The POSH Act, कामकाजी महिलाओं को उनके कार्यस्थल में सम्मान और सुरक्षा दिलाता है POSH एक्ट।
The POSH Act, provides respect and security to working women at their workplace.
राष्ट्रीय महिला आयोग से लेकर प्रदेश और जिले तक फैला है POSH एक्ट का दायरा, जरुरी है महिलाएं सजग हों।
The POSH Act, महिलाओं की कार्यस्थल पर उनके सम्मान को बरकरार रखने और किसी भी तरह के यौन उत्पीडन से सुरक्षित रहने का अधिकार देता है POSH एक्ट (Prevention of Sexual Harassment Act, 2013) पाॅश अधिनियम।
अधिकांश कामकाजी महिलाओं को इस एक्ट के बारे में जानकारी कम है ऐसे में महिलाएं अपने पारिवारिक दायित्वों के निर्वहन के लिए ऐसे उत्पीड़नों को दबाव में सहन करने को बाध्य होती हैं।
आप जहां भी काम करती हैं वहां अनिवार्य रूप से इंटरनल कंप्लेंट कमेटी होती है, यदि ना हो तो महिलाएं मैनेजमेंट पर इंटर्नल कमेटी बनाने का दबाव भी बना सकती हैं,
महिलाओं का कार्यस्थल यानि जहां भी महिला कार्यरत है,चाहे वह कोई सरकारी संस्थान है अथवा निजी, सम्पूर्ण भारत में कहीं भी, कार्यस्थल पर महिलाओं को यौन उत्पीड़न से सुरक्षा प्रदान करने और एक सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करने के लिए POSH एक्ट (Prevention of Sexual Harassment Act, 2013) पाॅश अधिनियम बनाया गया है यह 9 दिसंबर 2013 से लागू हुआ, जो सभी सरकारी, निजी, संगठित और असंगठित क्षेत्रों में 10 या अधिक कर्मचारियों वाले संस्थानों पर अनिवार्य रूप से लागू होता है।
यानि हर उस संस्थान में जो 10 अथवा 10 से अधिक कर्मचारी वाले संस्थान हैं, में ‘इंटरनल कंप्लेंट कमिटी’ (Internal Committee – IC) का गठन अनिवार्य है।
यह समिति शिकायतों की जांच करती है और कानून के तहत 90 दिनों के भीतर कार्रवाई सुनिश्चित करती है।
पॉश (PoSH) एक्ट कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की रोकथाम, निषेध और शिकायत निवारण करना, यह कानून केवल महिलाओं की सुरक्षा के लिए है, जो किसी भी प्रकार के यौन व्यवहार (फिजिकल, वर्बल, या नॉन-वर्बल) के खिलाफ शिकायत दर्ज करा सकती हैं।
कोई भी पीड़ित महिला यदि किसी के सामने नहीं आना चाहती तो [SHe-Box] यानि (Sexual Harassment electronic–Box) के माध्यम से भी ऑनलाइन शिकायत कर सकती है, जरुरी ये है कि महिलाएं अपने आत्मविश्वास और आत्मसम्मान की रक्षा के लिए सजग हों।
राष्ट्रीय महिला आयोग हो या प्रदेश महिला आयोग POSH Act के प्रभावी कार्यान्वयन (implementation) को सुनिश्चित करने में प्रमुख संस्थाएं है, इसके अलावा, जिला स्तर पर भी महिला बाल विकास विभाग से सहायता ली जा सकती है, अपनी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
