेतन में पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज का 75वें वर्ष में प्रवेश पर्यावरण महोत्सव के रूप में मनाया गया

75 हजार पौधों के रोपण व संरक्षण का महासंकल्प

पूज्य संतों ने शतायु, दिव्यायु और दीर्घायु होने की शुभकामनाएँ दीं

पूज्य योगऋषि स्वामी रामदेव जी महाराज और पूज्य संतों ने पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी को परमार्थ पीठाधीश्वर के रूप में अलंकृत किया

यमुना जी के पावन तटों पर लाखों-लाखों पौधों के रोपण का प्लान

ऋषिकेश, 3 जून। इतिहास के कुछ क्षण युगों की दिशा निर्धारित करते हैं। परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष, आध्यात्मिक जगत के प्रेरणास्रोत, सेवा, साधना और संस्कारों के पर्याय परम पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज के 75वें वर्ष में प्रवेश का पावन अवसर ऐसा ही एक दिव्य, विलक्षण और ऐतिहासिक क्षण है। इस अवसर पर परमार्थ निकेतन के प्रांगण में आज पूज्य योगऋषि स्वामी रामदेव जी महाराज, पूज्य आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानन्द गिरि जी महाराज, पूज्य दीदी माँ साध्वी ऋतंभरा जी, पूज्य गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानन्द जी महाराज, पूज्य महंत रविन्द्र पुरी जी महाराज, पूज्य साध्वी भगवती सरस्वती जी, पूज्य संत मुरलीधर जी महाराज, पूज्य महामंडलेश्वर स्वामी हरिचेतानन्द जी महाराज, पूज्य स्वामी वेदविद्यानन्द जी महाराज हैदराबाद, पूज्य महामंडलेश्वर स्वामी ईश्वरदास जी महाराज, पूज्य स्वामी दयाराम दास जी महाराज, पूज्य मूर्तिमन्त प्रभु जी, पूज्य स्वामी जयंत सरस्वती जी महाराज, पूज्य स्वामी शुक्राईनाथ जी तथा अनेक पूज्य संतों एवं विभूतियों का पावन सान्निध्य प्राप्त हुआ।

परमार्थ निकेतन द्वारा पूज्य स्वामी जी के अवतरण दिवस को “पर्यावरण महोत्सव” के रूप में मनाते हुए 75 हजार पौधों के रोपण का महासंकल्प संत श्री मुरलीधर जी महाराज ने लिया। इस पावन अभियान का शुभारम्भ परमार्थ निकेतन परिसर में दिव्य रुद्राक्ष के पौधे के रोपण के साथ हुआ, जो वास्तव में आने वाली पीढ़ियों के लिए जीवन, हरियाली और आशा का रोपण है। जैसे ही 75 हजार पौधों के रोपण की घोषणा व्यासपीठ से अनेक श्रद्धालुओं व भक्तों ने अपने संकल्पों को दोहराया कि हम भी अपने जन्मदिवस, विवाहदिवस, पर्व व त्यौहारों के अवसर पर एक से लेकर 11 हजार, 21 हजार पौधों का रोपण करेंगे, ऐसे अनेक संकल्प की गूंजें और हरित जन्मदिवस मनाने की प्रेरणा जागृत हुई।

पूज्य स्वामी जी का जीवन स्वयं एक जीवंत महाकाव्य है। कैलाश मानसरोवर की दुर्गम एवं गगनचुम्बी हिमालयी चोटियों पर आश्रमों एवं फस्र्ट एड सेंटर्सं की स्थापना, माँ गंगा सहित अनेक नदियों की निर्मलता और अविरलता के लिए वैश्विक जनआंदोलन, ‘‘देवालय से शौचालय’’ तक स्वच्छता का क्रांतिकारी संदेश, विश्व पटल पर सनातन संस्कृति का गौरवपूर्ण उद्घोष, दिव्यांगता-मुक्त भारत का संकल्प, चिकित्सा एवं मानव सेवा के विराट अभियान, गौ संरक्षण, भारतीय विरासत के संवर्धन और राष्ट्र प्रथम की भावना, इन सभी आयामों में पूज्य स्वामी जी का व्यक्तित्व सदैव एक युगदृष्टा के रूप में रहा है।

