उत्तराखण्ड के माननीय राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह जी ने रचा इतिहास
उत्तराखण्ड राज्य के सबसे लंबे कार्यकाल वाले राज्यपाल बने, सेवा, नेतृत्व और राष्ट्रसमर्पण का स्थापित किया नया मानदण्ड
परमार्थ पीठाधीश्वर, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी एवं पतंजलि योगपीठ, आचार्य बालकृष्ण जी का पावन सान्निध्य, उद्बोधन और आशीर्वाद
एब्सोल्यूट इंटेलिजेंस डोंट सर्च, फाइंड (प्रज्ञा, खोजें नहीं, समाधान पाएँ) पुस्तक का भव्य लोकार्पण
ज्ञान, चेतना और मानवता पर मंथन
माननीय राज्यपाल गुरमीत सिंह जी मेडल वाले ही नहीं माॅडल गर्वनर
दृष्टि बदलिए, दृश्य बदल जाएगा, ऐनक बदलेगी तो एंगल बदलेंगे, और एंगल बदलेंगे तो जीवन के सारे ट्रायएंगल स्वतः बदल जाएंगे
स्वामी चिदानन्द सरस्वती
अन्तर्राष्ट्रीय क्षमा दिवस पर पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी का संदेेश – क्षमा करो और आगे बढ़ो, यही जीवन का सिद्धान्त है, यही कर्म का नियम है. क्षमा मन को बोझ से मुक्त करती है, संबंधों में प्रेम जगाती है और जीवन में शांति, सकारात्मकता तथा आत्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करती है.

देहरादून, 7 जुलाई। उत्तराखण्ड के संवैधानिक इतिहास में आज एक नया अध्याय जुड़ गया, लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) माननी राज्यपाल श्री गुरमीत सिंह जी ने राज्य के सबसे लंबे कार्यकाल वाले राज्यपाल बनने का गौरव प्राप्त किया। उन्होंने 1,756 दिनों का कार्यकाल पूर्ण कर नया कीर्तिमान स्थापित किया। यह उपलब्धि एक संवैधानिक रिकॉर्ड नहीं, बल्कि उत्तराखण्ड के विकास, सुशासन और जनसेवा के प्रति उनके समर्पण का सशक्त प्रतीक है।
लेफ्टिनेंट जनरल श्री गुरमीत सिंह जी ने 15 सितम्बर 2021 को उत्तराखण्ड के आठवें राज्यपाल के रूप में शपथ ग्रहण की थी। उनका कार्यकाल 4 वर्ष, 9 माह और 21 दिन का हो चुका है, जो राज्य गठन के बाद किसी भी राज्यपाल का सबसे लंबा कार्यकाल है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि सम्पूर्ण उत्तराखंड़ की है।
अपने कार्यकाल के दौरान माननीय राज्यपाल श्री गुरमीत सिंह जी ने संवैधानिक दायित्वों के निर्वहन के साथ समाज के विविध वर्गों के बीच एक प्रेरक मार्गदर्शक, संवेदनशील संरक्षक और जनहितैषी व्यक्तित्व के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। उन्होंने राजभवन को जनसंवाद, नवाचार, शिक्षा, युवा प्रेरणा और सामाजिक जागरूकता का सक्रिय केन्द्र बनाने की दिशा में उल्लेखनीय प्रयास किए।
राज्यपाल के रूप में उन्होंने शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, युवा नेतृत्व, सैनिक एवं पूर्व सैनिक कल्याण, पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, जैव विविधता, स्वास्थ्य तथा सामाजिक समरसता जैसे अनेक महत्वपूर्ण विषयों को प्राथमिकता दी। उन्होंने समय-समय पर विश्वविद्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों, स्वयंसेवी संगठनों, युवाओं, सैनिक परिवारों तथा विभिन्न सामाजिक समूहों के साथ संवाद स्थापित कर समाज के सर्वांगीण विकास को नई दिशा प्रदान की। राज्य के विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति के रूप में उन्होंने उच्च शिक्षा की गुणवत्ता, अनुसंधान, कौशल विकास तथा भारतीय ज्ञान परम्परा को बढ़ावा देने के लिए भी महत्वपूर्ण पहल की।
उत्तराखण्ड के माननीय राज्यपाल श्री गुरमीत सिंह जी ने कहा कि भारत की प्राचीन ज्ञान परम्परा आज वैश्विक स्तर पर नई स्वीकार्यता प्राप्त कर रही है। उन्होंने कहा कि विज्ञान और अध्यात्म का समन्वय ही भविष्य की सबसे बड़ी आवश्यकता है। ऐसे ग्रन्थ समाज में सकारात्मक चिंतन, अनुसंधान और नवाचार की नई दिशा प्रदान करते हैं। उन्होंने इस महत्त्वपूर्ण कृति के प्रकाशन पर सभी रचनाकारों और आयोजकों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं।
पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि माननीय राज्यपाल श्री गुरमीत सिंह जी का जीवन राष्ट्रसेवा की प्रेरणादायी यात्रा है। भारतीय सेना में लगभग चार दशकों तक उत्कृष्ट सेवा देने के बाद उन्होंने संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन भी उसी समर्पण, अनुशासन और दूरदृष्टि के साथ किया। देशभक्ति उनके परिवार की परम्परा रही है और यही संस्कार आगे चलकर उनके व्यक्तित्व और नेतृत्व की आधारशिला बने। श्री गुरमीत सिंह जी ने भारत की शक्ति व संस्कृति को संरक्षित करने का कार्य किया है।
उन्होंने सैनिक पृष्ठभूमि से प्राप्त अनुशासन, समयबद्धता, पारदर्शिता और कर्तव्यनिष्ठा को राजभवन की कार्यशैली में भी प्रतिबिंबित किया। उत्तराखण्ड की प्राकृतिक धरोहर, हिमालय, नदियों, वन सम्पदा और जैव विविधता के संरक्षण के लिए उन्होंने अनेक अवसरों पर जनजागरूकता का संदेश दिया।
पूज्य स्वामी जी ने कहा कि आज विश्व एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) की ओर बढ़ रहा है, लेकिन मानवता का भविष्य एआई से सुरक्षित नहीं होगा। हमें एआई के साथ आरआई (राइटियस इंटेलिजेंस, ऋषि इंटेलिजेंस ), एसआई (स्पिरिचुअल इंटेलिजेंस) और सनातन इंटेलिजेंस की भी आवश्यकता है आइए अध्यात्म इंटेलिजेंस की ओर बढ़े।
प्रख्यात वैज्ञानिक एवं लेखक प्रो. अरुण तिवारी जी ने पुस्तक का विस्तृत परिचय देते हुए कहा कि एब्सोल्यूट इंटेलिजेंस डोंट सर्च, फाइंड (प्रज्ञा, खोजें नहीं, समाधान पाएँ) पुस्तक विज्ञान और अध्यात्म के बीच संवाद स्थापित करने वाला एक वैचारिक सेतु है। उन्होंने बताया कि आधुनिक विज्ञान जहाँ बुद्धि की सीमाओं का अन्वेषण करता है, वहीं भारतीय अध्यात्म प्रज्ञा के माध्यम से अनन्त चेतना का अनुभव कराता है। यह ग्रन्थ दोनों धाराओं को एक सूत्र में पिरोने का अभिनव प्रयास है।
कार्यक्रम का शुभारम्भ राष्ट्रगीत वन्दे मातरम् एवं राष्ट्रगान के सामूहिक गायन के साथ हुआ, जिससे सम्पूर्ण सभागार राष्ट्रभक्ति और भारतीय संस्कृति की दिव्य भावना से ओत-प्रोत हो उठा।
इसके उपरान्त राज्यपाल के वित्त नियंत्रक डॉ. तृप्ति श्रीवास्तव जी ने सभी अतिथियों का आत्मीय स्वागत करते हुए इस महत्त्वपूर्ण आयोजन की भूमिका प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि भारत की प्राचीन ज्ञान परम्परा आज पुनः वैश्विक मंच पर अपनी सार्थकता सिद्ध कर रही है और ऐसे ग्रन्थ भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनेंगे।
उत्तराखण्ड की पावन देवभूमि में आज ज्ञान, विज्ञान और अध्यात्म के अद्वितीय समन्वय का एक ऐतिहासिक क्षण साकार हुआ। लोक भवन, देहरादून के सभागार में आयोजित गरिमामय समारोह में एब्सोल्यूट इंटेलिजेंस डोंट सर्च, फाइंड (प्रज्ञा, खोजें नहीं, समाधान पाएँ) पुस्तक का भव्य लोकार्पण उत्तराखण्ड के माननीय राज्यपाल की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ।
समारोह में योग, आयुर्वेद, विज्ञान, शिक्षा और अध्यात्म जगत की अनेक विशिष्ट विभूतियों की गरिममयी उपस्थिति रही।
इस अवसर पर श्री रवि रमन जी, विश्वविद्यालयों के माननीय कुलपति, डीन, प्रोफेसर, गणमान्य अतिथि, नारी शक्ति की गरिमामयी उपस्थिति रही।


