
आत्मनिर्भर उत्तराखंड की दिशा में युवा उद्यमी विरेन्द्र सिंह दसोनी की पहल, Wild Goat Trekkers से पर्यटन और संस्कृति को बढ़ावा देने का प्रयास
हल्द्वानी के विरेन्द्र सिंह दसोनी का लक्ष्य—उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता, लोकसंस्कृति और अनछुए पर्यटन स्थलों को नई पहचान दिलाना

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के आत्मनिर्भर उत्तराखंड के विजन के अनुरूप प्रदेश के युवा पर्यटन और स्वरोजगार के क्षेत्र में नई संभावनाएँ तलाश रहे हैं। इसी दिशा में हल्द्वानी निवासी विरेन्द्र सिंह दसोनी, संस्थापक Wild Goat Trekkers, पिछले लगभग तीन वर्षों से उत्तराखंड के पर्यटन, एडवेंचर ट्रेकिंग और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने के लिए प्रयासरत हैं।
विरेन्द्र सिंह दसोनी का उद्देश्य उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता को पर्यटकों तक पहुँचाने के साथ-साथ प्रदेश की समृद्ध लोकसंस्कृति, पारंपरिक खानपान, लोकगीतों, लोकनृत्यों और पहाड़ी जीवनशैली से भी लोगों को परिचित कराना है।
पर्यटन के माध्यम से स्थानीय पहचान को बढ़ावा
Wild Goat Trekkers के माध्यम से विरेन्द्र सिंह दसोनी उत्तराखंड के खूबसूरत ट्रेकिंग रूट्स, प्राकृतिक स्थलों और कम चर्चित पर्यटन स्थलों को पहचान दिलाने की दिशा में कार्य कर रहे हैं। उनकी सोच है कि पर्यटन को स्थानीय संस्कृति और परंपराओं से जोड़कर पर्यटकों को पहाड़ों का वास्तविक अनुभव प्रदान किया जाए।
स्थानीय युवाओं के लिए स्वरोजगार की संभावनाएँ
विरेन्द्र सिंह दसोनी का मानना है कि पर्यटन स्थानीय युवाओं, गाइडों, होमस्टे संचालकों, कलाकारों और छोटे व्यवसायियों के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर पैदा कर सकता है। इसी उद्देश्य से वे स्थानीय संसाधनों, प्रतिभाओं और सांस्कृतिक विरासत को पर्यटन से जोड़ने की संभावनाओं को आगे बढ़ाना चाहते हैं।
तीन वर्षों का सफर और भविष्य का संकल्प
अपनी इस पहल के माध्यम से विरेन्द्र सिंह दसोनी निरंतर सीखने, नए अवसर तलाशने और उत्तराखंड के पर्यटन को व्यापक पहचान दिलाने का प्रयास कर रहे हैं। भविष्य में उनका लक्ष्य Wild Goat Trekkers को ऐसी पहचान दिलाना है, जो प्रदेश की प्राकृतिक सुंदरता, स्थानीय संस्कृति और पारंपरिक विरासत को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत कर सके।
विरेन्द्र सिंह दसोनी की यह पहल स्थानीय संसाधनों और उद्यमशील सोच के माध्यम से आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने के प्रयास को दर्शाती है। उनका संकल्प है कि उत्तराखंड की पहचान केवल पर्यटन स्थलों तक सीमित न रहे, बल्कि यहाँ की संस्कृति, परंपराओं और पहाड़ी जीवनशैली को भी देश-दुनिया में पहचान मिले।