वे संकल्प, सेवा और संवेदना की ऐसी ज्योति हैं, जो अनगिनत जीवनों को दिशा प्रदान कर रही है। उनका सहज, सरल, निर्मल और माँ गंगा की तरह निष्छल व्यक्तित्व करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

परमार्थ निकेतन में संत मुरलीधर जी महाराज के श्रीमुख से प्रवाहित हो रही मासिक मानस कथा की दिव्य व्यासपीठ से देश-विदेश से पधारे पूज्य संतों एवं विभूतियों ने उनके अवतरण दिवस पर शुभाशीष एवं मंगलकामनाएँ अर्पित कीं।

अवतरण दिवस के इस महापर्व पर परमार्थ निकेतन द्वारा हजारों श्रद्धालुओं, संतों, निराश्रितों एवं जरूरतमंदों के लिए महाप्रसाद वितरण का शुभारम्भ किया गया। सेवा, समर्पण और सद्भाव की यह धारा दिनभर अविरल प्रवाहित होती रही।

आज का यह आयोजन एक ऐसे संत के जीवन और संकल्पों का अभिनंदन है, जिन्होंने अपने जीवन को स्वयं तक सीमित न रखकर मानवता, प्रकृति, संस्कृति और राष्ट्र के लिए समर्पित कर दिया। 75 हजार पौधों का यह महासंकल्प आने वाले समय में एक हरित क्रांति का आधार बनेगा और यह संदेश देगा कि जब एक संत संकल्प लेता है, तो वह केवल वर्तमान ही नहीं, भविष्य भी बदल देता है।

माँ गंगा और धरती माँ को हरित अभिनंदन के साथ यह अवतरण दिवस सेवा, संस्कार, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्र निर्माण के एक नए अध्याय का शुभारम्भ है।

पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने सभी पूज्य संतों व दिव्य विभूतियों का परमार्थ निकेतन में अभिनन्दन करते हुए कहा कि यह जीवन पूज्य गुरुओं और माता-पिता के दिव्य आशीर्वाद का प्रतिफल है।

“पड़ा था सूना सितार दिल का, हुई अचानक यह जाग तुमसे।
जो जिन्दगी रोग बन गई थी, वह बन गई आज राग तुमसे।
यह मेरे जीवन की रागिनी क्या, मिला है मुझको यह राग तुमसे,
मिला है मुझको यह प्यार तुमसे।”

“मैं तो कब से तेरी शरण हूँ, मेरी ओर तो भी तो ध्यान दो।” प्रभु के श्रीचरणों में प्रार्थना करते हुये कहा कि बस ये जीवन पूज्य महापुरूषों की कृपा से प्रभु की सेवा में लगा रहे, बस यही प्रभु से प्रार्थना है। पूज्य संतों का जो सान्निध्य आज हमें प्राप्त हुआ, यही जीवन का प्रसाद है। जीवन प्रेरणा बने, लक्ष्य के प्रति समर्पित रहे, यही जीवन का सार है।

इस अवसर पर पूज्य मुरारी बापू, पूज्य भाईश्री, पूज्य श्रीश्री रविशंकर जी महाराज सहित अनेक पूज्य संतों, राजनेताओं एवं विभिन्न क्षेत्रों की विभूतियों ने दूरभाष एवं संदेशों के माध्यम से पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज को अपनी हार्दिक शुभकामनाएँ एवं मंगलकामनाएँ अर्पित कीं।

इस पावन अवसर पर पूज्य संतों के उद्बोधन

योगऋषि स्वामी रामदेव जी महाराज ने कहा कि पूज्य स्वामी जी पूरी मानवता के मुकुटमणि हैं। पूज्य संतों के जीवन का अनुकरण ही हमारा जीवन है। भारत के सभी सर्वोच्च कोटि के महापुरुष, वर्तमान व पूर्व माननीय राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल, मंत्री, सांसद अथवा विभिन्न राष्ट्रों के राजदूत, सभी का अपार स्नेह पूज्य स्वामी जी के प्रति है। ऐसा कोई दिन नहीं होता, जिस दिन कोई वैश्विक विभूति परमार्थ निकेतन न आती हो। ऐसा अद्भुत व्यक्तित्व है पूज्य स्वामी जी महाराज का।

