The immortal martyr, देशभर में होगा अमर शहीद जगदीश वत्स का यशोगान- जितेन्द्र रघुवंशी

The immortal martyr, Jagdish Vats will be praised across the country – Jitendra Raghuvanshi

स्वतंत्रता सेनानी शहीद परिवारों के हितों की हर प्रकार रक्षा करेगी सरकार- मदन कौशिक

The immortal martyr, हरिद्वार 25 जुलाई 2026। स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी परिवार समिति (रजि.) के अनुरोध पर जिला प्रशासन के द्वारा शहीद जगदीश वत्स की 101 वीं जयन्ती देशभक्ति की धारा प्रवाहित करते हुए शहीद जगदीश वत्स पार्क जटवाड़ा पुल ज्वालापुर में ऐतिहासिक स्तर पर मनाई गई।The immortal martyr, देशभर में होगा अमर शहीद जगदीश वत्स का यशोगान- जितेन्द्र रघुवंशी

सर्वप्रथम मुख्य अतिथि  मदन कौशिक ने ध्वजारोहण किया, राष्ट्रगीत वन्दे मातरम के बाद राष्ट्रगान हुआ, तत्पश्चात मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक, मुख्य विकास अधिकारी डॉ ललित नारायण मिश्र, स्वामी शरद पुरी, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भारत भूषण विद्यालंकार, स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी परिवार समिति के अध्यक्ष देशबन्धु, महासचिव जितेन्द्र रघुवंशी द्वारा शहीद जगदीश वत्स की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया।

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डॉ नरेश मोहन द्वारा संचालित मंचीय व्यवस्था में सभी अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ, अंगवस्त्र तथा मोतियों की माला पहनाकर किया गया। कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने उपस्थित सभी स्वतंत्रता सेनानी शहीद परिवारों का अंगवस्त्र के साथ मोतियों की माला पहनाकर सम्मानित किया।

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सर्व प्रथम स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी परिवार समिति के राष्ट्रीय महासचिव ने जिलाधिकारी मयूर दीक्षित का स्वतंत्रता सेनानी शहीद परिवारों के प्रति व्यक्त की गई भावनाओं का उल्लेख करते हुए शहीद जगदीश वत्स की जयन्ती प्रति वर्ष मनाने की सहमति देने पर धन्यवाद ज्ञापित किया। जितेन्द्र रघुवंशी ने स्वतंत्रता सेनानी शहीद परिवारों तथा अतिथियों को संबोधित करते हुए कहा कि हम आभारी हैं माननीय प्रधानमंत्री जी के, जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के सपनों का भारत बनाएंगे संकल्प का लाल किले की प्राचीर से उद्घोष किया। माननीय अतिथियों को हम यहां पर यह जानकारी देना चाहेंगे कि केंद्र सरकार से मान्यता प्राप्त लगभग 173000 तथा लगभग इतने ही राज्य सरकारों द्वारा मान्यता प्राप्त स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों एवं आजादी के पहले शहीद हुए लगभग 732780 क्रांतिकारियों ने अनेक यातनाएं सहकर भारत माता को गुलामी की बेड़ियों से मुक्त कराया, उनके परिवारों की वर्तमान में कुल संख्या लगभग चार करोड़ होती है। हम देशभक्त स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों शहीदों के वंशज हैं, हमारे अंदर भी उन्हीं क्रांतिकारियों का खून दौड़ रहा है, जिन्होंने देश को आजाद कराकर रामराज्य की स्थापना के लिए राजतंत्र के प्रहरियों को सौंप दिया।
पिछले दिनों पराक्रम दिवस पर संस्कृति मंत्रालय के आमंत्रण पर अंडमान निकोबार की यात्रा का उल्लेख करते हुए रघुवंशी ने आग्रह किया कि एक बार सभी को सेल्यूलर जेल अवश्य देखना चाहिए, ताकि हमें यह एहसास हो सके कि देश की आजादी के लिए हमारे पूर्वजों ने कितनी यातनाएं सही हैं। रघुवंशी ने असम सरकार के आमंत्रण पर शहीद कुशल कुंवर की 83 वीं पुण्यतिथि पर गुवाहाटी असम जाने की जानकारी देते हुए कहा कि असम के पराक्रमी मुख्यमंत्री मा. हेमंत विश्व शर्मा से लगभग आधा घंटा हुए विचार विमर्श का उल्लेख करते हुए कहा कि मुख्य मंत्री महोदय अपने राज्य के शहीदों को श्रद्धांजलि समर्पित करने के लिए एक विशाल कार्यक्रम दिल्ली में आयोजित करने का दायित्व हमारे संगठन को सौंपा है, यह गौरव की बात है।