By Shashi Sharma

Shashi Sharma – Senior Woman Journalist

Shashi Sharma has been active in journalism since 1985, holding the distinction of being Uttarakhand's first female journalist.

For 36 years, starting in 1989, she rendered distinguished service to India's premier news agency, PTI. During this long tenure, she demonstrated the power of her writing on numerous significant occasions; notably, she spent two months in Tehri reporting positively on the Tehri Dam—which was then mired in controversy—and used her pen to help pave the way for its construction.

Currently, Mrs. Shashi Sharma runs the news portal *Newsok24.com* and serves as the editor of the weekly newspaper *Desh Nirdesh*; she is also a registered anchor and commentator for Delhi Doordarshan.

शशि शर्मा वरिष्ठ महिला पत्रकार शशि शर्मा उत्तराखंड की पहली महिला पत्रकार के तौर पर 1985 से पत्रकारिता में कार्यरत हैं। 1989 से 36 वर्षों तक उन्होंने भारत की शीर्ष समाचार एजेंसी पीटीआई के लिए अपनी सशक्त सेवाएं दीं। छत्तीस वर्षों की लंबी अवधि तक पीटीआई के लिए काम करते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण मौकों पर अपनी कलम का लोहा मनवाया, जिसमें दो महीने तक टिहरी में रहकर विवादों के संकट में रहे टिहरी बांध पर सकारात्मक रिपोर्टिंग कर अपनी कलम की ताकत से निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया। वर्तमान में श्रीमती शशि शर्मा Newsok24 com न्यूज पोर्टल को चला रहीं हैं और साप्ताहिक समाचार पत्र देश निर्देश की सम्पादक होने के साथ ही दिल्ली दूरदर्शन की रजिस्टर्ड एंकर और कमेंटेटर भी हैं।

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