पूज्य आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानन्द गिरि जी महाराज ने कहा कि पूज्य स्वामी जी ने पर्यावरण संरक्षण के प्रहरी के रूप में पूरे विश्व को जागृत किया और इस ज्ञान से पूरी मानवता को आलोकित कर रहे हैं। भारत के अमृतकाल में आपका 75वें वर्ष में प्रवेश वास्तव में अमृतकाल है। आपने पर्यावरण चेतना की जो अलख जगाई, वह वंदनीय है। उन्होंने कहा कि दस बेटों के बराबर एक बेटी है और सौ बेटों के बराबर एक पेड़ है, और वही पेड़ पूज्य स्वामी जी भेंटस्वरूप पूरी दुनिया को प्रदान करते हैं।

पूज्य दीदी माँ साध्वी ऋतंभरा जी ने कहा कि जो अर्पित व समर्पित हो जाए, वही तो संत है। संत व्यक्ति या वस्त्र नहीं, वह तो एक स्वभाव है। संत के चरणों में समर्पित मन निर्मल हो जाता है। पूज्य स्वामी जी ने धरती की पीड़ा को हरने का कार्य किया। धरती ने पूज्य स्वामी जी को पुत्र के रूप में पुकारा कि आइए और मेरी चुनरी को हरा-भरा बना दीजिए। पूज्य स्वामी जी ने अपना पूरा जीवन इसी हेतु समर्पित कर दिया।

पूज्य स्वामी ज्ञानानन्द जी महाराज ने कहा कि मनुष्य जन्म मिलना और उसके पश्चात उसकी सार्थकता होना अत्यंत दुर्लभ है। हजारों में कोई विरला ही होता है जिसे इसका अनुभव होता है। ऐसे ही हमारे पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज हैं। उन्होंने अपने अहं को तप से गलाकर मानवता, पर्यावरण संरक्षण, राष्ट्रचेतना और राष्ट्रप्रेम को समर्पित जीवन जिया है। गंगा जी की आरती के माध्यम से उन्होंने राष्ट्रचेतना को जागृत किया तथा परमार्थ आश्रम को विराट स्वरूप प्रदान किया।

पूज्य महंत रविन्द्र पुरी जी महाराज ने कहा कि गुरु कुम्हार की तरह होते हैं, जो सहलाकर श्रेष्ठ शिष्यों को गढ़ते हैं। पूज्य स्वामी जी गुरु परम्पराओं के ऐसे ही दिव्य गुरु हैं, जिनका पूरा जीवन मानवता को समर्पित है। मैं पिछले 40 वर्षों से पूज्य स्वामी जी को जानता हूँ, परन्तु उन्होंने कभी अपने व्यक्तिगत जीवन पर भौतिकता की चकाचैंध या राजनीति का रंग नहीं चढ़ने दिया।

पूज्य साध्वी भगवती सरस्वती जी ने कहा कि आज से 30 वर्ष पूर्व जब मैं भारत आई और मुझे माँ गंगा तथा पूज्य स्वामी जी महाराज का आशीर्वाद प्राप्त हुआ, तब पूज्य स्वामी जी ने मुझे तीन मंत्र दिए, सदैव प्रसन्न रहो, अपने समय और संसाधनों से मानवता की सेवा करो और सेवा का कोई भी अवसर मत चूको। आज यही मंत्र मैं आप सभी को दे रही हूँ।

पूज्य संत मुरलीधर जी महाराज ने कहा कि यह सौभाग्य का विषय है कि पूज्य स्वामी जी महाराज के जन्मदिवस के अवसर पर परमार्थ निकेतन में रहने का अवसर प्राप्त होता है। पूज्य संत हमारे आध्यात्मिक चिकित्सक हैं, जिनकी वाणी से करोड़ों-करोड़ों साधकों को युगों-युगों से आध्यात्मिक उपचार प्राप्त होता रहा है।