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शहीद जगदीश वत्स की जीवन गाथा की चर्चा करते हुए रघुवंशी ने कहा कि ‌ग्राम खजूरी अकबरपुर जनपद सहारनपुर निवासी माता श्रीमती जमुना देवी तथा पिता श्री कदम सिंह शर्मा ने अपने पुत्र जगदीश प्रसाद की प्रारंभिक शिक्षा ग्रामीण प्राइमरी पाठशाला फिर जूनियर हाई स्कूल पास कराने के बाद ऋषिकुल राजकीय आयुर्वेद कॉलेज हरिद्वार में अपने पुत्र के भविष्य के न जाने कितने अरमानों को संजोकर प्रवेश कराया होगा, माता-पिता के साथ ही भाई-बहन सभी के यह स्वप्न रहे होंगे कि इस घर का बेटा राजकीय आयुर्वेद कॉलेज में पढ़कर अच्छी नौकरी पाकर हमारे गांव का नाम रोशन करेगा, किंतु उसी समय 8 अगस्त 1942 को महात्मा गांधी जी ने नारा दिया “करो या मरो” इसके अंतर्गत चलने वाले आंदोलन का रूप था- अंग्रेजो भारत छोड़ो। इस आवाहन से क्रान्तिकारियों की टकसाल गुरुकुल और ऋषिकुल दोनों में अध्ययनरत छात्रों के अन्दर देशभक्ति का तूफान पैदा हो गया। इन शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों ने रात्रि में ही बैठक की और बैठक में निर्णय लिया गया की छात्रों द्वारा विभिन्न मार्गों से जुलूस निकाला जाएगा और सुभाष घाट, पोस्ट आफिस तथा रेलवे स्टेशन में तिरंगा झंडा फहराया जाएगा। इस जुलूस में शामिल हरिद्वार के ही विख्यात स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व. श्री नंद लाल धींगरा जी बताते थे कि उस समय एक अनुमान के अनुसार लगभग दस हजार क्रान्तिकारी इस जुलूस में शामिल थे।
कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने स्वतंत्रता सेनानी शहीद परिवारों को सम्बोधित करते हुए कहा कि हम ऋणी हैं उन क्रान्तिकारियों के जिन्होंने अपना बलिदान देकर देश को आजाद कराया, जिससे हम आज खुली हवा में सांस ले रहे हैं। कौशिक ने कहा कि जिस तरह असम के मुख्यमंत्री ने अपने प्रान्त के शहीदों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने का आश्वासन दिया है उसी तरह उत्तराखण्ड सरकार भी अगले दिनों स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों शहीदों के सम्मान के लिए हर संभव कदम उठाएगी। अगले दिनों शहीद जगदीश वत्स की जयन्ती जिलास्तरीय ही नहीं प्रान्तीय और राष्ट्रीय स्तर पर भी मनाई जाएगी।
मुख्य विकास अधिकारी डॉ ललित नारायण मिश्र ने शहीद जगदीश वत्स की यशगाथा सुनाते हुए कहा कि देशभक्ति का जो मार्ग शहीद जगदीश वत्स ने दिखाया है, वह आज वर्तमान परिस्थितियों में देश को जगद्गुरु के पद पर प्रतिष्ठित करने के लिए अनुकरणीय है। डॉ ललित नारायण मिश्र ने वरिष्ठ पत्रकारों अंगवस्त्र, मोतियों की माला पहनाकर, स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।

भीड़ ने सुभाष घाट पर झंडा फहराया, पुलिस ने गोली चला दी, जिसमें जगदीश वत्स के पैर में गोली लगी, वह अपनी ही धोती फाड़कर पैर में बांधकर बाजार से भागते हुए पोस्ट ऑफिस पहुंचे, जहां उन्होंने दूसरा झंडा फहराया, वहां भी पुलिस द्वारा गोली मारी गई जो हाथ में लगी। पोस्ट ऑफिस से पीछे कूद कर रेलवे स्टेशन होते हुए रेलवे स्टेशन पहुंचे जहां जगदीश वत्स ने तीसरा झंडा फहराया जहां मौजूद एस आई प्रेम शंकर ने गोलियां चला दी। एक गोली जगदीश वर्ष के सीने में लगी वह मूर्छित होकर गिर पड़े, और गंभीर रूप से घायल हो गए थे, अतः पुलिस उन्हें गिरफ्तार करके देहरादून ले गई। कहते हैं उचित चिकित्सा के अभाव में वे वीरगति को प्राप्त हुए। उस समय जगदीश प्रसाद वत्स की आयु मात्र 17 वर्ष की थी। अपने माता-पिता भाई बहनों के अरमानों पर जगदीश वत्स कितना खरे उतरे, यह तो नहीं कहा जा सकता, लेकिन आजादी की रणभूमि में अपना बलिदान देकर अमर अवश्य हो गए और अपने गांव खजूरी अकबरपुर का नाम रोशन अवश्य कर गए

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उन्होंने हरित हरिद्वार की प्रेरणा देकर सभी को तुलसी तथा फलदार पौधे भी वितरित किया।
स्वतंत्रता सेनानी शहीद परिवारों को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी श्री भारत भूषण विद्यालंकार, हरित ऋषि विजय पाल बघेल, सुरेश चन्द्र सुयाल, वरिष्ठ पत्रकार शशि शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार रजनीकांत शुक्ला, चेतना पथ के सम्पादक अरुण पाठक, जगदीश लाल पाहवा, देशबंधु, डॉ वेदप्रकाश आर्य, यशपाल सिंह ने भी सम्बोधित किया।
नगर निगम के अधिकारियों तथा कर्मचारियों के साथ अनुराग सिंह गौतम, आदित्य गहलौत, आदित्य प्रकाश उपाध्याय, वीरेन्द्र गहलौत, अशोक चौहान, राकेश चौहान, प्रमेश कुमार, दीपेश कुमार, कमल छाबड़ा, अर्जुन सिंह राणा, यशपाल सिंह, ऋषभ गहलौत, कैलाश वैष्णव, श्रीमती मंजुलता उपाध्याय, मंजुलता भारतीय, शोभा गोयल, मनीषा चौहान, राजकुमारी सैनी सहित सेनानी परिवार के नवयुवकों ने भी सराहनीय कार्य किया।

By Shashi Sharma

Shashi Sharma Working in journalism since 1985 as the first woman journalist of Uttarakhand. From 1989 for 36 years, she provided her strong services for India's top news agency PTI. Working for a long period of thirty-six years for PTI, he got her pen ironed on many important occasions, in which, by staying in Tehri for two months, positive reporting on Tehri Dam, which was in crisis of controversies, paved the way for construction with the power of her pen. Delivered.

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