पूज्य महामंडलेश्वर स्वामी हरिचेतानन्द जी महाराज ने कहा कि हरित क्रांति के जनक पूज्य स्वामी जी महाराज हैं। 3 जून को पूज्य स्वामी जी का जन्मदिवस और 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस, यह संगम भी अद्भुत है। वर्ष 1984 से लेकर आज तक पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने हरित क्रांति हेतु अद्भुत भूमिका निभाई है। एक दिन ऐसा आएगा जब आपकी हरित क्रांति को पूरा विश्व सराहेगा। पूज्य स्वामी जी ने चाहे कुंभ हो या कोई पर्व, न लिफाफा दिया, न लिफाफा लिया परन्तु हाँ पौधे सबको अवश्य दिए और पौधे ही आपकी पहचान है।

पूज्य महामंडलेश्वर स्वामी ईश्वरदास जी महाराज ने पूज्य स्वामी जी को अवतरण दिवस की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि कैलाश मानसरोवर पर भवन एवं अस्पताल का निर्माण भारत सरकार भी नहीं कर पाई, जो पूज्य स्वामी जी ने कर दिखाया। चाहे गंगा स्वच्छता का विषय हो या मानवता की सेवा, पूज्य स्वामी जी की भूमिका सदैव अग्रणी रही है।

राष्ट्रीय कवि संगम के अध्यक्ष श्री जगदीश मित्तल जी ‘परमार्थी’ ने कहा कि चार वर्ष पूर्व मुझे पूज्य स्वामी जी महाराज के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ। मैं यही भाव समर्पित करता हूँ “मैं शब्द, आप अर्थ और बाकी सब व्यर्थ।” पूज्य स्वामी जी के संरक्षण में पूरे देश में 5000 से अधिक कवियों का संगठन कार्य कर रहा है और इस संगठन पर उनकी विशेष कृपा है।

इस अवसर पर भारत सहित विश्व के अनेक देशों से पधारी विभूतियों, श्री आई. जी. अग्रवाल जी, श्री प्रवीण भाई, श्री प्रताप भाई, अनेक भक्तों, पूज्य संतों एवं श्रद्धालुओं ने पूज्य स्वामी जी महाराज को अपनी हार्दिक शुभकामनाएँ अर्पित कीं


By Shashi Sharma

Shashi Sharma – Senior Woman Journalist

Shashi Sharma has been active in journalism since 1985, holding the distinction of being Uttarakhand's first female journalist.

For 36 years, starting in 1989, she rendered distinguished service to India's premier news agency, PTI. During this long tenure, she demonstrated the power of her writing on numerous significant occasions; notably, she spent two months in Tehri reporting positively on the Tehri Dam—which was then mired in controversy—and used her pen to help pave the way for its construction.

Currently, Mrs. Shashi Sharma runs the news portal *Newsok24.com* and serves as the editor of the weekly newspaper *Desh Nirdesh*; she is also a registered anchor and commentator for Delhi Doordarshan.

शशि शर्मा वरिष्ठ महिला पत्रकार शशि शर्मा उत्तराखंड की पहली महिला पत्रकार के तौर पर 1985 से पत्रकारिता में कार्यरत हैं। 1989 से 36 वर्षों तक उन्होंने भारत की शीर्ष समाचार एजेंसी पीटीआई के लिए अपनी सशक्त सेवाएं दीं। छत्तीस वर्षों की लंबी अवधि तक पीटीआई के लिए काम करते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण मौकों पर अपनी कलम का लोहा मनवाया, जिसमें दो महीने तक टिहरी में रहकर विवादों के संकट में रहे टिहरी बांध पर सकारात्मक रिपोर्टिंग कर अपनी कलम की ताकत से निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया। वर्तमान में श्रीमती शशि शर्मा Newsok24 com न्यूज पोर्टल को चला रहीं हैं और साप्ताहिक समाचार पत्र देश निर्देश की सम्पादक होने के साथ ही दिल्ली दूरदर्शन की रजिस्टर्ड एंकर और कमेंटेटर भी हैं।

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